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Chitrakoot News: सत्र न्यायालय ने की सजा रद्द, वापस भेजा मामला
Sun, 05 Jul 2026 12:19 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Sun, 05 Jul 2026 12:19 AM IST
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चित्रकूट। सत्र न्यायालय शेषमणि ने सड़क दुर्घटना मामले में ग्राम न्यायालय की ओर से श्यामदीन को दी गई सजा को रद्द कर दी। साथ ही दोबारा सुनवाई के लिए मामले को ग्राम न्यायालय मानिकपुर वापस भेज दिया है। दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत और दूसरे के घायल होने का आरोप में श्यामदीन को दोषी ठहराया गया था। 29 अक्तूबर 2015 को बहिलपुरवा थाना क्षेत्र के रूकमा बुजुर्ग मजरा नयापुरवा निवासी रामनरेश के छोटे भाई योगेश और उनकी पत्नी बेला को एक बोलेरो वाहन ने टक्कर मार दी थी। यह घटना गिरधर बाबा नर्सरी के पास हुई थी, जब वे पंचायत चुनाव में मतदान कर लौट रहे थे। दुर्घटना में घायल योगेश की इलाज के दौरान 1 नवंबर 2015 को मृत्यु हो गई थी। बेला को गंभीर चोटें आईं और उनका पैर टूट गया था। इस घटना में कैलहा निवासी श्यामदीन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। विवेचक ने मामले की विवेचना कर ग्राम न्यायालय मानिकपुर में आरोप पत्र दाखिल किया था। सुनवाई में ग्राम न्यायालय मानिकपुर ने 11 फरवरी 2025 को आरोपी श्यामदीन को दोषी ठहराया था। उसे एक वर्ष तक के साधारण कारावास दिया और 7500 रुपये के अर्थदंड जुर्माना लगाया था। आरोपी श्यामदीन ने इस फैसले के खिलाफ सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। सुनवाई में आरोपी के अधिवक्ता ने निचली अदालत का फैसला कानून और तथ्यों के विपरीत बताया। दोनों पक्षों के बयान व पत्रावलियों का अवलोकन किया। सत्र न्यायालय ने पाया कि हेड मोहर्रिर और विवेचक की गवाही नहीं ली गई थी। पुलिस के महत्वपूर्ण दस्तावेज जैसे प्रथम सूचना रिपोर्ट और जनरल डायरी साबित नहीं किए गए थे। अदालत ने इसे कानूनी त्रुटि मानते हुए ग्राम न्यायालय का निर्णय रद्द कर दिया।
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अवैध शराब के मामले में दोषी पर 7500 रुपये का अर्थदंड
चित्रकूट। मानिकपुर थाना क्षेत्र में अवैध शराब रखने के दोषी पूरन यादव को न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिनव कुमार दुबे ने 7500 रुपये का अर्थदंड सुनाया है। पुलिस के अनुसार वर्ष 2021 में बगदरी गौशाला के पास पूरन यादव को 10 लीटर अवैध देसी महुए की शराब के साथ पकड़ा गया था। इस मामले में मानिकपुर में उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। सुनवाई में पूरन ने न्यायालय में अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। इस पर न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिनव कुमार दुबे ने जुर्म स्वीकारोक्ति के आधार पर यह फैसला सुनाया। अर्थदंड जमा न करने पर उसे एक माह का साधारण कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने उसे न्यायालय उठने तक की सजा भी दी। (संवाद)
मारपीट के मामले में दो को जमानत
चित्रकूट। सिविल जज (सी.डि.)/एफ.टी.सी. अश्विनी कुमार उपाध्याय की अदालत ने मारपीट के मामले में आरोपी मालती और गंगापारी उर्फ रामराज को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। प्रत्येक अभियुक्त को 20,000 रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान धनराशि की एक जमानत दाखिल करनी होगी। इन पर सरधुवा थाने में वर्ष 2026 में भादवि विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोपियों के अधिवक्ता ने उन्हें झूठा फंसाने और आपराधिक इतिहास न होने का तर्क दिया। अभियोजन अधिकारी ने मामले की दैनिकी तलब करने का अनुरोध किया था। न्यायालय ने पत्रावली का अवलोकन और दलीलें सुनने के बाद यह आदेश दिया। (संवाद)
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अवैध शराब के मामले में दोषी पर 7500 रुपये का अर्थदंड
चित्रकूट। मानिकपुर थाना क्षेत्र में अवैध शराब रखने के दोषी पूरन यादव को न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिनव कुमार दुबे ने 7500 रुपये का अर्थदंड सुनाया है। पुलिस के अनुसार वर्ष 2021 में बगदरी गौशाला के पास पूरन यादव को 10 लीटर अवैध देसी महुए की शराब के साथ पकड़ा गया था। इस मामले में मानिकपुर में उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। सुनवाई में पूरन ने न्यायालय में अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। इस पर न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिनव कुमार दुबे ने जुर्म स्वीकारोक्ति के आधार पर यह फैसला सुनाया। अर्थदंड जमा न करने पर उसे एक माह का साधारण कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने उसे न्यायालय उठने तक की सजा भी दी। (संवाद)
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मारपीट के मामले में दो को जमानत
चित्रकूट। सिविल जज (सी.डि.)/एफ.टी.सी. अश्विनी कुमार उपाध्याय की अदालत ने मारपीट के मामले में आरोपी मालती और गंगापारी उर्फ रामराज को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। प्रत्येक अभियुक्त को 20,000 रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान धनराशि की एक जमानत दाखिल करनी होगी। इन पर सरधुवा थाने में वर्ष 2026 में भादवि विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोपियों के अधिवक्ता ने उन्हें झूठा फंसाने और आपराधिक इतिहास न होने का तर्क दिया। अभियोजन अधिकारी ने मामले की दैनिकी तलब करने का अनुरोध किया था। न्यायालय ने पत्रावली का अवलोकन और दलीलें सुनने के बाद यह आदेश दिया। (संवाद)
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