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चित्रकूट: धान की फसल में झुलसा रोग लगने से किसानों को हो रहा नुकसान

Wed, 07 Oct 2020 11:36 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 07 Oct 2020 11:36 PM IST
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Farmers suffering losses due to scorching disease in paddy crop
चित्रकूट। कृषि विभाग की टीम ने पहाड़ी क्षेत्र सहित मऊ क्षेत्रों के गांवों का दौराकर खेतों का सर्वेक्षण किया। इस दौरान टीम ने किसानों को कीट से फसल बचाने की जानकारी दी। बताया कि धान की फसल में झुलसा रोग, पत्ती लपेदक, गंधी बग व छेदक कीट लगने से किसानों को नुकसान हो रहा है।
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जिला कृषि रक्षा अधिकारी धर्मेंद्र कुमार अवस्थी व डॉ. समीर प्रताप सिंह ने पहाड़ी क्षेत्र के बाबूपुर, पहाड़ी, राजापुर व मऊ क्षेत्र के गांवों का दौरा कर खेतों में लगी फसल का सर्वेक्षण किया। इस दौरान धान की फसल में कीट पाए गए।
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उन्होंने झुलसा रोग से फसल बचाने के लिए स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 15 ग्राम व कापर आक्सीक्लोराइड पांच सौ ग्राम हेक्टेयर की दर से छह सौ लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी।
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पत्ती लपेदक व गंधी बग कीट के नियंत्रण के लिए क्यूनालफास 25 प्रतिशत, 1.25 लीटर प्रति हेक्टेयर छह सौ लीटर पानी में घोलकर छिड़काव कराने का सुझाव दिया।
तना छेदक कीट के नियंत्रण के लिए फिप्रेनिल 3जी, आठ किलो ग्राम प्रति एकड़ की दर से पानी मिलाकर छिड़काव करने की जानकारी दी। कहा छिड़काव करते समय पूरे शरीर को ढकें और आंखों में चश्मा लगाएं।
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