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आरएसएस की राष्ट्रीय चिंतन बैठक: आदिवासी गांवों में प्रवास करें आरएसएस कार्यकर्ता, उनकी समस्याओं के निस्तारण पर जोर

Wed, 14 Jul 2021 03:12 PM IST
शिखा पांडेय अनूप दुबे, अमर उजाला, चित्रकूट
अनूप दुबे, अमर उजाला, चित्रकूट Published by: शिखा पांडेय Updated Wed, 14 Jul 2021 03:12 PM IST
सार

वनवासी कल्याण आश्रम के माध्यम से आदिवासियों के बच्चों को शिक्षा और युवाओं को रोजगार देने पर चर्चा की गई। बैठक में कहा गया कि आदिवासी समाज ही कुटीर उद्योग को जीवित रखे है।

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RSS national contemplation meeting: Main parts of tribal society, emphasis on solving their problems
 आरएसएस की राष्ट्रीय चिंतन बैठक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश में बड़ी संख्या में आबाद आदिवासियों पर भी संघ मेहरबान है। आरएसएस की राष्ट्रीय चिंतन बैठक के आखिरी दिन आदिवासियों की समस्याओं का निराकरण और उनके इलाकों के विकास की वकालत की गई।
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उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने पर जोर दिया गया। मंगलवार को अंतिम दिन चिंतन बैठक में उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, असम आदि में रहने वाले आदिवासियों के बीच आरएसएस कार्यकर्ताओं को जाने और प्रवास करके उनकी समस्याएं जानने को कहा गया।
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बैठक में कहा गया कि आदिवासी हमारे समाज का मुख्य अंग हैं। इन्होंने भारतीय संस्कृति को बचाने में अहम भूमिका निभाई है। वनवासी कल्याण आश्रम के माध्यम से आदिवासियों के बच्चों को शिक्षा और युवाओं को रोजगार देने पर चर्चा की गई।
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बैठक में कहा गया कि आदिवासी समाज ही कुटीर उद्योग को जीवित रखे है। जंगल के उत्पादों से वस्तुएं बनाते हैं। संघ कार्यकर्ताओं से कहा गया कि आदिवासी इलाकों में अधिक से अधिक समन्वय बनाएं। वहां संघ की शाखाएं लगाएं और कार्यक्रम आयोजित कराएं।

अयोध्या ट्रस्ट में संतों को शामिल किया जाए
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में संतों को शामिल करने की मांग की है। बताया कि यहां आरोग्यधाम में चल रही संघ की चिंतन बैठक के दौरान उन्होंने संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत से मिलकर यह अनुरोध किया है।

साथ ही धर्मांतरण और ट्रस्ट को लेकर काफी चर्चा की है। यह भी अनुरोध किया कि ट्रस्ट में अखाड़ा परिषद के दो जगद्गुरु और तीनों अनी अखाड़ों के महंतों को पदेन सदस्य बनाया जाए। गिरि ने बताया कि संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने उनकी इस मांग पर कहा कि ट्रस्ट में संघ का कोई हस्तक्षेप नहीं है। अलबत्ता अखाड़ा परिषद की मांग वह सरकार तक जरूर पहुंचा देंगे। गिरि ने यह जानकारियां सोमवार को देर रात यहां से प्रयागराज रवाना होने से पूर्व दीं।

जनसंख्या नियंत्रण के लिए धर्मगुरु आगे आएं
नई जनसंख्या नीति और देश में तेजी से बढ़ रही जनसंख्या को लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद मुस्लिम सहित अन्य सभी धर्मगुरुओं से वार्ता करके आम राय बनाने का प्रयास करेगा। परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने यह बात कही। कहा कि बढ़ती जनसंख्या देश के विकास में बाधा है।

इसे नियंत्रित होना चाहिए। धर्मगुरुओं से मिलकर वह खुद पहल करेंगे। हर धर्मगुरु अपने समुदाय के लोगों को यह बात समझाएंगे तो उसे हर कोई मानेगा। समाज में प्रेम और सौहार्द का वातावरण होगा। गिरि ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए सख्त कानून की भी जरूरत बताई।
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