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सुखे से परेशान किसान अनशन पर बैठा

Thu, 03 Dec 2015 11:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, चित्रकूट
अमर उजाला ब्यूरो, चित्रकूट Updated Thu, 03 Dec 2015 11:36 PM IST
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Troubled by drought farmer sitting on hunger strike

मऊ (चित्रकूट)। लगातार प्रकृति की मार से परेशान 63

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साल का किसान भगवान से लड़ने की जुर्रत कर बैठा। खेत में ही उसने पुआल का बिस्तर बनाया और लेट गया।

उसने ऐलान किया जब तक पानी नहीं बरसेगा वह न तो खाना खाएगा और न पानी पिएगा। न ही घर लौटेगा। घरवालों ने उसे बहुत समझाया पर न माना। बिना दाना पानी के वह चार दिन तक खेत में लेटा रहा। जब इसकी भनक प्रशासन को मिली तो हड़कंप मच गया।

आनन-फानन में चिकित्सक के साथ एसडीएम मौके पर पहुंचे और किसान को उठाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। वहां चिकित्सकों ने उसका फौरन इलाज किया अब हालत सामान्य हैै।


लहलहाती फसल पर अतिवृष्टि की मार और इसके बाद सूखे का कहर किसानों के लिए काल बनता जा रहा है। रोज कहीं न कहीं किसी न किसी किसान की मौत की जानकारी होती है। ऐसे में रामनगर ब्लाक के गांव हनुमानगंज के वृद्ध किसान रामसंवारे उर्फ बाबूलाल प्रजापति पुत्र भैरों प्रसाद अनशन पर बैठ गया।

उसकी पत्नी मेनिका ने बताया कि पिछली बार उसने खेत में अरहर बोई थी। वह बर्बाद हो गई। इस बार किसी तरह चना बोया तो उससे अंकुर तक ठीक से नहीं निकले। मेनिका ने बताया कि 29 नवंबर की शाम रामसंवारे घर से यह कहकर निकले कि जब तक पानी न बरसेगा।

घर नहीं लौटूंगा, खेत में रहूंगा और खाना-पानी भी नहीं लूंगा। घरवालों ने बहुत समझाया पर रामसंवारे की जिद के आगे किसी की न चली। उसने वहीं खेत में पुआल का बिस्तर बनाया और लेट गया। इस उम्मीद के साथ कि शायद अब भगवान पसीजे।

उधर, इस बात की भनक चार दिन बाद किसी तरह प्रशासन को लग गई। गुरुवार को एसडीएम राममूर्ति त्रिपाठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (मऊ) के अधीक्षक डा. शेखर वैश्य के साथ गांव पहुंचे और वृद्ध को जबर्दस्ती बिस्कुट खिलाकर और पानी पिलाकर अनशन तुड़वाया।

इसके बाद उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती करवाया गया। चिकित्सकों के अनुसार उसकी हालत सामान्य है। उधर, एसडीएम राममूर्ति त्रिपाठी ने बताया कि किसान के खेत के पास ट्यूबवेल लगवाने की व्यवस्था की जाएगी।


रामसंवारे के पास कुल जमा चार बीघा खेत है। वह भी पहाड़ के नीचे होने से सिंचाई का साधन न होने से बेकार पड़ा है। मेनिका ने बताया कि पिछली बार अरहर बोई थी लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब गेहूं का भी कोई ठिकाना नहीं है। चार बीघे खेत के भरोसे ही उसने अपनी पुत्रियों मुन्नी, चुन्नी और बच्ची की शादियां कीं।

उसका एकमात्र पुत्र श्यामू (45) भी खेती की हालत देख राजगीरी करने लगा। श्यामू के परिवार में भी उसकी पत्नी मैना के अलावा धर्मेंद्र (16), लवकुश (14) और अंकित (11) हैं। श्यामू को भी रोज काम नहीं मिलता। ऐसे में पूरे परिवार की आस यही एकमात्र खेत है।


एक ही माइनर के भरोसे हैं लोग मऊ तहसील मुख्यालय से लगभग 18 किमी दूर बसे लौरी ग्राम पंचायत के मजरे हनुमानगंज की आबादी लगभग पांच सौ होगी। गांववाले बताते हैं कि लौरी 2002 में लोहिया समग्र गांव था। ग्राम पंचायत में तो थोड़ा बहुत विकास हुआ लेकिन हनुमानगंज इससे अछूता रह गया।

मजरे के किसान जयंती बांध से निकली लौरी माइनर के भरोसे हैं। गांववालों की मानें तो अरसे से इसमें भी ठीक से पानी नहीं मिला। ऐसे में सिंचाई के लिए गरीब किसान भगवान भरोसे रहता है।


तीन साल पहले लिया था केसीसी से ऋण रामसंवारे के भतीजे देवनाथ ने बताया कि उसके चाचा ने तीन साल पहले इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक की शाखा (खंडेहा) से केसीसी के तहत 25 हजार का ऋण लिया था। उसका आरोप था कि तब भी दलालों के बीच में आ जाने की वजह से उसे 19 हजार ही मिल सका।

बताया कि खेती की लगातार बर्बादी की वजह से उसके इस कर्ज को भरने की भी नौबत नहीं आई। मेनिका ने बताया कि उन लोगों को बीपीएल का भी लाभ नहीं मिला।

एपीएल कार्ड होने से सिर्फ दो लीटर मिट्टी का तेल मिलता है। इस संबंध में जानकारी लेने पर एडीओ पंचायत (मऊ) शिवाकांत मिश्रा ने बताया कि असिंचित आठ बीघा जमीन तक संबंधित को बीपीएल कार्ड मिल जाता है। हो सकता है कि इसका नाम 2002 की बीपीएल सूची में न हो, जिससे यह पात्र न बन सका।

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