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Chitrakoot News: लुरी लुरी जाई मोरी अंगना बटोरी...
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चित्रकूट। बुंदेलखंड लोकलय समारोह में होली का खुमार दिखा ग्रामीण क्षेत्र की संस्कृति से ओतप्रोत ढोल मजीरे की धुन पर बुंदेली कलाकारों ने छटा बिखेरी। बलमा गीत लुरी लुरी जाई मोरी अंगना बटोरी और उरझो न श्याम कही मनो हमार जैसे गीतों पर दर्शक भी झूमे।
अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान द्वारा भारत जननी परिसर में बुंदेलखंड लोकलय समारोह का शुभारंभ लोकभारती के राष्ट्रीय संयोजक बृजेंद्र पाल सिंह ने किया। उन्होंने संस्थान के संस्थापक गोपाल भाई के प्रयासों की सराहना करते हुए बुंदेलखंड लोकलय समारोह स्थानीय कलाकारों को एक मंच के माध्यम से उनकी प्रतिभाओं को उजागर करने का अनुकरणनीय प्रयास हो रहा है। संस्थान के अध्यक्ष डॉ. राजेश सिन्हा व निदेशक राष्ट्रदीप ने मौजूद लोगों का रोली चंदन से स्वागत अभिनंदन किया। इसके बाद मंगलाचरण फूल सी हो जिंदगी ऐसी पवन कृपा कीजिए मां वंदना के साथ गोपाल लोक कला मंच की कलाकार रचना, शांति आदि ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। संत मदन दास ने कहा कि सामाजिक क्षेत्र में बृजेंद्रपाल ने अपने को राष्ट्र कार्य के लिए समर्पित कर किया है। बांदा की ज्योति पटेल व सीता देवी ने बुंदेलखंडी गीतों उरझो न श्याम कही मनो हमार व सिर बांधे मुकुट खेलें होरी से समा बांधा।
पाठा के आदिवासी कलाकारों ने बलमा गीत लुरी लुरी जाई मोरी अंगना बटोरी ने मार्मिक रूप से भाव विभोर किया। इस मौके पर अभिषेक कुमार, ऋतिक वाजपेयी, नरेंद्र कुमार, पंकज अग्रवाल, अरविंद मिश्रा, चंद्र प्रकाश खरे, रामबाबू गुप्ता, जगदीश गौतम, सुनील पटेल, रावेंद्र गौतम, रीना सिंह, रश्मि व विश्वजीत आदि मौजूद रहे
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अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान द्वारा भारत जननी परिसर में बुंदेलखंड लोकलय समारोह का शुभारंभ लोकभारती के राष्ट्रीय संयोजक बृजेंद्र पाल सिंह ने किया। उन्होंने संस्थान के संस्थापक गोपाल भाई के प्रयासों की सराहना करते हुए बुंदेलखंड लोकलय समारोह स्थानीय कलाकारों को एक मंच के माध्यम से उनकी प्रतिभाओं को उजागर करने का अनुकरणनीय प्रयास हो रहा है। संस्थान के अध्यक्ष डॉ. राजेश सिन्हा व निदेशक राष्ट्रदीप ने मौजूद लोगों का रोली चंदन से स्वागत अभिनंदन किया। इसके बाद मंगलाचरण फूल सी हो जिंदगी ऐसी पवन कृपा कीजिए मां वंदना के साथ गोपाल लोक कला मंच की कलाकार रचना, शांति आदि ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। संत मदन दास ने कहा कि सामाजिक क्षेत्र में बृजेंद्रपाल ने अपने को राष्ट्र कार्य के लिए समर्पित कर किया है। बांदा की ज्योति पटेल व सीता देवी ने बुंदेलखंडी गीतों उरझो न श्याम कही मनो हमार व सिर बांधे मुकुट खेलें होरी से समा बांधा।
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पाठा के आदिवासी कलाकारों ने बलमा गीत लुरी लुरी जाई मोरी अंगना बटोरी ने मार्मिक रूप से भाव विभोर किया। इस मौके पर अभिषेक कुमार, ऋतिक वाजपेयी, नरेंद्र कुमार, पंकज अग्रवाल, अरविंद मिश्रा, चंद्र प्रकाश खरे, रामबाबू गुप्ता, जगदीश गौतम, सुनील पटेल, रावेंद्र गौतम, रीना सिंह, रश्मि व विश्वजीत आदि मौजूद रहे
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