गैंग में कोलों का वर्चस्व
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रश्मि कोल पुत्र जमुना निवासी ग्राम बगरहा मजरा इटवां डुडैला, अशोक पुत्र छोटा कोल निवासी चमरौंहा, गंगा प्रसाद पुत्र सूरदीन निवासी गिदुरहा थाना मानिकपुर आदि कुछ सक्रिय सदस्य हैं जिनके नाम पुलिस रिकार्ड में हैं। खच्चू ने भी बताया कि अब ये बबुली के खास बन चुके हैं। इनके अलावा बबुली का दाहिना हाथ लवलेश कोल भी गैंग में अब अपने रिश्तेदारों और कोल जाति के नवयुवकों को रखकर गैंग चलाना चाह रहा है। एसपी पवन कुमार ने कहा कि गिरोह का भी जल्द सफाया होगा। उन्होंने बताया कि अभी भी वह प्रयासरत हैं और सब कुछ ठीक रहा तो जिले से दस्युओं का नामोनिशान खत्म हो जाएगा।
आखिर सच साबित हुए कयास
चाचा को खाना देने के आरोप में भेजा गया था सुधार गृह
खच्चू ने बताया कि चाचा बलखड़िया को खाना देने के आरोप में पकड़े जाने पर उसे बाल संप्रेक्षण गृह भेजा गया था। जब उससे पूछा गया कि वह यहां से भागा क्यों। उसने कहा कि अधीक्षक उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करते थे। अधीक्षक से ही बाकी तीन साथी भी परेशान रहते थे। उन लोगों ने सोचा कि अगर मारपीट करेंगे तो उनका ट्रांसफर किसी अन्य सुधार गृह में कर दिया जाएगा। भागने का इरादा नहीं था, पर बात बढ़ गई तो भागना पड़ा। बताया कि उसे सुशील पटेल ने तमंचा दिया था। उसके बारे में वह और कुछ नहीं बता सका।
अब नहीं करना ये सब...
चित्रकूट। साधारण और भोले खच्चू पटेल को देखकर ये नहीं लगता कि ये पांच हजार का इनामी है और बलखड़िया गैंग का शार्प शूटर रहा है। उससे जब पूछा गया कि वह गैंग छोड़कर क्यों आया तो उसने बताया कि चाचा बलखड़िया ने सरेंडर करने को कहा था। वह तब से ही वह ऐसा करने की सोच रहा था। उसने कहा कि अब नहीं करना ये सब। संप्रेक्षण गृह से भागने के बाद वह खम्हरिया के जंगल में गैंग से मिला था। उसे नहीं मालूम कि उस पर कितना इनाम है। उसने इशारे से कहा कि बारह हजार।
पटेल जी को लेकर रहस्य बरकरार
प्रेसवार्ता में एक बार फिर एसपी पवन कुमार ने पटेल जी का जिक्र कर बताया कि उसके बारे में अभी भी ज्यादा जानकारी नहीं है। न तो यह फोटो खिंचवाता है और न मोबाइल रखता है। थोड़ी बहुत चिकित्सा जानता है और वक्त जरूरत पर हथियार भी चला लेता है। गैंग में भी इसे सभी पटेल जी ही कहते हैं।