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Chitrakoot News: रेलवे मैदान में 86 साल पहले शुरू हुई थी रामलीला

Fri, 09 Oct 2026 11:24 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट Updated Fri, 09 Oct 2026 11:24 PM IST
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Ramlila began at the Railway Ground 86 years ago.
चित्रकूट। नई बाजार स्थित रेलवे मैदान में 86 साल पहले रामलीला का मंचन शुरू हुआ था। कर्वी का रेलवे स्टेशन मैदान इन दिनों फिर से अयोध्या बना हुआ है। शाम ढलते ही यहां सुंदर लीला होती है। इसमें अयोध्या और काशी समेत कई शहरों से कलाकार आए हैं।
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इस बार इस ऐतिहासिक रामलीला का शुभारंभ छह अक्तूबर को हुआ जोकि 21 अक्तूबर तक चलेगी। इसकी नींव व्यापारी भैरों प्रसाद गोयल ने रखी थी, जो अब नहीं हैं। अंग्रेजी शासनकाल में उन्होंने कई मुश्किलों के बावजूद रामलीला शुरू कराई। वक्त बदला, पीढ़ियां बदलीं, लेकिन परंपरा नहीं टूटी। आज उनके वंशज और शहर के लोग इस विरासत को संभाले हुए हैं।
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इस रामलीला की सबसे बड़ी खासियत इसका मंचन है। यहां केवल चित्रकूट ही नहीं, बल्कि अयोध्या, बनारस, प्रयागराज, बांदा समेत कई शहरों के नामी कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। जब मंच पर राम वनवास का मार्मिक प्रसंग आता है तो दर्शकों की आंखें नम हो जाती हैं। सीता हरण पर आक्रोश और हनुमान के लंका दहन व राम-रावण युद्ध पर पूरा मैदान जयकारों से गूंज उठता है। कलाकारों की पारंपरिक वेशभूषा, दमदार संवाद और भव्य मंच सज्जा दर्शकों को त्रेता युग में पहुंचा देती है।
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रामलीला की कमान पिछले 36 वर्षों से राजीव अग्रवाल संभाल रहे हैं। उनका कहना है कि यह सिर्फ आयोजन नहीं बल्कि पूर्वजों से मिली जिम्मेदारी है। समय के साथ मंच, लाइट-साउंड में बदलाव आया है, लेकिन रामलीला की मूल भावना वही है।

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86 साल पुराने वस्त्र आज भी धरोहर
चित्रकूट। नई बाजार रेलवे मैदान की ऐतिहासिक रामलीला की सबसे अनमोल धरोहर राम, लक्ष्मण और सीता के 86 साल पुराने वस्त्र हैं। अंग्रेजी शासनकाल में इस्तेमाल होने वाले इन वस्त्रों को आज भी संभाल कर रखा गया है। प्रबंधक ने बताया कि परंपरा के अनुसार हर साल मंचन में इनका उपयोग होता है। नौ दशक पुराने ये वस्त्र रामलीला की लंबी सांस्कृतिक यात्रा और आस्था के साक्षी हैं। इस रामलीला की अनमोल धरोहर राम, लक्ष्मण और सीता के 86 साल पुराने वस्त्र भी हैं, जिनका उपयोग आज भी मंचन में किया जाता है।
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