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Chitrakoot News: आचार्य रामचंद्र दास पर लगे आरोप निराधार
Fri, 05 Jan 2024 11:30 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Fri, 05 Jan 2024 11:30 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास पर लगे आरोप कोर्ट में निराधार पाए गए हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने उन पर दर्ज मुकदमे को रद्द कर दिया है।
गौरतलब है कि मिर्जापुर जिले के लालगंज थाने में आचार्य रामचंद्र दास के खिलाफ फरवरी 2022 में पाक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराई गयी थी। मामले की विवेचना के बाद पुलिस ने इसे समाप्त करने की संस्तुति करते हुए न्यायालय में रिपोर्ट दाखिल की थी। जिसके बाद मिर्जापुर की स्पेशल कोर्ट पाक्सो एक्ट ने इस मामले में आचार्य रामचंद्र दास को तलब करने का आदेश पारित किया था।
इस आदेश के खिलाफ उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने जांच को स्वीकार करते हुए व वादी द्वारा भी प्रकरण त्रुटिवश दर्ज होने के बयान पर विचार करते हुए एफआईआर और दांडिक प्रक्रिया को निरस्त करने का आदेश दिया था। जिसके बाद जिला न्यायालय ने शुक्रवार को मामला समाप्त किए जाने का प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया।
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आचार्य रामचंद्र दास के अधिवक्ता कृष्ण मोहन त्रिपाठी ने कहा कि एक झूठे मामले से देश के सबसे प्रतिष्ठित संत की परंपरा का कीचड़ उछाला गया था। समाज इस प्रकरण को पहले से ही निराधार और विद्वेषपूर्ण मान रहा था। आज न्यायालय के आदेश के बाद यह प्रकरण पूरी तरह से समाप्त हो गया है। एक निर्दोष व्यक्ति को दो वर्ष तक मानसिक पीड़ा से गुजरना पड़ा।
गौरतलब है कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने लगभग पांच वर्ष पूर्व देश भर के प्रमुख संतों की मौजूदगी में चित्रकूट के तुलसीपीठ में हुए पट्टा अभिषेक कार्यक्रम में आचार्य रामचंद्र दास को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। इसके बाद आचार्य रामचंद्र दास द्वारा वर्ष 2022 में विशाल हिंदू महाकुंभ का आयोजन चित्रकूट में कराया था।
न्यायालय के आदेश के बाद आचार्य रामचंद्र दास ने कहा कि गुरु, गोविंद और भारत की न्याय प्रणाली पर उन्हें पूर्ण विश्वास था। इस फैसले के बाद यह विश्वास और पुख्ता हुआ है। उनके मन में किसी के प्रति कोई द्वेष नहीं है। विषम परिस्थितियों में भी विश्वास बनाए रखने वालों का मैं हमेशा आभारी रहूंगा।
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चित्रकूट। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के उत्तराधिकारी आचार्य रामचंद्र दास पर लगे आरोप कोर्ट में निराधार पाए गए हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने उन पर दर्ज मुकदमे को रद्द कर दिया है।
गौरतलब है कि मिर्जापुर जिले के लालगंज थाने में आचार्य रामचंद्र दास के खिलाफ फरवरी 2022 में पाक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराई गयी थी। मामले की विवेचना के बाद पुलिस ने इसे समाप्त करने की संस्तुति करते हुए न्यायालय में रिपोर्ट दाखिल की थी। जिसके बाद मिर्जापुर की स्पेशल कोर्ट पाक्सो एक्ट ने इस मामले में आचार्य रामचंद्र दास को तलब करने का आदेश पारित किया था।
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इस आदेश के खिलाफ उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने जांच को स्वीकार करते हुए व वादी द्वारा भी प्रकरण त्रुटिवश दर्ज होने के बयान पर विचार करते हुए एफआईआर और दांडिक प्रक्रिया को निरस्त करने का आदेश दिया था। जिसके बाद जिला न्यायालय ने शुक्रवार को मामला समाप्त किए जाने का प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया।
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आचार्य रामचंद्र दास के अधिवक्ता कृष्ण मोहन त्रिपाठी ने कहा कि एक झूठे मामले से देश के सबसे प्रतिष्ठित संत की परंपरा का कीचड़ उछाला गया था। समाज इस प्रकरण को पहले से ही निराधार और विद्वेषपूर्ण मान रहा था। आज न्यायालय के आदेश के बाद यह प्रकरण पूरी तरह से समाप्त हो गया है। एक निर्दोष व्यक्ति को दो वर्ष तक मानसिक पीड़ा से गुजरना पड़ा।
गौरतलब है कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने लगभग पांच वर्ष पूर्व देश भर के प्रमुख संतों की मौजूदगी में चित्रकूट के तुलसीपीठ में हुए पट्टा अभिषेक कार्यक्रम में आचार्य रामचंद्र दास को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। इसके बाद आचार्य रामचंद्र दास द्वारा वर्ष 2022 में विशाल हिंदू महाकुंभ का आयोजन चित्रकूट में कराया था।
न्यायालय के आदेश के बाद आचार्य रामचंद्र दास ने कहा कि गुरु, गोविंद और भारत की न्याय प्रणाली पर उन्हें पूर्ण विश्वास था। इस फैसले के बाद यह विश्वास और पुख्ता हुआ है। उनके मन में किसी के प्रति कोई द्वेष नहीं है। विषम परिस्थितियों में भी विश्वास बनाए रखने वालों का मैं हमेशा आभारी रहूंगा।