{"_id":"6180722c28b23370b8c4e58cddd8c635","slug":"thokia-avenge-sister-jumped-in-ravines-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बहन का बदला लेने बीहड़ों में कूदा था ठोकिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बहन का बदला लेने बीहड़ों में कूदा था ठोकिया
ब्यूरो/ अमर उजाला, चित्रकूट
Updated Thu, 16 Jul 2015 11:27 PM IST
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ददुआ के मारने के बाद जब पुलिस की टीम जीप से कोल्हुआ
के जंगल से निकल रही थी तो वहां घात लगाए बैठे ठोकिया ने हमला बोल दिया
था। हमले में छह एसटीएफ के जवान और एक मुखबिर की मौत हो गई थी।
ठोकिया उर्फ डाक्टर उर्फ अंबिका पटेल सिलखोरी (भरतकूप) का रहने वाला था। बताया जाता है कि बहन के साथ हुई छेड़छाड़ का बदला लेने को वह जंगल में कूदा था। गांव का झोलाछाप डाक्टर बदले की आग में झुलसकर दुर्दांत बन गय। इसी क्षेत्र के रहने वाले डाकिया (नाम) के लड़के ने उसकी बहन के साथ छेड़छाड़ की थी।
सजातीय होने के चलते जब उसने उससे शादी करने का प्रस्ताव रखा तो मजाक उड़ाया गया और ठोकिया के साथ मारपीट भी की गई। बीहड़ों में कूदने के बाद ठोकिया ने पहली वारदात के रूप में डाकिया के दूसरे पुत्र को मार डाला और ऐलान किया कि जो भी इसकी अर्थी को कंधा देगा, वह मेरा दुश्मन होगा।
तब भरतकूप क्षेत्र का ओमनाथ पटेल आगे आया। उसने न केवल अर्थी को कंधा देकर अंतिम संस्कार कराया, बल्कि ठोकिया के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया। विडंबना रही कि जिसने बहन को छेड़ा था, वह ताउम्र ठोकिया के हाथ नहीं लगा। अलबत्ता अब दुश्मनी का केंद्र सीधे सीधे ओमनाथ बन गया।
बिछियन (मप्र) में ओमनाथ के परिवार के कई सदस्यों समेत तकरीबन आधा दर्जन लोगों को ठोकिया गैंग से ही जुड़े सुंदर पटेल उर्फ रागिया ने जिंदा फूंक दिया था। इसके बाद कई जगहों पर ओमनाथ से गैंग की सीधे मोर्चाबंदी हुई पर ओमनाथ को हर बार भाग्य का सहारा मिला। अंतत: चार अगस्त 2008 को अपने गांव के नजदीक सिलखोरी में एसटीएफ के हाथों मुठभेड़ में सात लाख का इनामी ठोकिया मारा गया।
अब दो जुलाई को कथित पुलिस मुठभेड़ में बलखड़िया की मौत ने जिले से आतंक के एक और काले अध्याय का समापन कर दिया। अब गौरी यादव का गिरोह तो लिस्टेड है ही, बलखड़िया के गिरोह में भी कई ऐसे नाम हैं, जो इस आपराधिक परंपरा को जारी रख सकते हैं। कई छुटभैये गिरोहों का नाम भी है।
ठोकिया उर्फ डाक्टर उर्फ अंबिका पटेल सिलखोरी (भरतकूप) का रहने वाला था। बताया जाता है कि बहन के साथ हुई छेड़छाड़ का बदला लेने को वह जंगल में कूदा था। गांव का झोलाछाप डाक्टर बदले की आग में झुलसकर दुर्दांत बन गय। इसी क्षेत्र के रहने वाले डाकिया (नाम) के लड़के ने उसकी बहन के साथ छेड़छाड़ की थी।
सजातीय होने के चलते जब उसने उससे शादी करने का प्रस्ताव रखा तो मजाक उड़ाया गया और ठोकिया के साथ मारपीट भी की गई। बीहड़ों में कूदने के बाद ठोकिया ने पहली वारदात के रूप में डाकिया के दूसरे पुत्र को मार डाला और ऐलान किया कि जो भी इसकी अर्थी को कंधा देगा, वह मेरा दुश्मन होगा।
तब भरतकूप क्षेत्र का ओमनाथ पटेल आगे आया। उसने न केवल अर्थी को कंधा देकर अंतिम संस्कार कराया, बल्कि ठोकिया के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया। विडंबना रही कि जिसने बहन को छेड़ा था, वह ताउम्र ठोकिया के हाथ नहीं लगा। अलबत्ता अब दुश्मनी का केंद्र सीधे सीधे ओमनाथ बन गया।
बिछियन (मप्र) में ओमनाथ के परिवार के कई सदस्यों समेत तकरीबन आधा दर्जन लोगों को ठोकिया गैंग से ही जुड़े सुंदर पटेल उर्फ रागिया ने जिंदा फूंक दिया था। इसके बाद कई जगहों पर ओमनाथ से गैंग की सीधे मोर्चाबंदी हुई पर ओमनाथ को हर बार भाग्य का सहारा मिला। अंतत: चार अगस्त 2008 को अपने गांव के नजदीक सिलखोरी में एसटीएफ के हाथों मुठभेड़ में सात लाख का इनामी ठोकिया मारा गया।
अब दो जुलाई को कथित पुलिस मुठभेड़ में बलखड़िया की मौत ने जिले से आतंक के एक और काले अध्याय का समापन कर दिया। अब गौरी यादव का गिरोह तो लिस्टेड है ही, बलखड़िया के गिरोह में भी कई ऐसे नाम हैं, जो इस आपराधिक परंपरा को जारी रख सकते हैं। कई छुटभैये गिरोहों का नाम भी है।