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Chitrakoot News: नवरात्र करीब, मूर्ति गढ़ने में जुटे कलाकारों की किस्मत चमकी
Fri, 19 Sep 2025 12:36 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Fri, 19 Sep 2025 12:36 AM IST
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फोटो-17सीकेटीपी- 14- परिचय- मां दुर्गा की प्रतिमा बनाते कलाकार। संवाद
- फोटो : mathura
चित्रकूट। शारदीय नवरात्र के पास आते ही जिले में उत्सव की रौनक बढ़ गई है। मां दुर्गा की भव्य मूर्तियां बनाने का कार्य जोरों पर है। इस बार भी बड़ी संख्या में बंगाल से आए मूर्तिकार विभिन्न स्थानों पर मूर्तियां तैयार कर रहे हैं। जिले के करीब 12 सौ पंडालों में स्थापना की तैयारी चल रही है, जिससे कलाकारों को अच्छी आमदनी होने की उम्मीद है।
दो माह पहले से ही कलाकार शहर और कस्बों में मूर्तियां बनाने में लग गए थे। समितियों के पदाधिकारी मूर्तिकारों के ठिकाने पहुंचकर मूर्तियों का सौदा भी कर रहे हैं। स्टेशन रोड पर कोलकाता निवासी बाबुल पाल और उनकी टीम 5 से 12 फीट तक की मूर्तियां बना रही हैं। अब तक उन्हें 80 से अधिक ऑर्डर मिल चुके हैं। चार फीट की मूर्ति 4 हजार और बड़ी मूर्तियां 12 हजार रुपये तक बिक रही हैं। बाबुल के अनुसार, सौ मूर्तियां बनाने में करीब तीन लाख रुपये खर्च होते हैं और उतनी ही आमदनी भी हो जाती है।
यही स्थिति ग्रामीण क्षेत्र का भी है। सीतापुर, भौंरी, मऊ, मानिकपुर, राजापुर, भरतकूप, पहाड़ी आदि में भी मूर्तिकार काम कर रहे हैं। वहीं नई बाजार समिति के अध्यक्ष चंद्र भूषण अवस्थी ने बताया कि पहले एक हजार की मूर्तियां मिलती थीं, लेकिन अब उनकी कीमत 12 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
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दो माह पहले से ही कलाकार शहर और कस्बों में मूर्तियां बनाने में लग गए थे। समितियों के पदाधिकारी मूर्तिकारों के ठिकाने पहुंचकर मूर्तियों का सौदा भी कर रहे हैं। स्टेशन रोड पर कोलकाता निवासी बाबुल पाल और उनकी टीम 5 से 12 फीट तक की मूर्तियां बना रही हैं। अब तक उन्हें 80 से अधिक ऑर्डर मिल चुके हैं। चार फीट की मूर्ति 4 हजार और बड़ी मूर्तियां 12 हजार रुपये तक बिक रही हैं। बाबुल के अनुसार, सौ मूर्तियां बनाने में करीब तीन लाख रुपये खर्च होते हैं और उतनी ही आमदनी भी हो जाती है।
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यही स्थिति ग्रामीण क्षेत्र का भी है। सीतापुर, भौंरी, मऊ, मानिकपुर, राजापुर, भरतकूप, पहाड़ी आदि में भी मूर्तिकार काम कर रहे हैं। वहीं नई बाजार समिति के अध्यक्ष चंद्र भूषण अवस्थी ने बताया कि पहले एक हजार की मूर्तियां मिलती थीं, लेकिन अब उनकी कीमत 12 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
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