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Chitrakoot News: ढह गए आशियाने... मिट्टी में ढूंढ रहे सपने

Fri, 04 Sep 2026 11:37 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट Updated Fri, 04 Sep 2026 11:37 PM IST
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Homes have crumbled... searching for dreams in the rubble.
04 सीकेटीपी-28-मकान गिरने बाद तिरपाल के नीचे बैठा संतोष का परिवार।
चित्रकूट। मंदाकिनी की हर साल बाढ़ में तबाही का मंजर झेलने वाले तरौंहा गांव में इस बार कहर एक परिवार पर ऐसा टूटा कि पूरा घर यानी छह मकान मलबा बन गए।
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परिवार के सोनी, यशवंत, संतोष, मोटू, जागेश्वर, मूलचंद्र के अलग अलग मकान थे। बाढ़ ने सभी से उनकी छत छीनकर घर जमींदोज कर दिए, लेकिन इन परिवारों का हौसला नहीं डगमगाया। जहां महिलाआें ने उन्हीं गिरे घरों में जैसे-तैसे चूल्हा जलाकर परिवार के लिए खाना पकाया और खाया। वहीं, फिलहाल तिरपाल के नीचे खुद को सुरक्षित कर उसी मिट्टी में फिर से जिंदगी के सपने गढ़ रहे हैं।
यह मकान कुशवाहा परिवार के तीन भाइयों के अलावा उनके चाचा और दादा के थे। बाढ़ का पानी उतरा तो परिवार के सामने रहने की जगह तक नहीं बची। अब कोई गिरे मकान के मलबे के बीच तो कोई तिरपाल के नीचे बच्चों के साथ रहने को मजबूर हैं।
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परिवार के लोगों का कहना है कि मकान पहले से कच्चे और जर्जर थे। आवास योजना के तहत पक्का मकान मिलने की उम्मीद में आवेदन भी किया था, लेकिन लाभ नहीं मिला। अगर समय रहते आवास मिल जाता तो शायद बाढ़ में उन्हें अपना आशियाना नहीं गंवाना पड़ता।
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परिवार के सदस्यों ने बताया कि अचानक बाढ़ का पानी बढ़ने पर सभी लोग जान बचाकर घर से बाहर निकल गए। जब वापस लौटे तो मकान पूरी तरह गिर चुका था। कुछ ही देर में उनका वर्षों पुराना आशियाना और उसमें रखा सामान बाढ़ की भेंट चढ़ गया लेकिन उनकी उम्मीदें अभी टूटी नहीं हैं। परिवार के लोग मिलकर अपना घर फिर से बनाएंगे। मलबा हटाकर जल्द साफ-सफाई करेंगे और भगवान से प्रार्थना करेंगे कि अब मंदाकिनी नदी शांत रहे।

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स्वाति की मार्कशीट मलबे में दबी, बीकॉम छात्र के दस्तावेज गायब
बाढ़ ने बच्चों की पढ़ाई पर भी असर डाला है। छात्रा स्वाति की कक्षा एक से आठ तक की मार्कशीट मकान के मलबे में दब गई है। परिवार के लोग मलबे में दस्तावेज तलाश रहे हैं। वहीं बीकॉम की पढ़ाई कर रहे वासु के जरूरी शैक्षणिक दस्तावेज भी नहीं मिल रहे हैं। अचानक आई बाढ़ में परिवार को सामान समेटने तक का मौका नहीं मिला। अब जरूरी कागजात न मिलने से बच्चों की पढ़ाई को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

