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मानस विद्वानों का अद्वितीय संगम है रामायण मेला
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फोटो- 12- रामायण मेला में भजन सुनाती कलाकारों की टीम। संवाद
- फोटो : CHITRAKUTT
चित्रकूट/खोही। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की कर्मभूमि में राष्ट्रीय रामायण मेला कार्यक्रम के द्वितीय दिवस रामकथा व मानस के शोधपरक विद्वानों ने तर्कपूर्ण विचार प्रस्तुत किये। श्रीराम व कृष्ण काव्यों के आधार पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन श्रॅृखला की भरमार रही। जिसे दर्शकों ने जमकर सराहा।
शुक्रवार को प्रथम सत्र में रामकथा के व्याख्यान माला में मानस किंकर राम प्रताप शुक्ला ने कहा कि संतों का समाज जहॉं एकत्रित होता है वहॉ तीर्थराज संगम चलकर आता है। संत रविदास नगर के उदय शंकर दुबे ने कहा कि काशी के शंकर कोतवाल ने अपनी बेटी द्रोपदी रानी की विदाई में रामचरित मानस की हस्तलिखित प्रति चॉदी के बाक्स सहित भेंट की थी। प्रदुम्न कुमार दुबे ने रामायण मेले को कुंभ की संज्ञा देते हुए कहा कि देश के विभिन्न मानस मनीषियों व रामचरित मानस व विभिन्न रामायणों के शोधपरक विद्वानों का एक अद्वितीय संगम बताया।
सुरेंद्र सिंह रामायणी ने बताया कि आज के वैज्ञानिक युग में टेलीविजन के प्रसारण देखकर बच्चे संस्कार विहीन बनते जा रहे है। कार्यक्त्रस्म के गंधर्व कल्चरल ऑर्गनाईजेशन लखनऊ एवं अन्य भजन गायकों द्वारा मनोहारी गीत दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते रहे।
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डॉ. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ‘ललित’ ने कहा कि रामायण मेला आज भी प्रासंगिक है। डा. संजय पंकज ने कहा कि जब भी में विद्यापति की बात करता हॅू और वह पूरे विश्व में चर्चित डा. प्रमिला मिश्रा ने बताया कि बाल्मीकि रामायण भारतीय साहित्य की अमूल्य निधि है। डा. कालका प्रसाद सेमवाल रूद्रप्रयाग, डा. जंगबहादुर पांडेय रांची, डा. ओंकारनाथ द्विवेदी सुल्तानपुर, डा. आरएस त्रिपाठी तिरूपति ने रामकथा शोध पर अपने विचार प्रस्तुत किये।
स्वदेसी गोष्ठी में आत्मनिर्भरता पर दिए व्याख्यान
चित्रकूट। स्वावलंबन जागरण मंच द्वारा स्वदेसी गोष्ठी का आयोजन राष्ट्रीय रामायण मेला मंच पर आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि अखिल भारतीय प्रचारक, राष्ट्रीय संयोजक स्वदेशी जागरण मंच के काश्मीरी लाल ने कहा कि आत्म निर्भर भारत बनाने के क्त्रस्म में स्वदेसी को अपनाना होगा। स्वदेसी मंच में प्रमुख रूप से अजय कुमार, वरुण, मोहित दास महाराज, महेंद्र दास, अजय ने भी इसके फायदे बताए। कार्यक्रम के पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्र व रामायण मेले के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश कुमार करवरिया ने पदाधिकारियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया।
सांस्कृतिक कार्यक्त्रस्मों की रही भरमार
चित्रकूट। राष्ट्रीय रामायण मेला में संध्या से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखने को खूब भीड़ उमडी़। स्वरांजलि कला केन्द्र लखनऊ, रामाधीन आर्य झॉंसी, रघुवीर सिंह झॉंसी, कु आकांक्षा गुप्ता ने भजन प्रस्तुत किये। लोकगीतों के क्त्रस्म में सुश्री अर्चना कोटार्य ने मनोहारी ढंग से कई लोकगीत प्रस्तुत किये। जिन्हें दर्शकों ने सराहा। रमाकांत भारती प्रयागराज द्वारा राम कथा व कृष्ण कथा पर आधारित लोकनृत्य व लोकगीत प्रस्तुत किये। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से मनोबल बढ़ाया। देर रात तक वृंदावन रासलीला संस्थान वृंदावन के देवकी नंदन शर्मा की टीम द्वारा रामलीला एवं रासलीला का मंचन किया गया।
