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हरदोई पुलिस ने चित्रकूट से पकड़ा 15 हजार का इनामी
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चित्रकूट। 15 हजार के ईनामी पत्नीहंता को रातोंरात हरदोई पुलिस टीम ने धर्मनगरी के सर्वोदय सेवाश्रम से पकड़ लिया। पुलिस का आपरेशन इतना गुप्त रहा कि इसकी किसी को खबर नहीं लगी। यहां तक कि आश्रम संचालक अभिमन्यु सिंह को भी इसकी जानकारी दूसरे दिन सुबह हुई। आरोपी के पकड़े जाने के बाद अब पूरे सेवाश्रम में तरह-तरह की चर्चाएं हो रहीं हैं। संचालक ने सफाई दी है कि उनका या उनके संस्थान से हत्यारोपी का कोई लेना देना नहीं था।
हरदोई जिले के बेनीगंज थाना क्षेत्र ग्राम उमरारी निवासी अशोक कुमार सिंह पुत्र इंद्रजीत को हरदोई पुलिस ने सोमवार की रात को योजनाबद्ध तरीके से चित्रकूट जिले के सीतापुर चौकी क्षेत्र बेड़ीपुलिया के पास स्थित सर्वोदय सेवाश्रम से गिरफ़्तार कर लिया है। जिसके बारे में बताया गया कि उसने 1985 में अपनी पत्नी की हत्या कर दी थी इसके बाद उसे आजीवन कारावास की सजा मिली थी। 1990 में जमानत मिलने के बाद से यह अदालत में पेश नहीं हुआ। जिस पर पुलिस ने 15 हजार का इनाम घोषित किया था। इस मामले में सर्वोदय सेवाश्रम के संचालक अभिमन्यु सिंह ने बताया कि यह आरोपी हरीओम महराज के नाम से रहता था लेकिन संस्था में कोई काम नहीं करता था। बेडीपुलिया के आसपास दुकानदारों के यहां जाकर साफ सफाई व सत्कर्म की बातें कर अपना भोजन पानी का इंतजाम करता था। कभी कभार उनके आश्रम में निराश्रित होने की बात कहकर सोने आता था। उसके पुराने कामों के बारे में किसी को जानकारी नहंी थी। वह यहां डेढ़ साल से आता जाता था कभी उसे ठहरने के लिए स्थाई कमरा नहीं दिया गया। बाहर सड़क किनारे के दुकानदारों से ही संपर्क में रहता था।
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हरदोई जिले के बेनीगंज थाना क्षेत्र ग्राम उमरारी निवासी अशोक कुमार सिंह पुत्र इंद्रजीत को हरदोई पुलिस ने सोमवार की रात को योजनाबद्ध तरीके से चित्रकूट जिले के सीतापुर चौकी क्षेत्र बेड़ीपुलिया के पास स्थित सर्वोदय सेवाश्रम से गिरफ़्तार कर लिया है। जिसके बारे में बताया गया कि उसने 1985 में अपनी पत्नी की हत्या कर दी थी इसके बाद उसे आजीवन कारावास की सजा मिली थी। 1990 में जमानत मिलने के बाद से यह अदालत में पेश नहीं हुआ। जिस पर पुलिस ने 15 हजार का इनाम घोषित किया था। इस मामले में सर्वोदय सेवाश्रम के संचालक अभिमन्यु सिंह ने बताया कि यह आरोपी हरीओम महराज के नाम से रहता था लेकिन संस्था में कोई काम नहीं करता था। बेडीपुलिया के आसपास दुकानदारों के यहां जाकर साफ सफाई व सत्कर्म की बातें कर अपना भोजन पानी का इंतजाम करता था। कभी कभार उनके आश्रम में निराश्रित होने की बात कहकर सोने आता था। उसके पुराने कामों के बारे में किसी को जानकारी नहंी थी। वह यहां डेढ़ साल से आता जाता था कभी उसे ठहरने के लिए स्थाई कमरा नहीं दिया गया। बाहर सड़क किनारे के दुकानदारों से ही संपर्क में रहता था।
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