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Chitrakoot News: टीकाकरण के बाद पांच साल की वृंदा की हालत बिगड़ी
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चित्रकूट। पांच साल की वृंदा को आंगनबाड़ी केंद्र में जब से एएनएम ने टीका लगाया तब से उसकी हालत बिगड़ती जा रही है। आरोप लगाया कि एएनएम की लापरवाही से उनकी बालिका अपंग होती जा रही है।
शहर के शंकर बाजार निवासी प्रदीप कुमार ने बताया कि उसकी पुत्री वृंदा के पांच साल होने पर खटकाना मोहल्ले के आंगनबाड़ी केंद्र में 27 जून को एएनएम सुमित्रादेवी ने टीकाकरण के क्रम में इंजेक्शन लगाया था। दूसरे दिन पुत्री को दर्द होने पर वह आशा अनुसुइया के साथ शहरी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे तो वहां से जिला अस्पताल रेफर किया गया। वहां भी इलाज न कर प्रयागराज रेफर कर दिया गया। चार दिन तक वह प्रयागराज के चिल्ड्रेन अस्पताल व कमला नेहरू अस्पताल में इलाज कराया लेकिन उसकी पुत्री की हालत सुधरने के बजाए बिगड़ती चली गई। अब हालत यह है कि पुत्री अपने पैर में खड़ी नहीं हो सकती।
पीडि़त पिता ने यह भी बताया कि अपंग पुत्री को गोद में लेकर वह तीन बार डीएम कार्यालय गया। लेकिन किसी अधिकारी या डॉक्टर को रहम नहीं आ रहा है।
कोट
सीएमओ डॉ. भूपेश द्विवेदी ने बताया कि मामले की जानकारी है। प्रथम जांच व पूछताछ में टीकाकरण में लापरवाही नहीं लगती है। इसके बाद भी तीन डॉक्टर की टीम बनाई गई है। पूरी जांच व पूछताछ के बाद एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट मांगी गई है। इसमें एएनएम के खिलाफ यदि लापरवाही सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी।
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शहर के शंकर बाजार निवासी प्रदीप कुमार ने बताया कि उसकी पुत्री वृंदा के पांच साल होने पर खटकाना मोहल्ले के आंगनबाड़ी केंद्र में 27 जून को एएनएम सुमित्रादेवी ने टीकाकरण के क्रम में इंजेक्शन लगाया था। दूसरे दिन पुत्री को दर्द होने पर वह आशा अनुसुइया के साथ शहरी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे तो वहां से जिला अस्पताल रेफर किया गया। वहां भी इलाज न कर प्रयागराज रेफर कर दिया गया। चार दिन तक वह प्रयागराज के चिल्ड्रेन अस्पताल व कमला नेहरू अस्पताल में इलाज कराया लेकिन उसकी पुत्री की हालत सुधरने के बजाए बिगड़ती चली गई। अब हालत यह है कि पुत्री अपने पैर में खड़ी नहीं हो सकती।
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पीडि़त पिता ने यह भी बताया कि अपंग पुत्री को गोद में लेकर वह तीन बार डीएम कार्यालय गया। लेकिन किसी अधिकारी या डॉक्टर को रहम नहीं आ रहा है।
कोट
सीएमओ डॉ. भूपेश द्विवेदी ने बताया कि मामले की जानकारी है। प्रथम जांच व पूछताछ में टीकाकरण में लापरवाही नहीं लगती है। इसके बाद भी तीन डॉक्टर की टीम बनाई गई है। पूरी जांच व पूछताछ के बाद एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट मांगी गई है। इसमें एएनएम के खिलाफ यदि लापरवाही सामने आती है तो कार्रवाई की जाएगी।
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