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चित्रकूट: खनन से जंगली क्षेत्र का दायरा हुआ कम

Fri, 11 Dec 2020 11:33 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 11 Dec 2020 11:33 PM IST
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Mining reduced area of forest area
चित्रकूट। सीआईसी के पूर्व प्रवक्ता मान योगेंद्र दत्त द्विवेदी ने पर्यावरण दिवस के अवसर पर बताया कि लोढ़वारा क्षेत्र पर्यावरण संतुलन के लिए अनुकूल था। वहां पर बड़ी संख्या में जड़ी-बूटियों के पेड़ लगे हुए थे। जो यहां के निवासियों के लिए आजीविका के साधन भी थे।
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उन्होंने बताया कि लोढवारा सहित आसपास के क्षेत्रों में ग्रेनाइट के खनन व पेड़ों के काटने से जंगल खत्म हो गए हैं। वन विभाग ने वहां पर पौधरोपण किया था, जिनकी देखभाल न होने से पौधे तैयार नहीं हो सके। यही हाल मानिकपुर के पाठा क्षेत्र का भी है।
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पर्यावरण विधिक गुंजन मिश्रा ने बताया कि चित्रकूट क्षेत्र का आध्यात्मिक महत्व के साथ साथ जैव विविधता एवं जल के स्रोत के कारण आम लोगों की दैनिक जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करने में बहुत महत्व है। लेकिन आज पर्वतों पर खनन होने के कारण वह लगभग समाप्त हो चुके हैं।
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प्रगतिशील किसान स्वतंत्र तिवारी ने बताया कि भरतकूप के भौटी पहाड़ पर्वत आज से 30 वर्ष पहले जितना ऊंचा था, आज उतना ही नीचे चला गया है। इसी तरह भरतौल गांव का एक छोटा सा पहाड़ खाई के रूप में बदल चुका है।
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