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अधिकारों के प्रति थोड़ा सजग हुए आदिवासी
ब्यूरो/ अमर उजाला, चित्रकूट
Updated Sun, 18 Jan 2015 11:42 PM IST
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आदिवासियों में मानवाधिकार को लेकर थोड़ी चेतना आई है लेकिन और सचेत होने की जरूरत है। ये कहना है डेनमार्क से आए दंपति हैंड्रीटेट हेनरिक्सन और जार्गन मैटसन का। जिले में बालवाड़ी की स्थापना करने वाले विदेशी दंपति कई बार यहां आ चुके हैं। उनका कहना है कि यहां विकास भी काफी हुआ है।
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हैंड्रीटेट ने बताया कि 2001 से वह अब तक लगभग दस बार चित्रकूट और बरगढ़ की यात्रा कर चुके हैं। जब वे पहली बार यहां आए थे तो जंगल बहुत था। लोग खेती को लेकर उदासीन थे और महिलाएं भी डरी सहमी रहती थीं। घरों में गंदगी थी और बच्चे स्कूल जाने से कतराते थे।
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उन्होंने कहा कि अब जिले में स्थितियां बदली हैं।। महिलाओं में जागरूकता आई है और घरों में भी सफाई नजर आती है। उन्होंने बताया कि 2004 में ग्राम पंचायत बोझ में सर्वोदय सेवा आश्रम के साथ मिलकर बालवाड़ी की स्थापना की थी, जिसमें बच्चे पढ़ रहे हैं।
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हेनरिक्सन दंपति ने मौके पर मौजूद भारतीय मानवाधिकार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष अमित शुक्ला, सर्वोदय सेवा आश्रम के अभिमन्यु सिंह, सत्येंद्र शुक्ला आदि से कहा कि आदिवासियों के ज्ञानवर्धन के लिए अंग्रेजी शिक्षा का भी केंद्र होना चाहिए।
अमित ने बताया कि दंपति ने मोड़ कालोनी के पास रहने वाली आदिवासी बालिका गुड़िया को गोद ले रखा है। उसकी पढ़ाई का खर्चा ये वहन करते हैं।