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Chitrakoot News: 22 स्टैंड में दो किलो का विस्फोटक
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चित्रकूट। कार्यक्रम स्थल पर आतिशबाजी के लिए लगाये गए 22 स्टैंडों में लगभग दो किलो बारूद होने की संभावना जताई गई है। आयोजक इसे लेकर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं लेकिन स्थानीय पटाखा बेचने वाले दुकानदारों का कहना है कि एक साथ अगर इन पटाखों का विस्फोट होता तो लगभग 30 मीटर के दायरे के लोग प्रभावित होते।
आतिशबाजी के लिए कार्यक्रम स्थल के आसपास सुरक्षा के इंतजाम के नाम पर फायर बिग्रेड का वाहन तो खड़ा था लेकिन पटाखों के स्टैंड के पास किसी को पहुंचने से रोकने के लिए कोई सुरक्षाकर्मी या आयोजक टीम का सदस्य नहीं था। आतिशबाजी की डोंप कंपनी के व्यवस्थापक पंकज जाट ने बताया कि चारों ओर से बैरीकेटिंग लगाई गई थी। विस्फोट का सही कारण तो नहीं पता लेकिन वहां तक पहुंचे बच्चों ने जरूर तार व पटाखा के साथ छेडख़ानी की जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ। सुरक्षा के लिए ही मैदान में यह स्टैंड लगाए गए थे।
स्थानीय स्तर पर पटाखा का काम करने वाले मो. इदरीश का कहना है कि सभी स्टैंडों पर एक साथ विस्फोट होना मुश्किल होता है। मैदान में लगे होने के कारण इसके पास रहने वाले ज्यादा प्रभावित होते। कुल मिलाकर इन स्टंैडों में लगभग दो किलो बारूद का प्रयोग किया गया होगा। यह सब पटाखे रेडीमेड ही खरीदे जाते हैं। ज्यादातर यह पटाखे रिमोट व बिजली के बोर्ड के स्विच से संचालित होते हैं।
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आतिशबाजी के लिए कार्यक्रम स्थल के आसपास सुरक्षा के इंतजाम के नाम पर फायर बिग्रेड का वाहन तो खड़ा था लेकिन पटाखों के स्टैंड के पास किसी को पहुंचने से रोकने के लिए कोई सुरक्षाकर्मी या आयोजक टीम का सदस्य नहीं था। आतिशबाजी की डोंप कंपनी के व्यवस्थापक पंकज जाट ने बताया कि चारों ओर से बैरीकेटिंग लगाई गई थी। विस्फोट का सही कारण तो नहीं पता लेकिन वहां तक पहुंचे बच्चों ने जरूर तार व पटाखा के साथ छेडख़ानी की जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ। सुरक्षा के लिए ही मैदान में यह स्टैंड लगाए गए थे।
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स्थानीय स्तर पर पटाखा का काम करने वाले मो. इदरीश का कहना है कि सभी स्टैंडों पर एक साथ विस्फोट होना मुश्किल होता है। मैदान में लगे होने के कारण इसके पास रहने वाले ज्यादा प्रभावित होते। कुल मिलाकर इन स्टंैडों में लगभग दो किलो बारूद का प्रयोग किया गया होगा। यह सब पटाखे रेडीमेड ही खरीदे जाते हैं। ज्यादातर यह पटाखे रिमोट व बिजली के बोर्ड के स्विच से संचालित होते हैं।
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