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परोपकार और भजन में लगाएं मन
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चित्रकूट। भागवताचार्य नवलेश दीक्षित महाराज ने बताया कि जीवन में कोई ऐसा यज्ञ नहीं करना चाहिए, जिसमें जीव हिंसा हो। जीव हिंसा सर्वथा वर्जित है। वैदिक यज्ञ सनातन धर्म में मान्य है। निंदा यज्ञ से भी बचें, क्योंकि यह यज्ञ 24 घंटे होता रहता है।
खोही स्थित जग निवास में चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन आचार्य नवलेश महाराज ने कहा कि जीवन के अंतिम क्षण तक मन पर विश्वास नहीं करना चाहिए। संत तुलसीदास जी मन को हमेशा डांटते रहते हैं। साधक को सिद्धियों को स्वीकार नहीं करना चाहिए। भजन गाते हुए कहा तूने राम नाम नहीं लीनो भरी जवानी में, तू डूब के मर जा चुल्लू भर पानी में।
जैसे विवेकानंद, चैतन्य महाप्रभु, तुलसीदास, रहीम, कबीर, शंकराचार्य आदि महापुरुषों को युवावस्था में ज्ञान हुआ। वैसे ही समय और समझ जल्दी आना चाहिए। बताया कि जीवन खत्म हुआ तो जीने का ढंग आया, समा बुझ गई तो महफिल में रंग आया, गाड़ी निकल गई तो घर से चला मुसाफिर, मायूस हाथ मलता वापस बैरंग आया।
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मन की मशीनरी ने जब चलना ठीक सीखा, जब बूढ़े शरीर के तन पुर्जे में जंग आया। कथा के समापन पर सागर से आए यजमान डॉ. कृष्ण कुमार त्रिपाठी ने परिवार के साथ आरती की। नगर के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। मंगलवार को कृष्ण जन्म महोत्सव का भव्य कार्यक्रमे होगा।
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खोही स्थित जग निवास में चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन आचार्य नवलेश महाराज ने कहा कि जीवन के अंतिम क्षण तक मन पर विश्वास नहीं करना चाहिए। संत तुलसीदास जी मन को हमेशा डांटते रहते हैं। साधक को सिद्धियों को स्वीकार नहीं करना चाहिए। भजन गाते हुए कहा तूने राम नाम नहीं लीनो भरी जवानी में, तू डूब के मर जा चुल्लू भर पानी में।
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जैसे विवेकानंद, चैतन्य महाप्रभु, तुलसीदास, रहीम, कबीर, शंकराचार्य आदि महापुरुषों को युवावस्था में ज्ञान हुआ। वैसे ही समय और समझ जल्दी आना चाहिए। बताया कि जीवन खत्म हुआ तो जीने का ढंग आया, समा बुझ गई तो महफिल में रंग आया, गाड़ी निकल गई तो घर से चला मुसाफिर, मायूस हाथ मलता वापस बैरंग आया।
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मन की मशीनरी ने जब चलना ठीक सीखा, जब बूढ़े शरीर के तन पुर्जे में जंग आया। कथा के समापन पर सागर से आए यजमान डॉ. कृष्ण कुमार त्रिपाठी ने परिवार के साथ आरती की। नगर के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। मंगलवार को कृष्ण जन्म महोत्सव का भव्य कार्यक्रमे होगा।