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सरकारी धन के निजी प्रयोग पर पूर्व प्रधान एवं जेई को सात-सात साल की सजा

Mon, 23 Jan 2017 11:28 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो चित्रकूट।
अमर उजाला ब्यूरो चित्रकूट। Updated Mon, 23 Jan 2017 11:28 PM IST
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In the charge of missuse of trasary got punished
court shimla
चित्रकूट।
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मनरेगा के धन का निजी प्रयोग करने के आरोपों में दोषी पाए जाने पर तत्कालीन महिला ग्राम प्रधान एवं जेई को सीजेएम कोर्ट ने सात-सात  साल की सजा सुनाई है।

आरोपियों पर 15 हजार का अर्थदंड भी लगाया है। जिला पंचायत की ओर से सदर ब्लाक क्षेत्र के रानीपुर भट्ट गांव में बंधी व चेकडैम बनवाने के लिए सन 2010 में सात लाख रुपये स्वीकृत हुए थे। इसमें मनरेगा से मिली धनराशि की बंदरबांट करने की शिकायत पर तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी केएन खरवार ने जांच कराई।
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जांच में पाया गया कि कुल धनराशि में ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग के तत्कालीन जेई जयप्रकाश और तत्कालीन ग्राम प्रधान सुशीला देवी ने छह लाख 76 हजार 302 रुपये गिट्टी, बालू व मैटरियल के नाम पर निकाला और इस पैसे का निजी उपयोग कर लिया। अभियोजन अधिकारी श्रीराम यादव ने बताया कि इसी जांच रिपोर्ट के बाद अपर मुख्य अधिकारी ने 16 सितंबर 2010 को दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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पुलिस ने तत्कालीन महिला ग्राम प्रधान के खिलाफ ही आरोप पत्र अदालत में दाखिल किए, लेकिन कई बार बहस के दौरान अदालत ने तत्कालीन जेई को भी सुनवाई में शामिल कराने के आदेश दिए। सोमवार को सीजेएम सुभाष सिंह ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद सरकारी धन का अपव्यय और वित्तीय अनियमितता के आरोप सिद्ध होने पर दोनों को सात-सात साल की सजा और 15-15 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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