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जिले में तीन साल के अंदर चौथे तेंदुआ की हुई मौत

Mon, 06 Jan 2020 11:45 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 06 Jan 2020 11:45 PM IST
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Fourth leopard died within three years in the district
चित्रकूट। तीन साल के अंदर जिले में चार तेंदुओं की मौत हो जाने के बाद से वनविभाग के अधिकारियोें व कर्मचारियों के क्रिया कलाप को लेकर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। जिसमें कहा जा रहा कि इतने तेंदुए मारे जाने के बाद भी आज तक वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। हर बार मात्र जांच की खानापूरी कर मामला निपटा दिया जाता है।
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तीन साल पहले रानीपुर वन्य जीव विहार क्षेत्र जंगली जानवरों के रहने के लिए सबसे अच्छा बताया जा रहा था। जिसमें तेंदुए व अन्य बडे़ जंगली जानवर रखने की बात कहीं जा रही थी। जिससे प्रदेश के लखनऊ सहित अन्य क्षेत्रों में मिलने वाले तीन तेंदुओं को रानीपुर वन्य विहार में छोड़ दिया गया था। जिसमें तीन साल के अंदर तीनों तेंदुए मारे गए। जिसमें दो तेंदुए गढ़चपा रेंज में एक तेंदुआ मानिकपुर रेंज क्षेत्र में मारा गया। एक तेंदुए को तो धारदार हथियार से मार कर हत्या की गई थी। जबकि दो तेंदुओं को रानीपुर व मझगवंा के पास करंट लगाकर मार दिया गया था। इन मामलों में कुछ ग्रामीणों को जेल भेजा गया।
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वहीं रविवार की रात को एक तेंदुआ ट्रेन से कट गया। जबकि इस तेंदुए के बारे में वन विभाग के अधिकारियों को पहले ही मालूम हो गया था कि तेंदुआ इस क्षेत्र में घूम रहा है। ग्रामीण राजेश सिंह, महेश प्रसाद, आशोक द्विवेदी, राकेश पटेल आदि का कहना कि वन अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई पहले की जाती तो तेंदुओं के मरने की घटनाएं न होतीं।
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कहीं शिकारियों ने तो नहीं मारा तेंदुआ को
मानिकपुर(चित्रकूट)। जिले के मारकुंडी रेंज के अंतर्गत मारकुंडी- टिकरिया के बीच रेल पटरी में रविवार की रात को मिले तेंदुए के शव को लेकर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। कहा जा रहा कि समझ में नहीं आ रहा कि आखिर तेंदुआ की मौत ट्रेन में कटने से कैसे हो गई। क्योंकि अगर तेंदुआ ट्रेन की चपेट में आता छिटकता, जबकि उसका धड़ पटरी के बगल में ही रखा हुआ था। कहीं शिकारियों ने तो तेंदुआ का मार तो नहीं दिया। इसके बाद बचने के लिए शव को रेल पटरी में डाल दिया।
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