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वाल्मीकि आश्रम का होगा कायाकल्प, काम शुरू
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महर्षि वाल्मीकि आश्रम में पूजन करते राज्यमंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय व अन्य।
- फोटो : CHITRAKUTT
चित्रकूट। प्राचीन वाल्मीकि आश्रम का कायाकल्प होेगा। बुधवार को कामों की शुरुआत के लिए भूमि पूजन हुआ। राज्यमंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय ने पूजन किया। इस आश्रम की स्थापना महर्षि वाल्मीकि ने की थी। यहां सीता और लव, कुश भी रहे थे।
जिले के लालापुर गांव में हाईवे किनारे वाल्मीकि आश्रम है। यह कई सालों से उपेक्षा का शिकार है। इससे पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। पिछले साल मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने यहां के विकास के लिए 1 करोड़ 86 लाख 15 हजार रुपये का बजट मंजूर किया था। तब वन विभाग ने काम में अड़ंगा लगा दिया था। स्वीकृति के बाद बुधवार को राज्यमंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय ने भूमि पूजन किया। सरकार से मिले बजट से आश्रम की सीढ़ियों के ऊपर टिन शेड डाला जाएगा। सीढ़ियों की मरम्मत होगी। चढ़ने के लिए रेलिंग बनाई जाएगी। पानी व लाइट की व्यवस्था होगी। आश्रम के महंत भरतदास ने बताया कि आश्रम की स्थापना आदि महर्षि वाल्मीकि ने की थी। यहां सीता और लव, कुश भी रहे थे। मंदिर में सीता की मूर्ति स्थापित है। इन्हें आशवर माता के नाम से जाना जाता है। इसका मतलब है कि सीता आशा के अनुरूप आशीर्वाद देती हैं। हजारों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।
इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष चंद्र प्रकाश खरे, पर्यटन अधिकारी शक्ति प्रताप सिंह, वन विभाग के प्रभागीय अधिकारी कैलाश प्रकाश, वन विभाग के एसडीओ आरके दीक्षित, दिगंबर अखाड़ा के महंत दिव्यजीवन दास, वाल्मीकि आश्रम के महंत भरतदास, तुलसीदास गुफा के महंत मोहित दास, निर्मोही अखाड़ा के महंत दीन दयाल, मुन्ना शास्त्री, नांदी हनुमान मंदिर के संत महेंद्र दास आदि मौजूद रहे।
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जिले के लालापुर गांव में हाईवे किनारे वाल्मीकि आश्रम है। यह कई सालों से उपेक्षा का शिकार है। इससे पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। पिछले साल मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने यहां के विकास के लिए 1 करोड़ 86 लाख 15 हजार रुपये का बजट मंजूर किया था। तब वन विभाग ने काम में अड़ंगा लगा दिया था। स्वीकृति के बाद बुधवार को राज्यमंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय ने भूमि पूजन किया। सरकार से मिले बजट से आश्रम की सीढ़ियों के ऊपर टिन शेड डाला जाएगा। सीढ़ियों की मरम्मत होगी। चढ़ने के लिए रेलिंग बनाई जाएगी। पानी व लाइट की व्यवस्था होगी। आश्रम के महंत भरतदास ने बताया कि आश्रम की स्थापना आदि महर्षि वाल्मीकि ने की थी। यहां सीता और लव, कुश भी रहे थे। मंदिर में सीता की मूर्ति स्थापित है। इन्हें आशवर माता के नाम से जाना जाता है। इसका मतलब है कि सीता आशा के अनुरूप आशीर्वाद देती हैं। हजारों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।
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इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष चंद्र प्रकाश खरे, पर्यटन अधिकारी शक्ति प्रताप सिंह, वन विभाग के प्रभागीय अधिकारी कैलाश प्रकाश, वन विभाग के एसडीओ आरके दीक्षित, दिगंबर अखाड़ा के महंत दिव्यजीवन दास, वाल्मीकि आश्रम के महंत भरतदास, तुलसीदास गुफा के महंत मोहित दास, निर्मोही अखाड़ा के महंत दीन दयाल, मुन्ना शास्त्री, नांदी हनुमान मंदिर के संत महेंद्र दास आदि मौजूद रहे।
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