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कभी था डाकुओं का डर अब पढ़ते 85 बच्चे
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चित्रकूट। जिले के मध्य प्रदेश की सीमा से लगे दस्यु प्रभावित बम्हिया गांव में कभी डाकुओं के डर से शिक्षक यहां पढ़ाने से कतराते थे। लेकिन अब यहां की तस्वीर बदल चुकी है। इस क्षेत्र के स्कूल में अब 85 बच्चे पढ़ते हैं। इस श्रेय जाता है 2019 में राज्य अध्यापक पुरस्कार जीत चुके रवि कुमार को। जिन्होंने क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाई है।
प्राइमरी स्कूल बम्हिया दुस्य प्रभावित क्षेत्र में स्थित है। यहां पर बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कराई जाती है। एक समय डाकुआें के कारण अक्सर स्कूल बंद रहता था। कोई शिक्षक पढ़ाने को तैयार नहीं रहता था। 24 दिसंबर 2016 को रवि कुमार सिंह ने प्रधान अध्यापक पद पर कार्य भार संभाला।
उन्होंने प्रयास कर स्कूल में सुविधाएं बढ़ाई। यहां के लोगों को उनके बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया। आने-जाने के लिए स्कूल वैन की सुविधा बच्चों की दिलाई। उनके प्रयास से स्कूल में 85 बच्चे पढ़ाई करते हैं। स्कूल में अंग्रेजी मीडियम की पढ़ाई के साथ ही सांस्कृतिक और बच्चों के विकास के अलग-अलग कार्यक्रम जैसे आर्ट एंड क्राफ्ट वर्क, बाल फिल्म दिखाना आदि का आयोजन किया जाता रहा है।
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रवि कुमार सिंह के इसी कार्य से प्रभावित होकर सरकार ने उन्हें 2019 में राज्य अध्यापक पुरस्कार दिया गया था। उन्होंने बताया कि वह मूलरूप से प्रतापगढ़ के राजगढ़ के रहने वाले है। इस समय मानिक पुर कस्बे में रहते है। 2009 मेें बेसिक शिक्षा परिषद से उत्कृष्ट शिक्षक का पुरस्कार भी मिल चुका है।
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प्राइमरी स्कूल बम्हिया दुस्य प्रभावित क्षेत्र में स्थित है। यहां पर बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कराई जाती है। एक समय डाकुआें के कारण अक्सर स्कूल बंद रहता था। कोई शिक्षक पढ़ाने को तैयार नहीं रहता था। 24 दिसंबर 2016 को रवि कुमार सिंह ने प्रधान अध्यापक पद पर कार्य भार संभाला।
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उन्होंने प्रयास कर स्कूल में सुविधाएं बढ़ाई। यहां के लोगों को उनके बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया। आने-जाने के लिए स्कूल वैन की सुविधा बच्चों की दिलाई। उनके प्रयास से स्कूल में 85 बच्चे पढ़ाई करते हैं। स्कूल में अंग्रेजी मीडियम की पढ़ाई के साथ ही सांस्कृतिक और बच्चों के विकास के अलग-अलग कार्यक्रम जैसे आर्ट एंड क्राफ्ट वर्क, बाल फिल्म दिखाना आदि का आयोजन किया जाता रहा है।
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रवि कुमार सिंह के इसी कार्य से प्रभावित होकर सरकार ने उन्हें 2019 में राज्य अध्यापक पुरस्कार दिया गया था। उन्होंने बताया कि वह मूलरूप से प्रतापगढ़ के राजगढ़ के रहने वाले है। इस समय मानिक पुर कस्बे में रहते है। 2009 मेें बेसिक शिक्षा परिषद से उत्कृष्ट शिक्षक का पुरस्कार भी मिल चुका है।