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खाद की कालाबाजारी बढ़ा रही परेशानी

Sat, 25 Dec 2021 12:00 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 25 Dec 2021 12:00 AM IST
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The problem of increasing black marketing of fertilizers
एक बोरी खाद के लिए सुबह से गोदाम के पास मौजूद किसान। संवाद - फोटो : CHITRAKOOT
चित्रकूट। बुआई व सिंचाई के समय खाद न मिलने से किसान परेशान हैं। समितियों से खाद लेने के लिए लाइन में घंटों लगना पड़ रहा है। किसानों ने जिला प्रशासन से पर्याप्त मात्रा में खाद मुहैया कराने की मांग की है।
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यूरिया व डीएपी के लिए किसानों को मुश्किलें उठानी पड़तीं हैं। समय से खाद न मिलने पर किसानों को नुकसान भी उठाना पड़ता है। खाद की कमी का फायदा उठाकर कई समितियों व दुकानों में कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आ रहीं हैं। वहीं जिला प्रशासन समितियों में पर्याप्त मात्रा में खाद होने का दावा कर रहा है।
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जिला कृषि अधिकारी आरपी शुक्ला ने बताया कि प्राइवेट दुकानों से यूरिया का वितरण न होने से यह समस्या आ रही है। जितनी खाद का वितरण होता था उसमें आधी खाद प्राइवेट दुकानों से वितरित होती थी। इस बार शासन की तरफ से प्राइवेट दुकानों से वितरण कराने पर रोक लगी हुई है। यूरिया खाद की कोई कमी नहीं है। अभी तक 11 हजार मैट्रिक टन खाद का वितरण किया गया है। 20 हजार मैट्रिक टन खाद का वितरण कराया जाएगा। खाद की कोई कालाबाजारी नहीं हो रही है। आधार कार्ड के पंजीकरण के बाद ही खाद किसानों को दी जा रही है। डीएपी की खाद अभी भी 1400 मैट्रिक टन सुरक्षित स्टॉक में है। इस बार रबी की फसल की बुुआई अधिक हुई है।
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बोले किसान
किसान संत किशोर निवासी भारतपुर ने बताया कि सहकारी समितियों में अपने चहेते किसानों को पांच-पांच बोरियां खाद दी जा रही है। जबकि अन्य किसानों को दो ही बोरी दी जा रही है। जिससे खाद की किल्लत बनी रहती है।
किसान रामेश्रवर ने बताया कि प्राइवेट दुकानों में खाद नहीं मिल रही है। जिससे सहकारी समितियों में अधिक भीड़ लग रही है। खाद लेने की प्रक्रिया भी बहुत कठिन है। जिसमें पॉस मशीन में अंगूठा लगवाया जाता है। आधार कार्ड को देखकर पंजीकरण किया जाता है। जिससे एक किसान के पंजीकरण में लगभग आधा घंटा लगा जाता है।

सपहा गांव की किसान संगीता ने बताया कि दो दिनों से खाद लेने के लिए वह चक्कर लगा रही है। इसके बाद भी खाद नहीं मिल रही है। जिससे वह परेशान है। उसने खाद लेने के लिए पंजीकरण भी करा लिया है।
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