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भारतीय प्रतियोगियों पर गर्व पर उनकी प्रतिभा जिले में ही कुंद-
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Proud of Indian contestants but their talent blunt in the district itself
- फोटो : CHITRAKOOT
चित्रकूट। ओलंपिक में भारत के लिए तीनों पदक महिला प्रतिभागियों के जीतने का गर्व स्थानीय ग्रामीण प्रतिभाओं को गर्व है। लेकिन खुद उचित अवसर व संसाधन न मिल पाने से निराश हैं। एथलेटिक्स में जिले का नाम यूपी में रोशन करने वाली इन प्रतिभाओं को निखारने का काम भी नहीं हो रहा है। बुधवार को जब इन प्रतिभाओं से बातचीत हुई तो ओलंपिक में भारत की महिला प्रतिभागियों के प्रदर्शन पर खुद को भी गौरांवित महसूस करती रहीं।
चित्रकूट जिले के ग्रामीण क्षेत्र की महिला प्रतिभागियों में फूलमती, केतकी, पूजा, रोशनी व रोली के नाम ऐसे हैं जो यूपी स्तर तक अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं लेकिन अब वह इन्हीं क्षेत्र में ही पढ़ाई कर अपना कैरियर बनाने के प्रयास में हैं। खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से उन्हें अच्छा मंच नहीं मिल पा रहा है। 100 मीटर,200 व 400 मीटर की पैदल दौड़ में अरछा बरेठी गांव की फूलमती को स्थानीय लोग गांव की पीटी ऊषा भी कहते हैं। कई बार जिला व जोन चैंपियन बनने के बाद प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में भी शामिल हुई लेकिन अब पहाड़ी के एक स्कूल में कक्षा 12 की पढ़ाई कर रहीं हैं। उसके पिता 50 बकरियों व चार बीघे की जमीन से कृषि उपज कर परिवार को पाल रहे हैं।
जूडो की जिला चैंपियन केतकी देवी भी जोन स्तरीय प्रतियोगिता में जिले का प्रतिनिधित्व कर चुकी है लेकिन अब उसे उम्मीद नहीं है कि आगे कोई संरक्षक मिलेगा जिससे वह जिले का नाम देश भर में रोशन कर सके। इसके पिता के पास महज तीन बीघे खेती योग्य भूमि है लेकिन परिवार चलाने को वह मुंबई में मजदूरी करते हैं। 100 मीटर दौड़ व गोला फेंक में प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में जिले का नाम रोशन करने वाली रोशनी को भी लगता है कि अब उसकी प्रतिभा गांव में ही दबकर रह जाएगी। किसान की बेटी अब बीए की पढ़ाई कर रही है।
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कबड्डी प्रतियोगिता में प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में जिले से एकमात्र चयनित रोली देवी की भी प्रतिभा जिले में दबकर रह गई। उसके किसान पिता ने बताया कि कोई कैरियर न बनने की संभावना पर अब रोली बीटीसी कर शिक्षण क्षेत्र में जाने की तैयारी कर रही है। गोलाफेंक में अरछा की पूजा देवी ने जिले से लेकर जोन स्तरीय प्रतियोगिता में अव्वल रही लेकिन अब उसे भी मलाल है कि वह अपनी प्रतिभा को आगे बिना किसी संरक्षक के निखार नहीं पा रही है। इन सभी ने बातचीत में यह जरूर कहा कि इस समय वह ओलंपिक में भारतीय महिला प्रतिभागियों का प्रदर्शन टीवी में देखती हैं। हाल ही में तीन पदक जीतने पर उन्हें भी बेहद खुशी हुई है। जिला क्रीड़ा अधिकारी विजय कुमार व उप जिला क्रीड़ा अधिकारी सुधीर श्रीवास्तव ने बताया कि दो साल से कोरोना के चलते राज्य व जोन स्तरीय प्रतियोगिताएं सही तरीके से नहीं हो पा रही हैं। जिले की प्रतिभाओं को मौका देने के लिए शासन से संचालित प्रतियोगिताओं में सहभागिता के लिए प्रसार किया जाता है।
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चित्रकूट जिले के ग्रामीण क्षेत्र की महिला प्रतिभागियों में फूलमती, केतकी, पूजा, रोशनी व रोली के नाम ऐसे हैं जो यूपी स्तर तक अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं लेकिन अब वह इन्हीं क्षेत्र में ही पढ़ाई कर अपना कैरियर बनाने के प्रयास में हैं। खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से उन्हें अच्छा मंच नहीं मिल पा रहा है। 100 मीटर,200 व 400 मीटर की पैदल दौड़ में अरछा बरेठी गांव की फूलमती को स्थानीय लोग गांव की पीटी ऊषा भी कहते हैं। कई बार जिला व जोन चैंपियन बनने के बाद प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में भी शामिल हुई लेकिन अब पहाड़ी के एक स्कूल में कक्षा 12 की पढ़ाई कर रहीं हैं। उसके पिता 50 बकरियों व चार बीघे की जमीन से कृषि उपज कर परिवार को पाल रहे हैं।
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जूडो की जिला चैंपियन केतकी देवी भी जोन स्तरीय प्रतियोगिता में जिले का प्रतिनिधित्व कर चुकी है लेकिन अब उसे उम्मीद नहीं है कि आगे कोई संरक्षक मिलेगा जिससे वह जिले का नाम देश भर में रोशन कर सके। इसके पिता के पास महज तीन बीघे खेती योग्य भूमि है लेकिन परिवार चलाने को वह मुंबई में मजदूरी करते हैं। 100 मीटर दौड़ व गोला फेंक में प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में जिले का नाम रोशन करने वाली रोशनी को भी लगता है कि अब उसकी प्रतिभा गांव में ही दबकर रह जाएगी। किसान की बेटी अब बीए की पढ़ाई कर रही है।
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कबड्डी प्रतियोगिता में प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में जिले से एकमात्र चयनित रोली देवी की भी प्रतिभा जिले में दबकर रह गई। उसके किसान पिता ने बताया कि कोई कैरियर न बनने की संभावना पर अब रोली बीटीसी कर शिक्षण क्षेत्र में जाने की तैयारी कर रही है। गोलाफेंक में अरछा की पूजा देवी ने जिले से लेकर जोन स्तरीय प्रतियोगिता में अव्वल रही लेकिन अब उसे भी मलाल है कि वह अपनी प्रतिभा को आगे बिना किसी संरक्षक के निखार नहीं पा रही है। इन सभी ने बातचीत में यह जरूर कहा कि इस समय वह ओलंपिक में भारतीय महिला प्रतिभागियों का प्रदर्शन टीवी में देखती हैं। हाल ही में तीन पदक जीतने पर उन्हें भी बेहद खुशी हुई है। जिला क्रीड़ा अधिकारी विजय कुमार व उप जिला क्रीड़ा अधिकारी सुधीर श्रीवास्तव ने बताया कि दो साल से कोरोना के चलते राज्य व जोन स्तरीय प्रतियोगिताएं सही तरीके से नहीं हो पा रही हैं। जिले की प्रतिभाओं को मौका देने के लिए शासन से संचालित प्रतियोगिताओं में सहभागिता के लिए प्रसार किया जाता है।