{"_id":"623e162c7e508e4ba84e97a0","slug":"medicines-worth-33-thousand-missing-chitrakoot-news-knp6874997103","type":"story","status":"publish","title_hn":"33 हजार कीमत की दवाएं गायब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
33 हजार कीमत की दवाएं गायब
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चित्रकूट। नमन मेडिकल एजेंसी की प्रोपराइटर व चित्रकूट केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन की महासचिव दीपिका गुप्ता ने औषधि निरीक्षक पर दवाओं को गायब करने का आरोप लगाया है। दीपिका का कहना है कि उनकी 33 हजार रुपये की दवाएं गायब हैं। जिलाधिकारी से दवाओं का पता लगवाने के साथ ही औषधि निरीक्षक पर कार्रवाई करने की मांग की है।
शुक्रवार को दीपिका ने बताया कि उनकी एडीएम कालोनी स्थित मेडिकल एजेंसी पर औषधि निरीक्षक मनोज कुमार सिंह ने 27 जनवरी 2021 को छापा मारा था और दवाओं को अवैध बताते हुए एक लाख 75 हजार रुपये की दवाएं सैंपल के नाम पर साथ ले गए थे। दो दिन बाद दवाओं को कोर्ट में पेश किया गया था।
बताया कि इस संबंध में उन्होंने औषधि निरीक्षक से कई बार उचित कार्रवाई की बात कही। आरोप लगाया कि औषधि निरीक्षक ने उनसे सुविधा शुल्क की मांग की। लगभग एक साल बाद उच्च न्यायालय ने दवाओं की गणना कर दवाएं सुपुर्द करने के आदेश दिए।
विज्ञापन
गुरुवार को मंडल स्तरीय अधिकारियों की मौजूदगी में इनकी गिनती कराई गई। दीपिका का आरोप है कि कागजों में दर्ज बैच नंबर, एक्सपायरी दर्ज लगभग 33 हजार रुपये की दवाएं गायब मिली हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की दवाओं का पता लगवाया जाए और आरोपी औषधि निरीक्षक के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
इस संबंध में ड्रग इंस्पेक्टर मनोज सिंह ने बताया कि आरोप गलत हैं। मामला अभी भी अदालत में है। दवा रिलीज का आदेश हुआ है। छापेमारी के दौरान उन्हें आठ गत्ता दवा मिली थी और अदालत के आदेश पर पूरे आठ गत्ते दवा रिलीज की गई है।
विज्ञापन
शुक्रवार को दीपिका ने बताया कि उनकी एडीएम कालोनी स्थित मेडिकल एजेंसी पर औषधि निरीक्षक मनोज कुमार सिंह ने 27 जनवरी 2021 को छापा मारा था और दवाओं को अवैध बताते हुए एक लाख 75 हजार रुपये की दवाएं सैंपल के नाम पर साथ ले गए थे। दो दिन बाद दवाओं को कोर्ट में पेश किया गया था।
विज्ञापन
बताया कि इस संबंध में उन्होंने औषधि निरीक्षक से कई बार उचित कार्रवाई की बात कही। आरोप लगाया कि औषधि निरीक्षक ने उनसे सुविधा शुल्क की मांग की। लगभग एक साल बाद उच्च न्यायालय ने दवाओं की गणना कर दवाएं सुपुर्द करने के आदेश दिए।
विज्ञापन
गुरुवार को मंडल स्तरीय अधिकारियों की मौजूदगी में इनकी गिनती कराई गई। दीपिका का आरोप है कि कागजों में दर्ज बैच नंबर, एक्सपायरी दर्ज लगभग 33 हजार रुपये की दवाएं गायब मिली हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की दवाओं का पता लगवाया जाए और आरोपी औषधि निरीक्षक के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
इस संबंध में ड्रग इंस्पेक्टर मनोज सिंह ने बताया कि आरोप गलत हैं। मामला अभी भी अदालत में है। दवा रिलीज का आदेश हुआ है। छापेमारी के दौरान उन्हें आठ गत्ता दवा मिली थी और अदालत के आदेश पर पूरे आठ गत्ते दवा रिलीज की गई है।