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कचहरी पार्क : टूटे झूले, गंदगी का जमावड़ा
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फोटो-़-8- शहर के कचहरी परिसर में बना पार्क । संवाद
- फोटो : CHITRAKOOT
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दो लाख की आबादी में पांच पार्क, वो भी बदहाल
जिला मुख्यालय कर्वी की करीब दो लाख की आबादी के लिए शहर में महज पांच पार्क हैं। इनमें से तीन पार्क कचहरी परिसर, धुस मैदान, शहीद पार्क की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। पार्क बच्चों के खेलने या बड़ों टहलने के बजाय मवेशियों के चारागाह बने हैं। गोबर-गंदगी के कारण लोगों ने आना जाना बंद कर दिया है। पौधे लगाओ हरियाली बढ़ाओ, गली-गली से कूड़ा उठाने का अभियान यहां दिखाई नहीं दे रहा है। अफसरों से कुछ पूछो तो कहते हैं पता नहीं था, अब कराता हूं। हम आपको इन पार्कों की हकीकत बताएंगे। जिम्मेदारों से जवाब भी मांगेंगे। आज पेश है कचहरी परिसर स्थित पार्क की हकीकत।
कचहरी पार्क : टूटे झूले और गंदगी
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। शहर में बच्चों खेलने के लिए कचहरी परिसर में बनाए गए पार्क की हालत बद से बदतर है। पार्क में लगे झूले टूटे पड़े हैं। जगह-जगह गंदगी है। आम लोगों ने पार्क में आना-जाना कम कर दिया तो नशेड़ियों ने अड्डा बना लिया। स्कूलों में अवकाश के दिनों में भी यहां बच्चे खेलने के लिए नहीं आते हैं।
कहचरी परिसर में 2012 में विशेष क्षेत्र प्राधिकरण के माध्यम से पार्क का निर्माण कराया गया था। बच्चों के लिए झूले लगवाए गए थे। देखभाल न करने से पार्क में झूले टूटे पड़े हैं। पार्क की चहारदीवारी में लगी जालियां भी टूट गई हैं। जगह-जगह गंदगी के कारण लोगों का बैठना मुश्किल है। अधिवक्ता भरत भूषण गुप्ता ने बताया पार्क में एक समय यहां के निवासी परिवार सहित आते थे। बच्चे झूले भी झूलते थे। तीन साल से पार्क के झूले टूटने व गंदगी होने पार्क में अब कोई नहीं आता। व्यापारी रमेश सोनी ने बताया कि देखभाल न होने से अराजकतत्व पार्क में लगे झूले तोड़ देते हैं। पालिका प्रशासन को पार्क में कर्मचारी की नियुक्ति कर देनी चाहिए।
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पार्क में लगे झूले व अन्य सामग्री की समय-समय पर मरम्मत कराई जाती है। कर्मचारी सफाई भी करते हैं। यदि कोई कमी है तो उसको सुधारा जाएगा।
- रमेश कुरील, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका
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जिला मुख्यालय कर्वी की करीब दो लाख की आबादी के लिए शहर में महज पांच पार्क हैं। इनमें से तीन पार्क कचहरी परिसर, धुस मैदान, शहीद पार्क की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। पार्क बच्चों के खेलने या बड़ों टहलने के बजाय मवेशियों के चारागाह बने हैं। गोबर-गंदगी के कारण लोगों ने आना जाना बंद कर दिया है। पौधे लगाओ हरियाली बढ़ाओ, गली-गली से कूड़ा उठाने का अभियान यहां दिखाई नहीं दे रहा है। अफसरों से कुछ पूछो तो कहते हैं पता नहीं था, अब कराता हूं। हम आपको इन पार्कों की हकीकत बताएंगे। जिम्मेदारों से जवाब भी मांगेंगे। आज पेश है कचहरी परिसर स्थित पार्क की हकीकत।
कचहरी पार्क : टूटे झूले और गंदगी
संवाद न्यूज एजेंसी
चित्रकूट। शहर में बच्चों खेलने के लिए कचहरी परिसर में बनाए गए पार्क की हालत बद से बदतर है। पार्क में लगे झूले टूटे पड़े हैं। जगह-जगह गंदगी है। आम लोगों ने पार्क में आना-जाना कम कर दिया तो नशेड़ियों ने अड्डा बना लिया। स्कूलों में अवकाश के दिनों में भी यहां बच्चे खेलने के लिए नहीं आते हैं।
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कहचरी परिसर में 2012 में विशेष क्षेत्र प्राधिकरण के माध्यम से पार्क का निर्माण कराया गया था। बच्चों के लिए झूले लगवाए गए थे। देखभाल न करने से पार्क में झूले टूटे पड़े हैं। पार्क की चहारदीवारी में लगी जालियां भी टूट गई हैं। जगह-जगह गंदगी के कारण लोगों का बैठना मुश्किल है। अधिवक्ता भरत भूषण गुप्ता ने बताया पार्क में एक समय यहां के निवासी परिवार सहित आते थे। बच्चे झूले भी झूलते थे। तीन साल से पार्क के झूले टूटने व गंदगी होने पार्क में अब कोई नहीं आता। व्यापारी रमेश सोनी ने बताया कि देखभाल न होने से अराजकतत्व पार्क में लगे झूले तोड़ देते हैं। पालिका प्रशासन को पार्क में कर्मचारी की नियुक्ति कर देनी चाहिए।
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पार्क में लगे झूले व अन्य सामग्री की समय-समय पर मरम्मत कराई जाती है। कर्मचारी सफाई भी करते हैं। यदि कोई कमी है तो उसको सुधारा जाएगा।
- रमेश कुरील, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका