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Chitrakoot News: 100 साल पहले आई बाढ़ से मंदाकिनी नदी का होगा सीमांकन
Tue, 05 May 2026 12:06 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Tue, 05 May 2026 12:06 AM IST
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फोटो 04सीकेटीपी 07 मंदाकिनी नदी का दृश्य। संवाद
चित्रकूट। धर्मनगरी की सबसे पवित्र मंदाकिनी नदी के बाढ़ क्षेत्र (फ्लड प्लेन जोन) का निर्धारण और सीमांकन 100 साल पहले आई बाढ़ के रिकॉर्ड के आधार पर किया जाएगा। इसके लिए शासन ने चार विभागों को पत्र जारी किया है। इससे नदी किनारे बसे शहरी व गांव क्षेत्रों को भविष्य में आने वाली संभावित बाढ़ से सुरक्षित रखा जाएगा। जो विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगी।
मंदाकिनी नदी धार्मिक महत्व का बहुत बड़ा केंद्र है। इस नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के सती अनसूइया से हुआ। करीब 106 किमी लंबी यह नदी आगे चलकर उत्तर प्रदेश के कनकोटा गांव के पास यमुना नदी में मिल जाती है। इनमें एमपी क्षेत्र में 16 व यूपी क्षेत्र में 92 किमी लंबी शामिल है। सामान्य दिनों में इस नदी का स्तर जल 123.500 मीटर रहता है, जबकि बाढ़ के दिनों में यह जलस्तर बढ़कर 131.500 मीटर पहुंच जाता है।
अधिकतम जलस्तर 134.500 मीटर है। हर साल आने वाली बाढ़ में यहां के लोगों का काफी नुकसान होता है। साथ ही नदी का स्वरूप भी काफी बदल जाता है। इसे देखते हुए सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने पिछले 100 सालों में नदी में आई बाढ़ के आंकड़ों का अध्ययन कर उसके संरक्षण की कार्ययोजना बनाई जाएगी।
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यह पता किया जाएगा, कि नदी के आसपास के कौन-कौन से इलाके बाढ़ की चपेट में आते हैं और कितना नुकसान होता है। इसके लिए विभाग ने चार विभागों से योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के आधार पर मंदाकिनी नदी का फ्लड प्लेन जोन घोषित किया जाएगा।
चार विभागों के सहयोग से होगा सीमांकन
शासन ने नगर विकास, राजस्व, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग और आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के आदेश जारी किए हैं। जो नदी के संरक्षण व सीमांकन में अपने विभाग की जिम्मेदारी में अहम भूमिका निभाएंगे। सीमांकन के समय नदी के दोनों ओर पत्थर लगाए जाएंगे। ताकि नदी के स्वरूप को बचाया जा सके।
नदी किनारे रुकेंगे अवैध निर्माण कार्य
मंदाकिनी नदी के संरक्षण व सीमांकन के बाद इन क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों पर सख्त नियम लागू किए जाएंगे। निर्धारित क्षेत्र में अवैध निर्माणों पर रोक लगेगी। जबकि अभी लोग नदी किनारे तक मकान निर्माण करा रहे हैं। इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। साथ ही नदी के किनारे बसे मौजूदा लोगों के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। लोगों को बाढ़ के संभावित खतरों से निपटने के लिए भी तैयार किया जाएगा।
बोले जिम्मेदार
मंदाकिनी नदी के संरक्षण व सीमांकन का शासनादेश जारी हुआ है। नगर विकास, राजस्व व आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के साथ समन्वय कर नदी के कार्य कराए जाएंगे। राजस्व विभाग ही जमीन की नापजोख करेगा। तभी सीमांकन हो सकेगा। - एसके प्रसाद, अधिशासी अभियंता, लघु सिंचाई प्रखंड प्रथम।
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मंदाकिनी नदी धार्मिक महत्व का बहुत बड़ा केंद्र है। इस नदी का उद्गम मध्य प्रदेश के सती अनसूइया से हुआ। करीब 106 किमी लंबी यह नदी आगे चलकर उत्तर प्रदेश के कनकोटा गांव के पास यमुना नदी में मिल जाती है। इनमें एमपी क्षेत्र में 16 व यूपी क्षेत्र में 92 किमी लंबी शामिल है। सामान्य दिनों में इस नदी का स्तर जल 123.500 मीटर रहता है, जबकि बाढ़ के दिनों में यह जलस्तर बढ़कर 131.500 मीटर पहुंच जाता है।
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अधिकतम जलस्तर 134.500 मीटर है। हर साल आने वाली बाढ़ में यहां के लोगों का काफी नुकसान होता है। साथ ही नदी का स्वरूप भी काफी बदल जाता है। इसे देखते हुए सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने पिछले 100 सालों में नदी में आई बाढ़ के आंकड़ों का अध्ययन कर उसके संरक्षण की कार्ययोजना बनाई जाएगी।
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यह पता किया जाएगा, कि नदी के आसपास के कौन-कौन से इलाके बाढ़ की चपेट में आते हैं और कितना नुकसान होता है। इसके लिए विभाग ने चार विभागों से योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के आधार पर मंदाकिनी नदी का फ्लड प्लेन जोन घोषित किया जाएगा।
चार विभागों के सहयोग से होगा सीमांकन
शासन ने नगर विकास, राजस्व, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग और आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के आदेश जारी किए हैं। जो नदी के संरक्षण व सीमांकन में अपने विभाग की जिम्मेदारी में अहम भूमिका निभाएंगे। सीमांकन के समय नदी के दोनों ओर पत्थर लगाए जाएंगे। ताकि नदी के स्वरूप को बचाया जा सके।
नदी किनारे रुकेंगे अवैध निर्माण कार्य
मंदाकिनी नदी के संरक्षण व सीमांकन के बाद इन क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों पर सख्त नियम लागू किए जाएंगे। निर्धारित क्षेत्र में अवैध निर्माणों पर रोक लगेगी। जबकि अभी लोग नदी किनारे तक मकान निर्माण करा रहे हैं। इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। साथ ही नदी के किनारे बसे मौजूदा लोगों के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। लोगों को बाढ़ के संभावित खतरों से निपटने के लिए भी तैयार किया जाएगा।
बोले जिम्मेदार
मंदाकिनी नदी के संरक्षण व सीमांकन का शासनादेश जारी हुआ है। नगर विकास, राजस्व व आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के साथ समन्वय कर नदी के कार्य कराए जाएंगे। राजस्व विभाग ही जमीन की नापजोख करेगा। तभी सीमांकन हो सकेगा। - एसके प्रसाद, अधिशासी अभियंता, लघु सिंचाई प्रखंड प्रथम।