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कोई लाभ नहीं मिला
तरौहा निवासी संतोष कुशवाहा ने बताया कि पहली बाढ़ में उनका मकान क्षतिग्रस्त हो गया था। पानी उतरने के बाद परिवार किसी तरह उसी घर में रहने लगा। इसके बाद अचानक दूसरी बार बाढ़ आई और कच्चा मकान पूरी तरह ढह गया। घर में रखा अनाज और गृहस्थी का पूरा सामान भी बर्बाद हो गया। कच्चा मकान होने के कारण उन्होंने आवास योजना के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक कोई लाभ नहीं मिला। मकान गिरने के बाद बच्चों के साथ तिरपाल के नीचे रहने की मजबूरी है।
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फिर से गृहस्थी जमा रहे
आनंदी प्रसाद ने बताया कि बाढ़ आने पर परिवार के लोगों ने भागकर किसी तरह अपनी जान बचाई, लेकिन मकान नहीं बचा सके। उन्होंने भी आवास योजना के लिए आवेदन किया था लेकिन अभी तक कोई लाभ नहीं मिला। अब मकान गिरने के बाद बच्चों के साथ रहने और गृहस्थी दोबारा बसाने की चिंता सामने है। घरवाले फिर से गृहस्थी जमा रहे हैं। सिर्फ हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकते हैं।
वर्जन
बाढ़ के कारण गिरे कच्चे मकानों के नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है। इसके साथ लोगों को मुआवजा भी दिया जा रहा है। राहत सामग्री लगातार वितरण हो रही है। - पुलकित गर्ग, डीएम
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बाढ़ से 220 मकानों को क्षति का भुगतान
चित्रकूट। अतिवृष्टि के कारण जिले में बाढ़ का असर अभी भी बना हुआ है। बाढ़ के दौरान रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 688 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। करीब 220 मकानों को भी नुकसान हुआ है। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इन्हें नुकसान का भुगतान किया गया है।
डीएम पुलकित गर्ग ने बताया कि बाढ़ प्रभावित लोगों को अब तक 29,695 पैकेट पका हुआ भोजन लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। जिले को 4,000 राहत किट प्राप्त हुई हैं, 2,380 राहत किट का वितरण हो चुका है। अगले दो दिनों में 2,000 और राहत किट वितरित कराने की तैयारी है।
उधर, बाढ़ से मकानों को हुए नुकसान के मामले में भी प्रशासन ने भुगतान शुरू कर दिया है। अब तक आंशिक मकान क्षति के 220 मामलों और पूर्ण मकान क्षति के एक मामले में भुगतान की कार्रवाई पूरी की गई है। इन लाभार्थियों के खातों में कुल 10 लाख पांच हजार रुपये की राशि अंतरित की जा चुकी है। प्रशासन की ओर से क्षतिग्रस्त मकानों का सर्वे, पात्र लाभार्थियों की ऑनलाइन फीडिंग और भुगतान की कार्रवाई लगातार की जा रही है।

वहीं, अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य और सीएमओ डॉ. महेंद्र कुमार त्रिपाठी ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। कर्वी के मकरी पहरा, शिवरामपुर, रामघाट रैन बसेरा, सीतापुर, तरौहा के अलावा मऊ, सेसा, सिकरो, पहाड़ी, बरेठी, मोहरवा, रानीपुर चनहाट, गंगापुरवा नखली और खरोही में टीमों ने पहुंचकर 1500 से अधिक लक्षणयुक्त मरीजों को आवश्यक दवाएं दीं। स्वास्थ्य विभाग की 30 टीमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 24 घंटे सक्रिय हैं। (संवाद)

04 सीकेटीपी-28-मकान गिरने बाद तिरपाल के नीचे बैठा संतोष का परिवार।

04 सीकेटीपी-28-मकान गिरने बाद तिरपाल के नीचे बैठा संतोष का परिवार।

04 सीकेटीपी-28-मकान गिरने बाद तिरपाल के नीचे बैठा संतोष का परिवार।

04 सीकेटीपी-28-मकान गिरने बाद तिरपाल के नीचे बैठा संतोष का परिवार।

04 सीकेटीपी-28-मकान गिरने बाद तिरपाल के नीचे बैठा संतोष का परिवार।

04 सीकेटीपी-28-मकान गिरने बाद तिरपाल के नीचे बैठा संतोष का परिवार।

04 सीकेटीपी-28-मकान गिरने बाद तिरपाल के नीचे बैठा संतोष का परिवार।

04 सीकेटीपी-28-मकान गिरने बाद तिरपाल के नीचे बैठा संतोष का परिवार।

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