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राजा पर तीन हमलों से भी नहीं चेती पुलिस

Mon, 19 Dec 2016 11:27 PM IST
अमर उजाला चित्रकूट
अमर उजाला चित्रकूट Updated Mon, 19 Dec 2016 11:27 PM IST
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police Nothing moved on the job three attacks
मृतक के परिजनों से जानकारी लेते पु‌लिस अफसर - फोटो : Amar ujala

हर्रा गांव के पास हुई राजा की हत्या के बाद पुलिस कार्रवाई पर भी कई सवाल उठ रहे हैं। डाकू गोप्पा से दुश्मनी होने व तीन बार हमला होने पर राजा ने शस्त्र लाइसेंस मांगा था। कई माह बीतने के बाद भी आवेदन की फाइल आगे नहीं बढ़ी। राजा लगातार अधिकारियों से शस्त्र लाइसेंस की मांग कर रहा था। पुलिस ने अगर शस्त्र लाइसेंस या फिर उसे सुरक्षा मुहैया कराई होती तो शायद राजा की जान बच जाती।

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 ग्रामीणों ने बताया कि डाकू गोप्पा अपने ही गांव के राजा से कई साल से दुश्मनी मानता था और तीन बार पहले भी उस पर जानलेवा हमला कर चुका था। हर बार राजा की जान बच गई। इस बार भी गोली लगने के बाद राजा ने जान बचाने का पूरा प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हुआ। डाकुओं ने घटनास्थल भी सोच समझकर चुना। हर्रा गांव की जिस सड़क पर वारदात हुई, वहां ज्यादातर सन्नाटा रहता है। यही कारण रहा कि डाकुओं ने करीब तीस मिनट तक यहां नंगनाच किया।  
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पहाड़ी के हर्रा गांव का डाकू गोप्पा भी रहने वाला है। सन 2014 में गोप्पा बागी न बनकर छोटे मोटे अपराध करता था। तभी खेत में मवेशी के फसल चर जाने पर राजा यादव का उससे विवाद हुआ था। दोनों पक्ष ने पुलिस को सूचना भी थी लेकिन उस समय पुलिस ने इस घटना को गंभीरता से नहीं लिया। शंातिभंग की धारा में गोप्पा पर कार्रवाई की। जिससे बाद से गोप्पा ने बदला लेने की ठानी और दोनों परिवार के बीच दुश्मनी हो गई। कुछ ग्रामीणों ने दबी जुबान में बताया कि राजा को पुलिस के साथ देखकर गोप्पा ने मुखबिरी का शक किया। मुखबिरी न करने की धमकी भी दी। लेकिन राजा भी हिम्मती था, वह गोप्पा से बेखौफ रहा।
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राजा यादव से दुश्मनी का बदला लेने के लिए डाकू गोप्पा ने चौथी बार उस पर हमला किया। इससे पहले छह मार्च 2015 को गांव के पास राजा पर फायरिंग की थी। लेकिन उसे वह बच गया था। 10 जुलाई 2015 को फिर डाकू गोप्पा ने हर्रा गांव के पास राजा पर हमलाकर फायरिंग की। लेकिन किस्मत ने उसे फिर बचाया। जिससे भड़के डाकू गोप्पा ने पांच अगस्त 2016 को पूरी योजना से गांव में दिनदहाड़े घुसकर राजा पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई थीं। एक गोली राजा के पैर में लगी लेकिन वह भागकर जान बचाने में सफल रहा।

इस घटना के बाद राजा ने शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। लेकिन पुलिस ने उसके आवेदन को गंभीरता नहीं लिया और फाइल आगे नहीं बढ़ाई। राजा ने कई बार डाकुओं से अपनी जान को खतरा होने की दुहाई भी दी लेकिन पुलिस की लापरवाही आखिरकार उसकी जान पर भारी पड़ गई।


ग्रामीणों की माने तो पांच अगस्त की घटना के बाद हर्रा गांव के पास पीएसी कैंप लगाया गया था। जो 15 दिन पहले ही हटाया गया। जिसकारण डाकू फिर बेखौफ हो गए और घटना की अंजाम दे दिया। इस संबध में एसपी डीपी सिंह ने बताया कि राजापुर क्षेत्र में कुछ काम होने के कारण पीएसी हटाई गई थी। जल्द ही डाकू गोप्पा के खिलाफ पुलिस कांबिंग कर उसे दबोचेगी। उधर, राजा के मुखबिर होने पर पुलिस अफसर जुबान बंद किए हैं। एसपी ने कहा कि अभी इसकी जानकारी नहीं है।

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