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Chitrakoot News: मैदान साफ...पनपने से पहले ही 50 फीसदी पौधे नष्ट
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पौधरोपण अभियानों का सच: पिछले सालों में रोपे गए पौधे संरक्षण के अभाव में मिट गए, बच गए डंठल
जिम्मेदार बोले-प्राकृतिक कारणों से 10 फीसदी पौधे ही नष्ट हुए जबकि धरातल पर 50 फीसदी पौधे साफ
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। प्रकृति को हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से हर साल चलाए जाने वाले पौधरोपण महाअभियान की जमीनी हकीकत चौंकाने वाली है। चित्रकूट में हर साल लाखों पौधे रोपे तो जा रहे हैं लेकिन देखरेख न होने से अधिकांश पौधे विकसित होने से पहले ही मुरझा जाते हैं। हालांकि जिम्मेदार प्राकृतिक कारणों से 10 फीसदी पौधे नष्ट होने का दावा कर रहे हैं जबकि धरातल पर संरक्षण के अभाव में 50 फीसदी पौधे साफ हो चुके हैं। कहीं-कहीं डंठल जरूर दिखाई पड़ते हैं।
सरकारी विभागों, ग्राम पंचायतों और अन्य संस्थानों में लगाए गए पौधे या तो पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। इस वर्ष भी 78.30 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है लेकिन पिछले वर्षों के अनुभव को देखते हुए इस लक्ष्य की पूर्ति और लगाए गए पौधों के संरक्षण को लेकर संशय बरकरार है।
पिछले चार वर्षों के दौरान वन विभाग और अन्य सरकारी संस्थानों की ओर तीन करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। विशेष अभियानों के तहत एक दिन में 20 से 25 लाख पौधे तक रोपे गए। हालांकि इन पौधों की देखभाल न होने से ज्यादातर सूख सूख गए। कई ग्राम पंचायतों, स्कूलों, कॉलेजों और विभागों में लगाए गए पौधे या तो पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं या उनका कहीं अता-पता नहीं है।
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पर्यावरण विशेषज्ञ गुंजन मिश्रा ने बताया है कि चित्रकूट के जंगलों में अब केवल तेंदू के पेड़ ही बचे हैं। पहाड़ों में चल रहे अनियंत्रित खनन ने भी पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचाया है। पूर्व सांसद आरके सिंह पटेल ने भी पौधरोपण में लापरवाही का आरोप लगाते हुए दो साल पहले बैठक में इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी।
इनसेट
सड़क चौड़ीकरण के नाम पर पेड़ों की कटाई
जिला मुख्यालय के बेड़ी पुलिया से सीतापुर तक सड़क चौड़ीकरण के दौरान पीपल, बरगद और महुआ जैसे छायादार पेड़ों को काटा दिया गया। इनकी जगह खजूर के पेड़ लगाए गए जिनमें से कई सूख चुके हैं। इसी प्रकार मंदाकिनी नदी के किनारे भी पौधे लगाने की योजना बताई गई है लेकिन हकीकत यह है कि कई स्थानों पर लगाए गए पौधों का अस्तित्व ही नहीं है।
केस न- एक
फोटो न-05 सीकेटीपी 33 ब्लॉक परिसर में वर्ष 2025 में रोपा गया सूखा पौधा । संवाद
ब्लॉक कार्यालय में लगाए गए पौधे सूखे
पहाड़ी विकास खंड कार्यालय में लगाए गए पौधों की देखभाल नहीं करने से सूख गए हैं। गांव के कमलेश कुमार, राकेश ने बताया कि पौधरोपण के नाम पर मात्र खानापूर्ति ही की जाती है। जिनकी देखभाल नहीं करने से पौधे सूख जाते हैं।
केस न- दो
फोटो न 05 सीकेटीपी 34 सदर मार्ग पर ट्रैफिक चौराहा पर रोपा गया सूखता पौधा । संवाद
सदर सड़क में लगाए गए पौधे सूख गए
शहर के सदर सड़क में भी कई स्थानों पर पौधरोपण किया गया। कई पौधों की देखभाल नहीं करने पौधे सूख रहे हैं। किसान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष रुद्र प्रसाद मिश्र कहना कि ऐसे पौधे लगाए जाते जिसमें जड़ तक का पता नहीं रहता है। मात्र लकड़ी ही लगा दी जाती है। पौधरोपण अभियान में ढिलाई की जाती है।
ग्राम पंचायतों में ज्यादातर पौधे सूख गए
चित्रकूट। सदर विकास खंड के सहायक विकास अधिकारी धर्मेंद्र यादव ने बताया कि सदर विकास खंड के ग्राम पंचायतों में पिछले साल पौध रोपण किया गया था। उन्होंने जांच किया है जिसमें अधिकतर ग्राम पंचायतों में पौधे पूरी तरह से सूख गए हैं। (संवाद)
20 ग्राम वन बनाए, पौधे नहीं लगाए
चित्रकूट। वन विभाग ने नमामि गंगे योजना के तहत मंदाकिनी नदी के किनारे पौध रोपण करने के लिए 20 ग्राम वन बनाए हैं। पहाड़ी के चौराच देवल मंदिर के पास, अरक्षा बरेठी में चेकडैम के पास, मंदाकिनी नदी के पुरवा तरौंहा में गोशाला पास बनकट में, सकरौली में कुटी आश्रम के पास, भंभौर में मंदाकिनी नदी किनारे वन ग्राम बनाए गए हैं। जहां पौधे लगाने की बात कही जा रही है जबकि हकीकत में देखा जाए तो कई स्थानों में पौधों का पता ही नहीं है।
रोपित पौधों (वर्षवार)
वर्ष रोपित पौधे
2022-63,64,010
2023-73,80, 818
2024-74,12, 671
2025-78,00,000
2026-78,30,000 (लक्ष्य)
वर्जन
जिले में पिछले वर्ष 78 लाख पौधे रोपे गए थे। लक्ष्य के सापेक्ष रोपे गए पौधों में महज 10 फीसदी पौधे नष्ट हुए हैं। जबकि 90 फीसनी पौधे हरे-भरे हो गए।- राजीव रंजन, उप वन अधिकारी
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जिम्मेदार बोले-प्राकृतिक कारणों से 10 फीसदी पौधे ही नष्ट हुए जबकि धरातल पर 50 फीसदी पौधे साफ
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। प्रकृति को हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से हर साल चलाए जाने वाले पौधरोपण महाअभियान की जमीनी हकीकत चौंकाने वाली है। चित्रकूट में हर साल लाखों पौधे रोपे तो जा रहे हैं लेकिन देखरेख न होने से अधिकांश पौधे विकसित होने से पहले ही मुरझा जाते हैं। हालांकि जिम्मेदार प्राकृतिक कारणों से 10 फीसदी पौधे नष्ट होने का दावा कर रहे हैं जबकि धरातल पर संरक्षण के अभाव में 50 फीसदी पौधे साफ हो चुके हैं। कहीं-कहीं डंठल जरूर दिखाई पड़ते हैं।
सरकारी विभागों, ग्राम पंचायतों और अन्य संस्थानों में लगाए गए पौधे या तो पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। इस वर्ष भी 78.30 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है लेकिन पिछले वर्षों के अनुभव को देखते हुए इस लक्ष्य की पूर्ति और लगाए गए पौधों के संरक्षण को लेकर संशय बरकरार है।
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पिछले चार वर्षों के दौरान वन विभाग और अन्य सरकारी संस्थानों की ओर तीन करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। विशेष अभियानों के तहत एक दिन में 20 से 25 लाख पौधे तक रोपे गए। हालांकि इन पौधों की देखभाल न होने से ज्यादातर सूख सूख गए। कई ग्राम पंचायतों, स्कूलों, कॉलेजों और विभागों में लगाए गए पौधे या तो पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं या उनका कहीं अता-पता नहीं है।
