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जरायम की दुनिया से तौबा करने को रोका तो पत्नी को मारी गोली

Sun, 31 Oct 2021 12:00 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 31 Oct 2021 12:00 AM IST
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The wife was shot when she stopped repenting from the world of Jarayam
चित्रकूट। ट्रक व चार पहिया वाहन चलाकर परिवार का भरण पोषण करने वाले उदयभान उर्फ गौरी ने साल 2001 में इस जरायम की दुनिया में कदम रख दिया। 2004 में बरौधा मप्र के थाने में पहला मामला दर्ज हुआ इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। पत्नी ने अपराध करने से रोका तो उसे भी गोली मार दी।
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पत्नी हीराकली ने बताया कि दस साल पूर्व जब वह गांव में मिलने आया था तो उसका शस्त्र छीनकर इस दुनिया से तौबा करने को कहा तो उसने गोली चला दी थी उसके बाएं हाथ के पंजे में गोली लगी थी।
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खड़ग सिंह (पूर्व डाकू) के साथ अपराध करने वाला गौरी को पुलिस ने 10 जनवरी 2009 को एसटीएफ ने ही गिरफ्तार कर जेल भेजा था। सन 2013 में जमानत पर छूटकर आने के बाद बेलहरी गांव जांच में पहुंचे दिल्ली के दरोगा जयभगवान शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी और उसकी रिवाल्वर लूट ली थी। 2016 में कोल्हुआ जंगल में एक पेड़ से तीन ग्रामीणों को बांधकर जिंदा जला दिया था। 2017 में धर्मेंद्र पांडेय व हरीश पांडेय का अपहरण कर फिरौती वसूली फिर हत्या भी कर दी थी। कई बार यूपी एमपी पुलिस से मुठभेड़ हुई लेकिन बचकर भाग निकला।
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हाईस्कूल पास था गौरी
बहिलपुरवा थाना के माड़ो बांध के पास बेलहरी गांव का रहने वाले डाकू गौरी की मां राजरानी के अनुसार डकैत गौरी यादव पिता की मौत तीन साल की उम्र में ही हो गई थी। पिता का साया उठने के बाद बिलहरी गांव के पास हीं स्थित सपहा के कॉलेज में कक्षा 10 तक पढ़ाई की। गौरी ने पढ़ाई चलाने के लिए कुछ लोगों के वाहन चलाने शुरू किया। कुछ दिन पहले कर्वी से मड्ैइयन तक सवारियां गाड़ी चलाया। 18 साल की उम्र में गौरी की शादी पहाड़ी क्षेत्र के बारा कादरगंज में हुई थी। शादी के बाद उसके दो बेटे और दो बेटियां भी हुई। जिनमें दोनो बेटियों की तो शादी की बातचीत चल रही है। उसके दोनो बेटे पढाई कर कैरियर बनाने में जुटे हैं। गौरी पाठा क्षेत्र में अपनी शान बढ़ाने के लिए पुलिस की मुखबिरी करने लगा। आगे चलकर एसटीएफ के लिए भी काम करने लगा। इस तरह से वह आगे चलकर डाकू बन गया।
यूपी एमपी के जंगल का फायदा उठाते रहे
चित्रकूट। यूपी एमपी सीमा सहित पहाड़ी इलाका होने के कारण डकैत इसका फायदा उठाते रहे है। जिसमेें अमरावती का जंगल, बेधक का जंगल, मानिकपुर क्षेत्र के चमरउहा, संकरहा का जंगल, भरतकूप क्षेत्र के फतेहगंज का जंगल सहित बरगढ़ का जंगल व प्रयागराज जिले की सीमा भी लगती है। संवाद
विकास कार्यों में कमीशन की वसूली करता रहा
चित्रकूट। डाकू गौरी यादव जिले में कराये जा विकास कार्यों में ठेकेदारों से वसूली करने का काम करता था। जिसमेें जितनी लागत होती थी उसमेें 10 से 20 प्रतिशत कमीशन की वसूली करता था। कई बार ठेकेदारों ने थानों में मामला भी दर्ज कराया है। वही तेंदू पत्ता के कार्यों में भी वसूली किया करता था। कुछ दिन पहले मानिकपुर क्षेत्र के वन विभाग के गढ़चपा के जंगल मेें पौध रोपण के कार्य को कमीशन न मिलने पर रुकवा दिया था। उसी समय से पुलिस अधिकारी इसके पीछे पड़ गये थे। कई सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया था। जिससे गैरी यादव गैंग कमजोर पड़ गया था। संवाद
खुद की कमान संभाले रहा
चित्रकूट। डाकू गौरी यादव किसी दूसरे गैंग में कभी शामिल नहीं हुआ। खुद ही कमान संभाले रहता था। पुलिस के दबाव के कारण गैंग के कई सदस्य उसका साथ छोड़ दिया था। इसके बाद भी वह हिम्मत नहीं हरा। कुछ नये सदस्य गैंग से जोड़कर गैंग को मजबूत कर रहा था। उसी दौरान एसटीएफ ने उसका काम तमाम कर दिया। संवाद

ए के 47 राइफल व चाइनीज राइफल कहां से आई
मुठभेड़ में मारे गये डकैत गौरी यादव के पास एसटीएफ ने एक एके 47 राइफल, चाइनीज रायफल व तमंचा बरामद होने की बात कहीं है। जिसमेें उसके पास आधुनिक हथियार कहा से आये यह प्रश्र उठाये जा रहे हैं। इस बात को लेकर कोई पुलिस अधिकारी भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। जबकि ग्रामीणों का मानना है कि एक समय गौरी एसटीएफ के लिए कार्य करता था। उसी दौरान उसको हथियार मिले होंगे। जबकि यह भी कहा जा रहा है कि एक समय बांदा जिले के कालिंजर क्षेत्र के पप्पू यादव ने पुलिस से एके 47 राइफल छीनी थी। जो आगे चलकर डाकू गौरी को दे दिया था। उसी समय से उसके पास से एके 47 राइफल है। वही चाइनीज रायफल को लेकर कहा जा रहा है कि ऐसे आधुनिक हथियार डाकुओं के पास कहा से आते है। इसकी भी जांच होनी चाहिए।
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