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बाढ़ के हालात बेकाबू एनडीआरएफ ने संभाला मोर्चा

Wed, 17 Aug 2016 11:02 PM IST
चित्रकूट
चित्रकूट Updated Wed, 17 Aug 2016 11:02 PM IST
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Handled the situation uncontrollable flood situation NDRF Front
सकरौंहा के बाद चमरौंहा गांव के लिए रवाना होती एनडीआरएफ की टीम। - फोटो : अमर उजाला

मंदाकिनी का रौद्र रूप दूसरे दिन और भी ज्यादा खतरनाक हो गया। खतरे के निशान से पांच मीटर ऊपर बह रही नदी ने सती अनुसूइया से लेकर बनकट मार्ग तक लगभग तीन सौ दुकानों की करोंड़ों की संपत्ति बर्बाद कर दी। मानिकपुर के कुछ गांव में बेकाबू हालात को एनडीआरएफ की टीम ने मौके पर पहुंचकर संभाला।

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बरदहा नदी के उफान के कारण टीम चमरौंहा गांव तक  नहीं पहुंच पाई लेकिन उसके पहले सकरौंहा व अन्य क्षेत्र के तीन दर्जन से अधिक ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। हाइवे किनारे भरतकूप के पास गोंडा पुलिया में गिरने से एक ग्रामीण की मौत हो गई। प्रमोद वन के पास आधा दर्जन मवेशी बह गए जिन्हें बाद में सुरक्षित निकाला गया। बाढ़ में फंसे सदर विधायक समेत अधिकारी भी सुरक्षित तहसील मुख्यालय पहुंच गए।
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बुधवार सुबह से मंदाकिनी का जलस्तर बढ़ने लगा, और दोपहर तक मंदाकिनी खतरे के निशान से पांच मीटर ऊपर पहुंच गई। रामघाट के आधे मंदिर पानी में डूब गए। स्वामी मत्गयेंद्रनाथ का द्वार पूरी तरह डूब गया।
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सीतापुर कस्बे तक पानी आने से यूपी एमपी सीमा में फंसे यात्रियों को नाव से ले जाया गया। दिनभर नदी व कस्बे में नाव चलती रही। मुख्यालय के पुलघाट के किनारे के मंदिर डूब गए व श्मशान घाट भी डूबा रहा।

बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित मानिकपुर रहा। मंगलवार को बरदहा नदी समेत आस पास के नालों में उफान आने पर पानी गांव की बस्तियों तक पहुंच गया। बुधवार को सुबह पहुंची एनडीआरएफ की टीम ने मुस्तैदी से सकरौंहा गांव व आस पास के पुरवा पहुंचकर घर की छतों व स्कूलों में डेरा जमाए लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।

इसके बाद सड़क मार्ग पर पानी ज्यादा होने से टीम चमरौहा तक नहीं पहुंच पाई। देर शाम को टीम के सदस्य दूसरे रास्ते से गांव तक आए और लोगाें को ट्रैक्टर में बैठाकर बाहर निकाला।

कबरहापुरवा गोंडा निवासी छोटेलाल (55) पुत्र बोडाराम मंगलवार शाम गांव के बाहर बने सिंहवाहिनी मंदिर से लौटते समय गोंडा पुलिया के पास नाले में गिर पड़ा। देर रात तक वह घर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने तलाश शुुरू की। चौकी प्रभारी मो. अकरम ने बताया कि बुधवार सुबह पुलिया के पास एक शव मिला।

गोंडा के ग्रामीणों से उसकी शिनाख्त कराई तो शव छोटेलाल का निकला। इसके अलावा अचानक जलस्तर बढ़ने से भरतघाट में मौजूद मुन्नीदेवी, मुन्नीलाल, दादू व शांति नाव समेत नदी में गिर गए। पास मौजूद अन्य नाविकों ने सभी को बचा लिया।

 जुलाई में चार बार मंदाकिनी व जिले की अन्य नदियों में बाढ़ जैसे हालात बने लेकिन मंगलवार को आई बाढ़ ने पिछले सारे रिकार्ड तोड़ दिए। सन 2003 में आई बाढ़ का नजारा रामघाट व सीतापुर वासियों के सामने आ गया। मत्गयेंद्रनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी विपिन तिवारी ने बताया कि इस बार की बाढ़ पहले से कुछ ही कम है।


 डीएम मोनिका रानी ने जिले के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बाढ़ की स्थिति में जिला स्तरीय अधिकारी बिना उनकी अनुमति मुख्यालय न छोड़े । इसके पूर्व डीएम ने एसपी केके चौधरी के साथ बाढ़ प्रभावित स्थानों के अलावा मानिकपुर के गांवों का निरीक्षण किया। सभी ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि हर संभव मदद की जाएगी।

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