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समाजसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों, अधिकारियों के बयान दर्ज किए
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मानवाधिकार आयोग की टीम के सामने बयान दर्ज कराने पहुंचे जिले के कई स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिध?
- फोटो : CHITRAKUTT
चित्रकूट। भरतकूप की पत्थर खदानों में मजदूरी के बदले किशोरियों के यौन शोषण मामले में मानवाधिकार आयोग की टीम ने समाजसेवी संस्थाओं, अधिकारियों और मीडियाकर्मियों से पूछताछ कर बयान दर्ज किए। सुबह 11 से शाम चार बजे तक टीम के तीनों सदस्यों ने पड़ताल की। समाजसेवी संस्था के एक प्रतिनिधि ने अपने साथ गलत बर्ताव का आरोप लगाया है। इनका कहना है कि उन्हें बिना कारण बताए घर से ले आया गया। भोजन भी नहीं दिया गया।
जांच के लिए चार दिवसीय दौरे पर आई मानवाधिकार आयोग की टीम के तीनों सदस्यों ने दूसरे दिन बुधवार को शहर के डाक बंगले में इस मामले से जुडे़ लोगों के साथ ही अन्य से भी पूछताछ की। इनके बयान दर्ज किए गए। अतर्रा के समाजसेवी राजा भइया, सहयोगी शिवकुमार, दलित अधिकार मंच मानिकपुर के मातादयाल, वेदप्रकाश आदि से अलग-अलग समय पर पांच घंटे तक जानकारी ली गई। डाक बंगले से बाहर आने पर राजा भइया ने बताया कि भरतकूप की पत्थर खदानों के सिलसिले में उनसे पूछताछ की गई। मानवाधिकार आयोग की टीम के सामने उन्होंने बताया कि 11 जुलाई को चित्रकूट जिले की पुलिस टीम उन्हें बिना कारण बताए घर से ले लाई। उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। भोजन भी नहीं दिया गया। मोबाइल व पर्स ले लिया। इन्हें बाद में लौटाया। टीम के सवाल पर उन्होंने बताया कि किसी मजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत नहीं किया गया। टीम के इसम सिंह, लालबहादुर व भावना ने कई अन्य समाजसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के अलावा, मीडियाकर्मियों और खनन से लेकर बाल श्रम से जुडे़ मामलों के विभागीय अधिकारियों से भी जानकारी ली।
देर शाम गोंडा पहुंची आयोग की टीम
भरतकूप। डाक बंगले में पूछताछ के बाद मानवाधिकार आयोग की टीम भरतकूप के गोंडा गांव पहुंची। इस गांव की महिलाओं व किशोरियों से ढाई घंटे तक पूछताछ की गई। इनके बयान भी दर्ज किए। स्थानीय लोगों के अनुसार टीम ने ज्यादातर पत्थर की खदानों में काम करने वालों से संबंधित जानकारी ली। इनकी उम्र और परिवार की आर्थिक स्थिति के बारे में जानने का प्रयास किया।
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खदानों और क्रशर से पोकलैंड, जेसीबी व डंपर हटा दिए
चित्रकूट। आयोग की टीम को लेकर भरतकूप इलाके की अवैध पत्थर खदानों और चोरी से क्रशर मिल चलाने वालों में दहशत दिखी। कई कथित समाजसेवी और क्रशर मालिक टीम सदस्यों से मिलने के लिए आतुर दिखे। पुलिस सुरक्षा के चलते यह टीम तक नहीं पहुंच पाए। टीम आने की सूचना पर पहाड़ों, खदानों और क्रशर से पोकलैंड, जेसीबी व डंपर हटा दिए गए हैं। कुछ को छोड़कर सभी क्रशर बंद रहे। कुछ दिन पहले जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर क्रशर बंद होने से राजस्व के नुकसान का दावा करने वाले कथित समाजसेवी और क्रशर मालिक टीम के सामने आने से कतराते रहे।
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जांच के लिए चार दिवसीय दौरे पर आई मानवाधिकार आयोग की टीम के तीनों सदस्यों ने दूसरे दिन बुधवार को शहर के डाक बंगले में इस मामले से जुडे़ लोगों के साथ ही अन्य से भी पूछताछ की। इनके बयान दर्ज किए गए। अतर्रा के समाजसेवी राजा भइया, सहयोगी शिवकुमार, दलित अधिकार मंच मानिकपुर के मातादयाल, वेदप्रकाश आदि से अलग-अलग समय पर पांच घंटे तक जानकारी ली गई। डाक बंगले से बाहर आने पर राजा भइया ने बताया कि भरतकूप की पत्थर खदानों के सिलसिले में उनसे पूछताछ की गई। मानवाधिकार आयोग की टीम के सामने उन्होंने बताया कि 11 जुलाई को चित्रकूट जिले की पुलिस टीम उन्हें बिना कारण बताए घर से ले लाई। उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। भोजन भी नहीं दिया गया। मोबाइल व पर्स ले लिया। इन्हें बाद में लौटाया। टीम के सवाल पर उन्होंने बताया कि किसी मजिस्ट्रेट के सामने प्रस्तुत नहीं किया गया। टीम के इसम सिंह, लालबहादुर व भावना ने कई अन्य समाजसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों के अलावा, मीडियाकर्मियों और खनन से लेकर बाल श्रम से जुडे़ मामलों के विभागीय अधिकारियों से भी जानकारी ली।
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देर शाम गोंडा पहुंची आयोग की टीम
भरतकूप। डाक बंगले में पूछताछ के बाद मानवाधिकार आयोग की टीम भरतकूप के गोंडा गांव पहुंची। इस गांव की महिलाओं व किशोरियों से ढाई घंटे तक पूछताछ की गई। इनके बयान भी दर्ज किए। स्थानीय लोगों के अनुसार टीम ने ज्यादातर पत्थर की खदानों में काम करने वालों से संबंधित जानकारी ली। इनकी उम्र और परिवार की आर्थिक स्थिति के बारे में जानने का प्रयास किया।
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खदानों और क्रशर से पोकलैंड, जेसीबी व डंपर हटा दिए
चित्रकूट। आयोग की टीम को लेकर भरतकूप इलाके की अवैध पत्थर खदानों और चोरी से क्रशर मिल चलाने वालों में दहशत दिखी। कई कथित समाजसेवी और क्रशर मालिक टीम सदस्यों से मिलने के लिए आतुर दिखे। पुलिस सुरक्षा के चलते यह टीम तक नहीं पहुंच पाए। टीम आने की सूचना पर पहाड़ों, खदानों और क्रशर से पोकलैंड, जेसीबी व डंपर हटा दिए गए हैं। कुछ को छोड़कर सभी क्रशर बंद रहे। कुछ दिन पहले जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर क्रशर बंद होने से राजस्व के नुकसान का दावा करने वाले कथित समाजसेवी और क्रशर मालिक टीम के सामने आने से कतराते रहे।