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Chitrakoot News: गेहूं खरीद शुरू, बारिश से गुणवत्ता प्रभावित, 1200 मीट्रिक टन की खरीद
Tue, 14 Apr 2026 12:57 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Tue, 14 Apr 2026 12:57 AM IST
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फोटो न- 13सीकेटीपी 10 गल्ला मंडी के खाद्य विपणन के गोदाम में रखा धान। संवाद
चित्रकूट। जिले में सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद शुरू हो गई है लेकिन बारिश के कारण गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। अब तक कुल 1200 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है, जिसमें नमी और चमक की कमी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। इन चुनौतियों को देखते हुए जिला प्रशासन ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा। इसके जरिए वस्तुस्थिति से अवगत कराया है।
इस बार कटाई के समय हुई बारिश से खेतों और खलिहानों में रखा गेहूं भीग गया था। इससे गेहूं के दानों में नमी बढ़ गई है और वे काले पड़ गए हैं। शहर के गल्ला मंडी स्थित विपणन शाखा के क्रय केंद्र प्रभारी विनय त्रिपाठी ने बताया कि वर्तमान में आ रहे गेहूं में 20 से 25 फीसदी तक नमी है। जबकि खरीद के लिए अधिकतम 12 फीसदी नमी की छूट है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को सूचित करने के बाद ही गेहूं खरीदा जा रहा है और किसी भी किसान को लौटाया नहीं जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनके केंद्र पर अब तक 1100 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई है। गल्ला मंडी के एफ़सीआई केंद्र प्रभारी ने 500 क्विंटल गेहूं खरीदने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वे किसानों द्वारा लाए गए गेहूं के नमूने अधिकारियों के पास ले जा रहे हैं और सहमति मिलने पर खरीद करेंगे।
गुणवत्ता खराब होने से किसान भी चिंतित : बारिश के कारण गेहूं की गुणवत्ता खराब होने से किसान भी चिंतित हैं। सपहा गांव के किसान रामलाल और बालापुर खासलसा गांव के किसान महेश कुमार ने बताया कि बारिश से गेहूं में नमी आ गई थी। उन्होंने गेहूं को धूप में सुखाने के बाद ही बेचने के लिए केंद्रों पर लाया है। किसानों का कहना है कि गुणवत्ता प्रभावित होने के बावजूद खरीद होने से उन्हें राहत मिली है। इससे किसानों को अपनी फसल बेचने में आ रही बाधाओं से मुक्ति मिली है।
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बोले जिम्मेदार
खाद्य विपणन अधिकारी अविनाश झा ने बताया कि अभी तक 1200 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। बारिश होने से गेहूं नमी होने के साथ क्वालिटी अच्छी नहीं है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है। केंद्रीय टीम जिले में आकर इस समस्या को देखेगी।
गोदामों में तीन हजार मीट्रिक टन धान डंप
चित्रकूट। जिले की सरकारी गोदामों में तीन हजार मीट्रिक टन धान भरा पड़ा है और गेहूं की खरीद शुरू होने के बावजूद उसे रखने की जगह नहीं मिल पा रही है। केंद्र प्रभारियों को समझ नहीं आ रहा कि गेहूं कहां रखा जाए।
गल्ला मंडी के वितरण शाखा के केंद्र प्रभारी विनय त्रिपाठी ने बताया कि उनकी गोदाम में अभी भी 11 हजार क्विंटल धान मौजूद है। खाद्य विपणन अधिकारी अविनाश झा ने भी पुष्टि की। बताया कि जिले की गोदामों में तीन हजार मीट्रिक टन धान रखा है। उन्होंने बताया कि जिले में राइस मिल न होने के कारण धान का उठान नहीं हो पा रहा है। इसके अतिरिक्त, बांदा जिले के अतर्रा स्थित राइस मिल से निकले चावल का उठान भी भारत सरकार के डिपो में जगह न होने से रुका हुआ है। इसी कारण चित्रकूट से धान का उठान बाधित है।
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इस बार कटाई के समय हुई बारिश से खेतों और खलिहानों में रखा गेहूं भीग गया था। इससे गेहूं के दानों में नमी बढ़ गई है और वे काले पड़ गए हैं। शहर के गल्ला मंडी स्थित विपणन शाखा के क्रय केंद्र प्रभारी विनय त्रिपाठी ने बताया कि वर्तमान में आ रहे गेहूं में 20 से 25 फीसदी तक नमी है। जबकि खरीद के लिए अधिकतम 12 फीसदी नमी की छूट है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को सूचित करने के बाद ही गेहूं खरीदा जा रहा है और किसी भी किसान को लौटाया नहीं जा रहा है। उन्होंने बताया कि उनके केंद्र पर अब तक 1100 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई है। गल्ला मंडी के एफ़सीआई केंद्र प्रभारी ने 500 क्विंटल गेहूं खरीदने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वे किसानों द्वारा लाए गए गेहूं के नमूने अधिकारियों के पास ले जा रहे हैं और सहमति मिलने पर खरीद करेंगे।
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गुणवत्ता खराब होने से किसान भी चिंतित : बारिश के कारण गेहूं की गुणवत्ता खराब होने से किसान भी चिंतित हैं। सपहा गांव के किसान रामलाल और बालापुर खासलसा गांव के किसान महेश कुमार ने बताया कि बारिश से गेहूं में नमी आ गई थी। उन्होंने गेहूं को धूप में सुखाने के बाद ही बेचने के लिए केंद्रों पर लाया है। किसानों का कहना है कि गुणवत्ता प्रभावित होने के बावजूद खरीद होने से उन्हें राहत मिली है। इससे किसानों को अपनी फसल बेचने में आ रही बाधाओं से मुक्ति मिली है।
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बोले जिम्मेदार
खाद्य विपणन अधिकारी अविनाश झा ने बताया कि अभी तक 1200 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो चुकी है। बारिश होने से गेहूं नमी होने के साथ क्वालिटी अच्छी नहीं है। इसे देखते हुए केंद्र सरकार को पत्र लिखकर अवगत कराया गया है। केंद्रीय टीम जिले में आकर इस समस्या को देखेगी।
गोदामों में तीन हजार मीट्रिक टन धान डंप
चित्रकूट। जिले की सरकारी गोदामों में तीन हजार मीट्रिक टन धान भरा पड़ा है और गेहूं की खरीद शुरू होने के बावजूद उसे रखने की जगह नहीं मिल पा रही है। केंद्र प्रभारियों को समझ नहीं आ रहा कि गेहूं कहां रखा जाए।
गल्ला मंडी के वितरण शाखा के केंद्र प्रभारी विनय त्रिपाठी ने बताया कि उनकी गोदाम में अभी भी 11 हजार क्विंटल धान मौजूद है। खाद्य विपणन अधिकारी अविनाश झा ने भी पुष्टि की। बताया कि जिले की गोदामों में तीन हजार मीट्रिक टन धान रखा है। उन्होंने बताया कि जिले में राइस मिल न होने के कारण धान का उठान नहीं हो पा रहा है। इसके अतिरिक्त, बांदा जिले के अतर्रा स्थित राइस मिल से निकले चावल का उठान भी भारत सरकार के डिपो में जगह न होने से रुका हुआ है। इसी कारण चित्रकूट से धान का उठान बाधित है।