{"_id":"a4538f18552b1c3006884b00c3ab11c6","slug":"if-there-was-no-water-will-dry-paddy-seedlings-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पानी न मिला तो सूख जाएगी धान की पौध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पानी न मिला तो सूख जाएगी धान की पौध
ब्यूरो/अमर उजाला, चित्रकूट
Updated Thu, 30 Jul 2015 11:22 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंप कैनाल का फायदा किसानों को नहीं मिल रहा है।
विज्ञापन
राजापुर पंप कैनाल में पानी न छोड़े जाने से धान की नर्सरी की सिंचाई करना
भी मुश्किल हो रहा है।
विभागीय जेई बिजली की कमी की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। टेल के गांवों के किसानों ने तो धान की सिंचाई की उम्मीद छोड़ दी है।
पचास क्यूसेक की पांच पंपों वाली राजापुर पंप कैनाल विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से ठप पड़ी है। वैसे भी दो या तीन पंप ही चल पाते हैं। धान की बुआई का समय निकलता जा रहा है। किसान मायूस हैं। किसानों का कहना है कि लगातार कई साल से ओला, अतिवृष्टि, सूखा जैसी दैवी आपदाओं से जूझते आ रहे हैं।
बारिश न होने पर फसलों की सिंचाई का एकमात्र जरिया राजापुर पंप कैनाल है। नहर के अभी तक न चल पाने से धान की रोपाई बाधित है। किसान रामगुलाम पांडे, रामनरेश, सत्येंद्र पांडे, राजाराम, कृष्ण मिश्र, रमाकांत, गिरधारी, राकेश, मनबोध, लालबाबू सिंह ने कहा कि नहर दुरुस्त कराकर जल्द चालू नहीं कराई गई तो नर्सरी जानवरों को खिलानी पड़ेगी।
इस संबंध में लघु डाल विभाग के जेई गंगाराम का कहना है कि यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने की ववजह से पाइपलाइन बाहर नहीं दिख रही, इससे पंप चालू नहीं किया जा पा रहा। इसके अलावा बिजली की कमी भी नहर को सुचारु रूप से चलने में बाधा है।
पंप कैनाल की पश्चिमी शाखा में चिल्लीराकस, बेराउर, रायपुर, कुसेली, महुआगांव, भटरी आदि गांव हैं। दक्षिणी शाखा में मझगांव और खटवारा के किसान भी नहर के भरोसे धान की खेती कर रहे हैं। मलवारा, पराको, चनहट आदि के टेल के किसानों ने तो आस ही छोड़ दी है। अब ट्यूबवेल से सिंचाई कर रहे हैं।
विभागीय जेई बिजली की कमी की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं। टेल के गांवों के किसानों ने तो धान की सिंचाई की उम्मीद छोड़ दी है।
पचास क्यूसेक की पांच पंपों वाली राजापुर पंप कैनाल विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से ठप पड़ी है। वैसे भी दो या तीन पंप ही चल पाते हैं। धान की बुआई का समय निकलता जा रहा है। किसान मायूस हैं। किसानों का कहना है कि लगातार कई साल से ओला, अतिवृष्टि, सूखा जैसी दैवी आपदाओं से जूझते आ रहे हैं।
बारिश न होने पर फसलों की सिंचाई का एकमात्र जरिया राजापुर पंप कैनाल है। नहर के अभी तक न चल पाने से धान की रोपाई बाधित है। किसान रामगुलाम पांडे, रामनरेश, सत्येंद्र पांडे, राजाराम, कृष्ण मिश्र, रमाकांत, गिरधारी, राकेश, मनबोध, लालबाबू सिंह ने कहा कि नहर दुरुस्त कराकर जल्द चालू नहीं कराई गई तो नर्सरी जानवरों को खिलानी पड़ेगी।
इस संबंध में लघु डाल विभाग के जेई गंगाराम का कहना है कि यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने की ववजह से पाइपलाइन बाहर नहीं दिख रही, इससे पंप चालू नहीं किया जा पा रहा। इसके अलावा बिजली की कमी भी नहर को सुचारु रूप से चलने में बाधा है।
पंप कैनाल की पश्चिमी शाखा में चिल्लीराकस, बेराउर, रायपुर, कुसेली, महुआगांव, भटरी आदि गांव हैं। दक्षिणी शाखा में मझगांव और खटवारा के किसान भी नहर के भरोसे धान की खेती कर रहे हैं। मलवारा, पराको, चनहट आदि के टेल के किसानों ने तो आस ही छोड़ दी है। अब ट्यूबवेल से सिंचाई कर रहे हैं।