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शुक्रवार को प्रथम सत्र में रामकथा के व्याख्यान माला में मानस किंकर राम प्रताप शुक्ला ने कहा कि संतों का समाज जहॉं एकत्रित होता है वहॉ तीर्थराज संगम चलकर आता है। संत रविदास नगर के उदय शंकर दुबे ने कहा कि काशी के शंकर कोतवाल ने अपनी बेटी द्रोपदी रानी की विदाई में रामचरित मानस की हस्तलिखित प्रति चॉदी के बाक्स सहित भेंट की थी। प्रदुम्न कुमार दुबे ने रामायण मेले को कुंभ की संज्ञा देते हुए कहा कि देश के विभिन्न मानस मनीषियों व रामचरित मानस व विभिन्न रामायणों के शोधपरक विद्वानों का एक अद्वितीय संगम बताया।
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सुरेंद्र सिंह रामायणी ने बताया कि आज के वैज्ञानिक युग में टेलीविजन के प्रसारण देखकर बच्चे संस्कार विहीन बनते जा रहे है। कार्यक्त्रस्म के गंधर्व कल्चरल ऑर्गनाईजेशन लखनऊ एवं अन्य भजन गायकों द्वारा मनोहारी गीत दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते रहे।
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डॉ. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ‘ललित’ ने कहा कि रामायण मेला आज भी प्रासंगिक है। डा. संजय पंकज ने कहा कि जब भी में विद्यापति की बात करता हॅू और वह पूरे विश्व में चर्चित डा. प्रमिला मिश्रा ने बताया कि बाल्मीकि रामायण भारतीय साहित्य की अमूल्य निधि है। डा. कालका प्रसाद सेमवाल रूद्रप्रयाग, डा. जंगबहादुर पांडेय रांची, डा. ओंकारनाथ द्विवेदी सुल्तानपुर, डा. आरएस त्रिपाठी तिरूपति ने रामकथा शोध पर अपने विचार प्रस्तुत किये।
स्वदेसी गोष्ठी में आत्मनिर्भरता पर दिए व्याख्यान
चित्रकूट। स्वावलंबन जागरण मंच द्वारा स्वदेसी गोष्ठी का आयोजन राष्ट्रीय रामायण मेला मंच पर आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि अखिल भारतीय प्रचारक, राष्ट्रीय संयोजक स्वदेशी जागरण मंच के काश्मीरी लाल ने कहा कि आत्म निर्भर भारत बनाने के क्त्रस्म में स्वदेसी को अपनाना होगा। स्वदेसी मंच में प्रमुख रूप से अजय कुमार, वरुण, मोहित दास महाराज, महेंद्र दास, अजय ने भी इसके फायदे बताए। कार्यक्रम के पूर्व सांसद भैरों प्रसाद मिश्र व रामायण मेले के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश कुमार करवरिया ने पदाधिकारियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया।
सांस्कृतिक कार्यक्त्रस्मों की रही भरमार
चित्रकूट। राष्ट्रीय रामायण मेला में संध्या से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों को देखने को खूब भीड़ उमडी़। स्वरांजलि कला केन्द्र लखनऊ, रामाधीन आर्य झॉंसी, रघुवीर सिंह झॉंसी, कु आकांक्षा गुप्ता ने भजन प्रस्तुत किये। लोकगीतों के क्त्रस्म में सुश्री अर्चना कोटार्य ने मनोहारी ढंग से कई लोकगीत प्रस्तुत किये। जिन्हें दर्शकों ने सराहा। रमाकांत भारती प्रयागराज द्वारा राम कथा व कृष्ण कथा पर आधारित लोकनृत्य व लोकगीत प्रस्तुत किये। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से मनोबल बढ़ाया। देर रात तक वृंदावन रासलीला संस्थान वृंदावन के देवकी नंदन शर्मा की टीम द्वारा रामलीला एवं रासलीला का मंचन किया गया।

फोटो- 10- रामायण मेला में रासलीला का मंचन करते कलाकार। संवाद- फोटो : CHITRAKUTT

फोटो- 11- रामायण मेला में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते कलाकार। संवाद- फोटो : CHITRAKUTT