फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Chitrakoot News ›   holi

विधिविधान से होलिकादहन होते ही शुरु रंग बाजी

Sun, 28 Mar 2021 09:16 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 28 Mar 2021 09:16 PM IST
विज्ञापन
holi
चित्रकूट। विधिविधान से पूजन के बाद 761 स्थलों पर होलिका दहन किया गया। कई स्थलों पर होरियारों ने होलिका को विशेष रूप से सजाया था। जिले के कई कस्बों, गांवों और मोहल्लों में होलिका दहन हुआ। होलिका दहन स्थलों पर एकत्रित लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दी। बच्चों, महिलाओं और पुरुषों ने एक-दूसरे को रंग लगाकर होली खेल बधाई दी। सोमवार को जनपद में रंगों का पर्व मनाया जाएगा।
विज्ञापन

होली के त्योहार के लिए सजी दुकानों में रंग-बिरंगी पिचकारी, अबीर, गुलाल और रंग की जमकर खरीदारी लोगों ने की। मुख्यालय के दुकानों समेत कस्बों में जमकर भीड़ देखने को मिली। अधिकांश लोगों ने होली के त्योहार का सामान व होली खेलने के लिए रंग, गुलाल, पिचकारियां आदि खरीदी। होली पर्व पर जहां एक ओर महिलाएं घरों को साफ-सुथरा करने में कई दिन पूर्व से जुटी थीं, वहीं अधिकांश लोगों के घरों में गुझिया, रसगुल्ले, चिप्स, पापड़, मटरी, नमकीन आदि पकवान बनाए गए।
विज्ञापन

बच्चों ने दुकानों से रंग और गुलाल की जमकर खरीदारी की। बाजारों में पिचकारियां, कार्टून आदि मुखौटे आकर्षण का केंद्र बने रहे। जिला मुख्यालय सहित मऊ, बरगढ़, रैपुरा, भौरी, मानिकपुर, राजापुर, पहाड़ी, शिवरामपुर, सीतापुर, खोही, भरतकूप, सरैंया, लालता रोड, रामनगर आदि प्रमुख बाजारों पर जगह-जगह रंगों की दुकानें सजाई गई हैं। बाजारों में रसायनयुक्त रंगों की भी भरमार है। होलिका दहन के दौरान पुलिस बल मौजूद रहा।
विज्ञापन
विज्ञापन

होलिका दहन के संबंध में भागवत कथा प्रवक्ता नवलेश दीक्षित ने बताया कि इस वर्ष फागुन माह की अंतिम पूर्णिमा को होली मनाया जाएगा। हर काल में इस उत्सव की परंपरा और रंग बदलते रहे हैं। बताया कि प्राचीन काल में होली को होलाका नाम से जाना जता था। इस पर्व में होलाका नामक अन्न से हवन करने के पश्चात प्रसाद लेने की परंपरा थी। होलाका अर्थात खेतों में पड़ा हुआ अधपका अन्न होता है। नई फसल का कुछ भाग पूर्व में देवताओं को अर्पित किया जाता रहा है। होलिका दहन के बारे में बताया कि इसी दिन हिरण्यकश्यप की बहन का होलिका दहन हुआ था। जिसमें विष्णु भक्त बालक प्रहलाद बच गए थे। इसी दिन भगवान शिव ने कामदेव को भस्म करने के पश्चात जीवित किया था। होलिका दहन के बाद रंग उत्सव की परम्परा भगवान श्रीकृष्ण के काल से प्रारंभ हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed