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पाठा क्षेत्र में गर्मी बढ़ने से पेयजल का संकट गहराता जा रहा
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मानिकपुर (चित्रकूट)। गर्मी बढ़ते ही पाठा क्षेत्र के गांवों में पानी का संकट गहराने लगा है। ग्रामीण मजबूरी में सुदूर क्षेत्र के जल स्रोतों से पानी लाने को मजबूर हैं। कई गांवों में तो हालत यह कि सुबह से ही हैंडपंपों में पानी के लिए महिलाओं की लाइनें लग रही हैं।
पाठा क्षेत्र में पथरीला भाग अधिक होने से गर्मी शुरू होते ही हैंडपंप पानी देना बंद कर देते हैं। इस बार अप्रैल माह में ही अधिक गर्मी पड़ने के कारण समस्या बढ़ गई है। मवेशियों के लिए भी पानी नहीं मिल रहा है। हालत यह हो गई है कि महिलाएं गांव के बाहर बने जलस्रोतों से पानी ला रही हैं।
रामपुर गांव के राजेश सिंह, सुरेश प्रसाद, किहुनिया के भोला द्विवेदी, ऊंचाडी के गंव के मजरा औमनीपुरवा के कोलान बस्ती के राजन, पप्पू ने बताया कि कई साल से यहां पर पानी की समस्या है। आधा दर्जन हैंडपंप लगे हैं लेकिन गर्मी के दिनों में जलस्तर नीचे चले जाने से पानी नहीं दे पा रहे हैं।
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मानिकपुर। गर्मी आने पर पाठा क्षेत्र के कुसमई, ऊंचाडीह, उमरी, खिंचरी, मारकंड़ी, किहुनिया, रामपुर, सपहा, बड़ी मडै़यन,इटवा, कल्याणपुर डोडा माफी, अमचुरनेउरा, आदि गांवों के साथ ही मानिकपुर कस्बे में हर साल पानी की समस्या विकराल हो जाती हैं।
चित्रकूट। प्यास बुझाने के लिए जिले में एशिया की सबसे बड़ी योजना पाठा जलकल योजना के साथ ही जिले में19 ग्रामीण पेयजल योजनाएं संचालित हैं। इनमें पेयजल का मुख्य श्रोत नलकूप है। ग्रामीण क्षेत्र मेें कुल 87 नलकूप हैं। 19 पेयजल योजनाओं में से 14 योजनाएं 40 वर्ष पुरानी है। इससे भी पेयजल संकट बना रहता है।
चित्रकूट। जिले में पेयजल की योजनाओं को संचालित करने के लिए तीन विभाग कार्य कर रहे है। जिसमें जल संस्थान, जल निगम व उसकी 16 वीं शाखा शामिल है।
चित्रकूट। जल संस्थान के अधिशाषी अभियंता आरएस मिश्र व जल निगम के सहायक अभियंता अजय पांडेय ने बताया कि मऊ क्षेत्र के यमुना नदी से ं मऊ, बरगढ़ क्षेत्र के गांवों में पेयजल योजना शुरू की गई है। इससे सैकड़ों गांवों में पानी मिल रहा है। बताया कि हर घर जल योजना के तहत जिले में काम तेजी से किया जा रहा है। जिसके माध्यम से घर -घर पानी पहुंचाया जाएगा।
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पाठा क्षेत्र में पथरीला भाग अधिक होने से गर्मी शुरू होते ही हैंडपंप पानी देना बंद कर देते हैं। इस बार अप्रैल माह में ही अधिक गर्मी पड़ने के कारण समस्या बढ़ गई है। मवेशियों के लिए भी पानी नहीं मिल रहा है। हालत यह हो गई है कि महिलाएं गांव के बाहर बने जलस्रोतों से पानी ला रही हैं।
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रामपुर गांव के राजेश सिंह, सुरेश प्रसाद, किहुनिया के भोला द्विवेदी, ऊंचाडी के गंव के मजरा औमनीपुरवा के कोलान बस्ती के राजन, पप्पू ने बताया कि कई साल से यहां पर पानी की समस्या है। आधा दर्जन हैंडपंप लगे हैं लेकिन गर्मी के दिनों में जलस्तर नीचे चले जाने से पानी नहीं दे पा रहे हैं।
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मानिकपुर। गर्मी आने पर पाठा क्षेत्र के कुसमई, ऊंचाडीह, उमरी, खिंचरी, मारकंड़ी, किहुनिया, रामपुर, सपहा, बड़ी मडै़यन,इटवा, कल्याणपुर डोडा माफी, अमचुरनेउरा, आदि गांवों के साथ ही मानिकपुर कस्बे में हर साल पानी की समस्या विकराल हो जाती हैं।
चित्रकूट। प्यास बुझाने के लिए जिले में एशिया की सबसे बड़ी योजना पाठा जलकल योजना के साथ ही जिले में19 ग्रामीण पेयजल योजनाएं संचालित हैं। इनमें पेयजल का मुख्य श्रोत नलकूप है। ग्रामीण क्षेत्र मेें कुल 87 नलकूप हैं। 19 पेयजल योजनाओं में से 14 योजनाएं 40 वर्ष पुरानी है। इससे भी पेयजल संकट बना रहता है।
चित्रकूट। जिले में पेयजल की योजनाओं को संचालित करने के लिए तीन विभाग कार्य कर रहे है। जिसमें जल संस्थान, जल निगम व उसकी 16 वीं शाखा शामिल है।
चित्रकूट। जल संस्थान के अधिशाषी अभियंता आरएस मिश्र व जल निगम के सहायक अभियंता अजय पांडेय ने बताया कि मऊ क्षेत्र के यमुना नदी से ं मऊ, बरगढ़ क्षेत्र के गांवों में पेयजल योजना शुरू की गई है। इससे सैकड़ों गांवों में पानी मिल रहा है। बताया कि हर घर जल योजना के तहत जिले में काम तेजी से किया जा रहा है। जिसके माध्यम से घर -घर पानी पहुंचाया जाएगा।