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त्वरित न्याय: दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की सजा
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चित्रकूट। किशोरी ले जाने और दुराचार के मामले में दोष सिद्ध होने पर विशेष न्यायाधीश विनीत नारायण पांडेय ने दोषी को 20 वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 52,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। घटना लगभग 11 माह पूर्व की है।
शुक्रवार को विशेष लोक विशेष लोक अभियोजक तेज प्रताप सिंह ने बताया कि 20 सितंबर 2022 में राजापुर थाने में एक व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वादी के अनुसार उसकी 14 वर्षीय भतीजी को बांदा जिले के अतर्रा थाने के रसपाल का पुरवा निवासी ध्यान सिंह बहला फुसला कर ले गया था। आरोपी उनके गांव अपने रिश्तेदारों के यहां आता जाता था। इस दौरान आरोपी ने उसकी भतीजी से जान पहचान बना ली थी, हालांकि इस बात की जानकारी आरोपी के रिश्तेदारों को भी नहीं थी।
पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज करने के बाद आरोपी को 30 सितंबर को गिरफ्तार किया था। साथ ही पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण कर बयान दर्ज कराए थे। इसके बाद इस मामले में दुष्कर्म की धारा बढ़ाते हुए न्यायालय में आरोप पत्र 22 दिसंबर 2022 को दाखिल किया गया था।
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बचाव और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश विनीत नारायण पांडेय ने इस मामले में निर्णय सुनाया। दोष सिद्ध होने पर ध्यान सिंह को सजा सुनाई गई। अर्थदंड की धनराशि से 50 फीसदी पीड़िता को देने का आदेश भी दिया गया है।
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शुक्रवार को विशेष लोक विशेष लोक अभियोजक तेज प्रताप सिंह ने बताया कि 20 सितंबर 2022 में राजापुर थाने में एक व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वादी के अनुसार उसकी 14 वर्षीय भतीजी को बांदा जिले के अतर्रा थाने के रसपाल का पुरवा निवासी ध्यान सिंह बहला फुसला कर ले गया था। आरोपी उनके गांव अपने रिश्तेदारों के यहां आता जाता था। इस दौरान आरोपी ने उसकी भतीजी से जान पहचान बना ली थी, हालांकि इस बात की जानकारी आरोपी के रिश्तेदारों को भी नहीं थी।
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पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज करने के बाद आरोपी को 30 सितंबर को गिरफ्तार किया था। साथ ही पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण कर बयान दर्ज कराए थे। इसके बाद इस मामले में दुष्कर्म की धारा बढ़ाते हुए न्यायालय में आरोप पत्र 22 दिसंबर 2022 को दाखिल किया गया था।
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बचाव और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश विनीत नारायण पांडेय ने इस मामले में निर्णय सुनाया। दोष सिद्ध होने पर ध्यान सिंह को सजा सुनाई गई। अर्थदंड की धनराशि से 50 फीसदी पीड़िता को देने का आदेश भी दिया गया है।