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डाकू ठोकिया का भाई दीपक बना प्रधान
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चित्रकूट। जिले में एक और डाकू परिवार का सदस्य ग्राम प्रधान बन गया है। कुख्यात डाकू यूपी एमपी से साढे़ छह लाख का इनामी ठोकिया उर्फ अंबिका पटेल का भाई दीपक पटेल ने ग्राम प्रधान का चुनाव बंदरी से जीत लिया है। उसकी इस जीत पर परिजन व उसके समर्थकों ने बधाई दी है। प्रधान दीपक भी अपने भाई ठोकिया के मारे जाने के बाद पुलिस रिकार्ड में 25 हजार का इनामी बना था और पुलिस के सामने आत्मसमर्पण भी कर दिया था। इसके बाद से वह गांव में ही रहकर जीवन यापन कर रहा है। डाकू ठोकिया के परिवार में पहले भी जनप्रतिनिधि बन चुके हैं।
सदर ब्लाक कर्वी चित्रकूट की बंदरी ग्राम पंचायत से दीपक पटेल ने प्रधान पद का चुनाव बेहद गुपचुप तरीके से लड़ा। इस गांव में कुल आठ प्रत्याशी मैदान में थे। दीपक का दबदबा कुछ ऐसा रहा कि उसे 535 वोट मिले और दूसरे नंबर पर रहे सुधीर गर्ग को 196 वोट ही मिल पाए। इस प्रकार दीपक पटेल 339 वोट से जीतकर प्रधान बन गया। ठोकिया के परिवार में उसकी दो चाची जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं। उसकी मां भी विधान सभा का चुनाव लड़ी थी लेकिन बहुत कम वोट से हार गई थी।
यूपी एमपी से साढे छह लाख के इनामी डाकू अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया ने एसटीएफ के सात सिपाहियों की सामूहिक हत्या की थी। ठोकिया के मारे जाने के बाद उसके भाई दीपक का नाम भी इसी मामले में दर्ज था। रायबरेली में पढ़ाई के दौरान नाबालिग दीपक को एसटीएफ उठा कर प्रयागराज ले आई थी। वहां से दीपक गन लेकर भाग निकला था। उसे पुलिस ने कई बार पकड़ा और जेल भेजा। ठोकिया के मारे जाने के बाद 25 हजार का इनामी भी था। इन केसों से वह बरी हो चुका है।
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सदर ब्लाक कर्वी चित्रकूट की बंदरी ग्राम पंचायत से दीपक पटेल ने प्रधान पद का चुनाव बेहद गुपचुप तरीके से लड़ा। इस गांव में कुल आठ प्रत्याशी मैदान में थे। दीपक का दबदबा कुछ ऐसा रहा कि उसे 535 वोट मिले और दूसरे नंबर पर रहे सुधीर गर्ग को 196 वोट ही मिल पाए। इस प्रकार दीपक पटेल 339 वोट से जीतकर प्रधान बन गया। ठोकिया के परिवार में उसकी दो चाची जिला पंचायत सदस्य रह चुकी हैं। उसकी मां भी विधान सभा का चुनाव लड़ी थी लेकिन बहुत कम वोट से हार गई थी।
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यूपी एमपी से साढे छह लाख के इनामी डाकू अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया ने एसटीएफ के सात सिपाहियों की सामूहिक हत्या की थी। ठोकिया के मारे जाने के बाद उसके भाई दीपक का नाम भी इसी मामले में दर्ज था। रायबरेली में पढ़ाई के दौरान नाबालिग दीपक को एसटीएफ उठा कर प्रयागराज ले आई थी। वहां से दीपक गन लेकर भाग निकला था। उसे पुलिस ने कई बार पकड़ा और जेल भेजा। ठोकिया के मारे जाने के बाद 25 हजार का इनामी भी था। इन केसों से वह बरी हो चुका है।
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