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Chitrakoot News: महिला के हाथों से बनाए गए मिट्टी के दीये से घर होंगे जगमग
Fri, 17 Oct 2025 01:39 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Fri, 17 Oct 2025 01:39 AM IST
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12 सीकेटीपी-1- परिचय-दिवाली मेले में बाजार में बेचने के लिए मिट्टी के दिए बनाती महिला । संवाद
चित्रकूट। दिवाली पर्व पर महिला समूहों द्वारा बनाए गए मिट्टी और गोबर के दीये घरों की रौनक बढ़ा रहे हैं। महिलाएं दीये बनाने और बेचने के कार्य में जुटी हैं। कई समूह शहर के पुरानी कोतवाली परिसर में लगे स्वदेशी मेले में स्टॉल लगाकर बिक्री कर रही हैं। इससे उनकी आय बढ़ रही है।
शहर के पुरानी कोतवाली परिसर में लगे स्वदेशी मेले में जयदेव समूह की सदस्य संपतिया ने बताया कि उनका समूह वर्ष 2018 में बना था। इसमें 13 महिलाएं सीमा, सरोज, रज्जू, मनोरमा आदि शामिल हैं। सभी महिलाएं दिवाली से करीब एक माह पहले दीये तैयार करती हैं और बाद में इन्हें बेचती हैं। उन्होंने बताया कि वे 100 रुपये प्रति सैकड़ा के हिसाब से दीये बेचती हैं। हर साल वे 20 हजार से अधिक दीये तैयार करती हैं, जिन पर लगभग 10 हजार रुपये की लागत आती है।
शिवरामपुर क्षेत्र के पड़री गांव में महिमा समूह की महिलाएं गोबर से बने दीये तैयार करती हैं। महिमा ने बताया कि गांव की गोशाला से गोबर लेकर दीये बनाए जाते हैं और पांच रुपये प्रति दीया बेचा जाता है। इस कार्य में जिला प्रशासन भी सहयोग कर रहा है। महिलाएं शहर सहित अन्य स्थानों पर मेलों में स्टॉल लगाकर बिक्री करती हैं। स्थानीय लोग घरों से भी दीये खरीदते हैं। गोबर के दीये के उपयोग के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
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तरंग संकुल स्तरीय संगठन की मैनेजर सविता ने बताया कि एक संकुल की देखरेख में सैकड़ों समूह कार्यरत हैं और महिलाओं को प्रशिक्षण व प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
-- इनसेट--
शासन की ओर से आधुनिक चाक दिए गए
महिला समूहों को मिट्टी के दीये और बर्तन बनाने के लिए बिजली से संचालित आधुनिक चाक भी उपलब्ध कराए गए हैं। जयदेव महिला समूह की सदस्य मंजू और सावित्री ने बताया कि इन चाकों से मिट्टी के दीये तैयार करने में अब काफी सहूलियत मिल रही है।
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शहर के पुरानी कोतवाली परिसर में लगे स्वदेशी मेले में जयदेव समूह की सदस्य संपतिया ने बताया कि उनका समूह वर्ष 2018 में बना था। इसमें 13 महिलाएं सीमा, सरोज, रज्जू, मनोरमा आदि शामिल हैं। सभी महिलाएं दिवाली से करीब एक माह पहले दीये तैयार करती हैं और बाद में इन्हें बेचती हैं। उन्होंने बताया कि वे 100 रुपये प्रति सैकड़ा के हिसाब से दीये बेचती हैं। हर साल वे 20 हजार से अधिक दीये तैयार करती हैं, जिन पर लगभग 10 हजार रुपये की लागत आती है।
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शिवरामपुर क्षेत्र के पड़री गांव में महिमा समूह की महिलाएं गोबर से बने दीये तैयार करती हैं। महिमा ने बताया कि गांव की गोशाला से गोबर लेकर दीये बनाए जाते हैं और पांच रुपये प्रति दीया बेचा जाता है। इस कार्य में जिला प्रशासन भी सहयोग कर रहा है। महिलाएं शहर सहित अन्य स्थानों पर मेलों में स्टॉल लगाकर बिक्री करती हैं। स्थानीय लोग घरों से भी दीये खरीदते हैं। गोबर के दीये के उपयोग के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
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तरंग संकुल स्तरीय संगठन की मैनेजर सविता ने बताया कि एक संकुल की देखरेख में सैकड़ों समूह कार्यरत हैं और महिलाओं को प्रशिक्षण व प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
शासन की ओर से आधुनिक चाक दिए गए
महिला समूहों को मिट्टी के दीये और बर्तन बनाने के लिए बिजली से संचालित आधुनिक चाक भी उपलब्ध कराए गए हैं। जयदेव महिला समूह की सदस्य मंजू और सावित्री ने बताया कि इन चाकों से मिट्टी के दीये तैयार करने में अब काफी सहूलियत मिल रही है।

12 सीकेटीपी-1- परिचय-दिवाली मेले में बाजार में बेचने के लिए मिट्टी के दिए बनाती महिला । संवाद