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श्रद्धा का प्रतीक है झारखंडी माता मंदिर
अमर उजाला ब्यूरो,चित्रकूट
Updated Wed, 29 Mar 2017 10:48 PM IST
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तरौंहा में स्थापित मां झारखंडी माता का मंदिर।
- फोटो : amarujala
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चित्रकूट। शहर के तरौंहा में स्थित प्रसिद्ध झारखंडी माता के मंदिर में चैत्र की नवरात्रि होते ही भक्त उमड़ पड़ते हैं। माता का यह प्राचीन मंदिर महाराष्ठी सुर्की वंशज के राजाओं ने बनवाया था। उन्हीं के बनाए गये किले के अंदर माता विराजमान हैं। किला तो खंडहर में तब्दील हो चुका है लेकिन स्थानीय लोगों ने समिति बनाकर मंदिर का निर्माण कराया है।
शहर के तरौहा में अंग्रेजों के जमाने के समय महाराष्ठी सुर्की वंशज के राजा रहते थे। जिनके परिवार के सदस्यों ने झारखंड क्षेत्र से माता की मूर्ति लाकर मंदिर स्थापित किया था। तरौंहा निवासी रमेश द्विवेदी,अधिवक्ता राकेश शुक्ला व कन्हैया लाल वर्मा ने बताया कि माता उनकी कुल देवी थी।
उनका परिवार विभिन्न पर्वों में पूजापाठ किया करा करते थे। आज भी राजाओं द्वारा बनाये गये प्राचीन किला की टूटी दीवारी व बावली बनी हुई है। मंदिर की व्यवस्था के लिए स्थानीय लोगों ने समिति बना कर इसकी मंदिर के रखरखाव की व्यवस्था करते हैं। प्रत्येक नवरात्रि पर यहां पर भव्य सजावट की जाती है।
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जहां नौ दिन भजन कार्यक्रम चलते रहते हैं। यहां दूर-दूर गांव से लोग पूजन करने आते हैं।
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शहर के तरौहा में अंग्रेजों के जमाने के समय महाराष्ठी सुर्की वंशज के राजा रहते थे। जिनके परिवार के सदस्यों ने झारखंड क्षेत्र से माता की मूर्ति लाकर मंदिर स्थापित किया था। तरौंहा निवासी रमेश द्विवेदी,अधिवक्ता राकेश शुक्ला व कन्हैया लाल वर्मा ने बताया कि माता उनकी कुल देवी थी।
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उनका परिवार विभिन्न पर्वों में पूजापाठ किया करा करते थे। आज भी राजाओं द्वारा बनाये गये प्राचीन किला की टूटी दीवारी व बावली बनी हुई है। मंदिर की व्यवस्था के लिए स्थानीय लोगों ने समिति बना कर इसकी मंदिर के रखरखाव की व्यवस्था करते हैं। प्रत्येक नवरात्रि पर यहां पर भव्य सजावट की जाती है।
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जहां नौ दिन भजन कार्यक्रम चलते रहते हैं। यहां दूर-दूर गांव से लोग पूजन करने आते हैं।