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आपसी सामंजस्य से योजनाएं होतीं सफल
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फोटो नंबर- 4- अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में संबोधन करते केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते। संवाद
- फोटो : CHITRAKOOT
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चित्रकूट। दीनदयाल शोध संस्थान के तत्वावधान में चित्रकूट में चल रहे तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन पर केंद्र सरकार के इस्पात एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से कराए जा रहे विकास कार्य सामंजस्य होने पर सफल होते हैं। यदि आपसी सामंजस्य का अभाव हो तो योजनाओं के क्रियान्वयन में दिक्कत आती है।
रविवार को उन्होंने केंद्र सरकार की एक जिला एक उत्पाद, महिला सशक्तीकरण, आयुष्मान भारत, स्वयं सहायता समूह, जनधन योजना, मनरेगा, आदि योजनाओं के लाभ बताए। मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग के चेयरमैन डॉ. भरत शरण सिंह ने देश में ज्ञान परंपरा को मजबूती देने की बात कही। सम्मेलन के संयोजक वसंत पंडित ने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों में एकात्म मानव दर्शन का बोध होता है। संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
इस मौके पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक डॉ. आर सी अग्रवाल, दीनदयाल शोध संस्थान के उपाध्यक्ष उत्तम बनर्जी, सांसद आरके सिंह पटेल, निखिल मुंडले सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. बीके जैन, महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भरत मिश्रा, कलेक्टर सतना अनुराग वर्मा, जिलाधिकारी चित्रकूट शुभ्रांत शुक्ला, पुलिस अधीक्षक सतना धर्मवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
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17 समस्याओं पर की गई चर्चा
चित्रकूट। दीनदयाल शोध संस्थान के अभिताब वशिष्ठि ने बताया कि सम्मेलन में 17 समस्याओं पर प्रमुख रूप से चर्चा की गई। गरीबी को समाप्त करना, अच्छा स्वास्थ्य, जीवनस्तर सुधार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता, सस्ती व स्वच्छ ऊर्जा, अच्छा काम, आर्थिक विकास, उद्योग नवाचार, बुनियादी ढांचा, असमानता में कमी, शहरी व सामुदायिक विकास, उपभोग व उत्पादन, जलवायु परिवर्तन, भूमि पर जीवन शांति, न्याय के लिए संसाधन व लक्ष्य की प्राप्ति में सामूहिक साझेदारी को लेकर प्रमुख रूप से चर्चा की गई। (संवाद)
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रविवार को उन्होंने केंद्र सरकार की एक जिला एक उत्पाद, महिला सशक्तीकरण, आयुष्मान भारत, स्वयं सहायता समूह, जनधन योजना, मनरेगा, आदि योजनाओं के लाभ बताए। मध्य प्रदेश निजी विश्वविद्यालय नियामक आयोग के चेयरमैन डॉ. भरत शरण सिंह ने देश में ज्ञान परंपरा को मजबूती देने की बात कही। सम्मेलन के संयोजक वसंत पंडित ने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों में एकात्म मानव दर्शन का बोध होता है। संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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इस मौके पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक डॉ. आर सी अग्रवाल, दीनदयाल शोध संस्थान के उपाध्यक्ष उत्तम बनर्जी, सांसद आरके सिंह पटेल, निखिल मुंडले सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के ट्रस्टी डॉ. बीके जैन, महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. भरत मिश्रा, कलेक्टर सतना अनुराग वर्मा, जिलाधिकारी चित्रकूट शुभ्रांत शुक्ला, पुलिस अधीक्षक सतना धर्मवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
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17 समस्याओं पर की गई चर्चा
चित्रकूट। दीनदयाल शोध संस्थान के अभिताब वशिष्ठि ने बताया कि सम्मेलन में 17 समस्याओं पर प्रमुख रूप से चर्चा की गई। गरीबी को समाप्त करना, अच्छा स्वास्थ्य, जीवनस्तर सुधार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता, सस्ती व स्वच्छ ऊर्जा, अच्छा काम, आर्थिक विकास, उद्योग नवाचार, बुनियादी ढांचा, असमानता में कमी, शहरी व सामुदायिक विकास, उपभोग व उत्पादन, जलवायु परिवर्तन, भूमि पर जीवन शांति, न्याय के लिए संसाधन व लक्ष्य की प्राप्ति में सामूहिक साझेदारी को लेकर प्रमुख रूप से चर्चा की गई। (संवाद)