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पर्यावरण विशेषज्ञ गुंजन मिश्रा ने बताया है कि चित्रकूट के जंगलों में अब केवल तेंदू के पेड़ ही बचे हैं। पहाड़ों में चल रहे अनियंत्रित खनन ने भी पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचाया है। पूर्व सांसद आरके सिंह पटेल ने भी पौधरोपण में लापरवाही का आरोप लगाते हुए दो साल पहले बैठक में इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी।
इनसेट
सड़क चौड़ीकरण के नाम पर पेड़ों की कटाई
जिला मुख्यालय के बेड़ी पुलिया से सीतापुर तक सड़क चौड़ीकरण के दौरान पीपल, बरगद और महुआ जैसे छायादार पेड़ों को काटा दिया गया। इनकी जगह खजूर के पेड़ लगाए गए जिनमें से कई सूख चुके हैं। इसी प्रकार मंदाकिनी नदी के किनारे भी पौधे लगाने की योजना बताई गई है लेकिन हकीकत यह है कि कई स्थानों पर लगाए गए पौधों का अस्तित्व ही नहीं है।
केस न- एक
फोटो न-05 सीकेटीपी 33 ब्लॉक परिसर में वर्ष 2025 में रोपा गया सूखा पौधा । संवाद
ब्लॉक कार्यालय में लगाए गए पौधे सूखे
पहाड़ी विकास खंड कार्यालय में लगाए गए पौधों की देखभाल नहीं करने से सूख गए हैं। गांव के कमलेश कुमार, राकेश ने बताया कि पौधरोपण के नाम पर मात्र खानापूर्ति ही की जाती है। जिनकी देखभाल नहीं करने से पौधे सूख जाते हैं।
केस न- दो
फोटो न 05 सीकेटीपी 34 सदर मार्ग पर ट्रैफिक चौराहा पर रोपा गया सूखता पौधा । संवाद
सदर सड़क में लगाए गए पौधे सूख गए
शहर के सदर सड़क में भी कई स्थानों पर पौधरोपण किया गया। कई पौधों की देखभाल नहीं करने पौधे सूख रहे हैं। किसान सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष रुद्र प्रसाद मिश्र कहना कि ऐसे पौधे लगाए जाते जिसमें जड़ तक का पता नहीं रहता है। मात्र लकड़ी ही लगा दी जाती है। पौधरोपण अभियान में ढिलाई की जाती है।
ग्राम पंचायतों में ज्यादातर पौधे सूख गए
चित्रकूट। सदर विकास खंड के सहायक विकास अधिकारी धर्मेंद्र यादव ने बताया कि सदर विकास खंड के ग्राम पंचायतों में पिछले साल पौध रोपण किया गया था। उन्होंने जांच किया है जिसमें अधिकतर ग्राम पंचायतों में पौधे पूरी तरह से सूख गए हैं। (संवाद)
20 ग्राम वन बनाए, पौधे नहीं लगाए
चित्रकूट। वन विभाग ने नमामि गंगे योजना के तहत मंदाकिनी नदी के किनारे पौध रोपण करने के लिए 20 ग्राम वन बनाए हैं। पहाड़ी के चौराच देवल मंदिर के पास, अरक्षा बरेठी में चेकडैम के पास, मंदाकिनी नदी के पुरवा तरौंहा में गोशाला पास बनकट में, सकरौली में कुटी आश्रम के पास, भंभौर में मंदाकिनी नदी किनारे वन ग्राम बनाए गए हैं। जहां पौधे लगाने की बात कही जा रही है जबकि हकीकत में देखा जाए तो कई स्थानों में पौधों का पता ही नहीं है।
रोपित पौधों (वर्षवार)
वर्ष रोपित पौधे
2022-63,64,010
2023-73,80, 818
2024-74,12, 671
2025-78,00,000
2026-78,30,000 (लक्ष्य)
वर्जन
जिले में पिछले वर्ष 78 लाख पौधे रोपे गए थे। लक्ष्य के सापेक्ष रोपे गए पौधों में महज 10 फीसदी पौधे नष्ट हुए हैं। जबकि 90 फीसनी पौधे हरे-भरे हो गए।- राजीव रंजन, उप वन अधिकारी