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Chitrakoot News: डेढ़ वर्षीय जुड़वां बच्चों की मौत, परिजन बोले-टीबी रोग था

Thu, 14 Aug 2025 12:33 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 14 Aug 2025 12:33 AM IST
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One and half year old twins died, family said they were suffering from TB
03फोटो 1 सीकेटीपी 1्र7- परिचय- जिला अस्पताल में इलाज के लिए बेटी के साथ मौजूद राममूरत व उसकी पत
चित्रकूट। सदर ब्लॉक क्षेत्र के धौरही माफी गांव के मजरा ल्यौझा गांव में राममूरत के डेढ़ वर्षीय जुड़वां बच्चों की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग को सूचना दिए बगैर मासूमों के शवों को दफना दिया गया। परिजनों ने बताया कि बच्चों को टीबी (क्षय रोग) की बीमारी थी। उनका झोलाछाप से इलाज चल रहा था।
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ग्रामीणों की सूचना पर बुधवार को डॉ. एके जतारिया के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची। जांच में पता चला कि मृत बच्चों की बहन डिप्थीरिया रोग से ग्रसित मिली। इस आधार पर जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में दोनों मासूमों की मौत डिप्थीरिया से होने का दावा किया है। टीबी की बीमारी से इन्कार किया है।
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उधर, टीम ने पीडि़त बच्ची को शिवरामपुर स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया लेकिन यहां समुचित इलाज नहीं होने पर डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में बच्ची का इलाज चल रहा है।
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धौरही माफी गांव निवासी राममूरत ढाबे में मजदूरी करता है। राममूरत ने बताया कि उसके डेढ़ वर्षीय बेटे दशरथ व जितेंद्र जुड़वां पैदा हुए थे। उनकी कुछ दिनों से तबीयत खराब थी। बच्चों का झोलाछाप से इलाज चल रहा था। उसने बच्चों को टीबी रोग से ग्रसित बताया था। रविवार को दशरथ की मौत हो गई, जबकि सोमवार को जितेंद्र की सांसें थम गईं।
कोट
सीएचसी से एक टीम जांच के लिए गई थी। जांच में मासूमों की मौत टीबी से होने की पुष्टि नहीं हुई है। गांव गई जांच टीम की प्रथम रिपोर्ट के अनुसार डेढ़ वर्षीय जुड़वां बच्चे डिप्थीरिया से ग्रसित थे। गुरुवार को मुख्यालय से टीम भेजकर फिर से जांच की जाएगी।
- डॉ. भूपेश द्विवेदी, सीएमओ

गंभीर संक्रामक बीमारी है डिप्थीरिया
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. शैलेंद्र सिंह ने बताया कि डिप्थीरिया गंभीर संक्रामक बीमारी है, जो कोरिनेबैक्टीरियम डिप्थीरिया नामक जीवाणु के कारण होती है। यह मुख्य रूप से गले और नाक को प्रभावित करती है लेकिन त्वचा को भी संक्रमित कर सकती है। सांस लेने की प्रक्रिया को प्रभावित करती है। गले व अन्य अंग को इसके संक्रमण से नुकसान होता है। पीड़ित के दम घुटने तक की नौबत आ जाती है। गले में दर्द, कमजोरी थकान, बुखार व गर्दन में सूजन आदि होने पर चिकित्सकों से इलाज कराना चाहिए। यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में हवा के माध्यम से फैलती है, खासकर खांसने या छींकने से भी संक्रमण फैलता है।


डिप्थीरिया की रोकथाम के लिए प्रभावी उपाय टीकाकरण
नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को डिप्थीरिया का टीका लगाया जाता है। वयस्कों को हर 10 साल में बूस्टर खुराक लेनी चाहिए। इसके अतिरिक्त स्वच्छता बनाए रखना, जैसे कि बार-बार हाथ धोना और खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकना, बीमारी को फैलने से रोकने में मदद करता है।
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