{"_id":"38c06941be93a69459aa67020cc78f05","slug":"farmers-described-the-new-technology-of-cultivation-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"किसानों को बताई खेती की नई तकनीक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
किसानों को बताई खेती की नई तकनीक
ब्यूरो/अमर उजाला, चित्रकूट
Updated Sat, 13 Jun 2015 10:45 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दीनदयाल शोध संस्थान कृषि विज्ञान केंद्र, मझगवां में
विज्ञापन
रामपुरबाघेलान ब्लाक के अबेर गांव के किसानों को खेती की नई तकनीक बताई
गई। वैज्ञानिकों ने कहा कि आधुनिक तकनीक से किसानों को अच्छी और गुणवत्ता
वाली फसल मिलेगी।
शुभारंभ केंद्र के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. राजेंद्र सिंह नेगी ने पं. दीनदयाल उपाध्याय एवं नानाजी देशमुख के चित्र के सामने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। पहले सत्र में फसल वैज्ञानिक डॉ. श्याम सुंदर कौशिक ने खरीफ की फसलाें में अरहर की रोपा पद्धति उत्पादन तकनीक, धान की मेडागास्कर उत्पादन पद्धति तकनीक की जानकारी दी।
उन्होंने किसानों के सवालों का जवाब भी दिया। खेत से मिट्टी का नमूना एकत्र करने, अरहर रोपण तकनीक के लिए पॉलीथिन में बीजों की बुवाई एवं देखरेख, बीजोपचार की तकनीकी एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण किसानों को दिया।
द्वितीय सत्र में कार्यक्रम समन्वयक एवं उद्यान वैज्ञानिक डॉ. आरएस नेगी ने सब्जी और मसाला फसलों की नर्सरी एवं नए फल वृक्षों का विकास एवं करैला की फसल के विषय में विस्तृत रूप से तकनीकी जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने किसानों को खेती को लाभकारी बनाने के बारे में बारीकी से जानकारी दी।
किसानों को अरहर (राजीव लोचन) धान-बासमती पूसा 1509 के साथ-साथ सब्जियों और मसाला फसलों के बीज जैसे करेला अमनश्री, धनिया पंत हरीतिमा एवं उपयोगी साहित्य उपलब्ध कराया गया।
शुभारंभ केंद्र के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. राजेंद्र सिंह नेगी ने पं. दीनदयाल उपाध्याय एवं नानाजी देशमुख के चित्र के सामने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। पहले सत्र में फसल वैज्ञानिक डॉ. श्याम सुंदर कौशिक ने खरीफ की फसलाें में अरहर की रोपा पद्धति उत्पादन तकनीक, धान की मेडागास्कर उत्पादन पद्धति तकनीक की जानकारी दी।
उन्होंने किसानों के सवालों का जवाब भी दिया। खेत से मिट्टी का नमूना एकत्र करने, अरहर रोपण तकनीक के लिए पॉलीथिन में बीजों की बुवाई एवं देखरेख, बीजोपचार की तकनीकी एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण किसानों को दिया।
द्वितीय सत्र में कार्यक्रम समन्वयक एवं उद्यान वैज्ञानिक डॉ. आरएस नेगी ने सब्जी और मसाला फसलों की नर्सरी एवं नए फल वृक्षों का विकास एवं करैला की फसल के विषय में विस्तृत रूप से तकनीकी जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने किसानों को खेती को लाभकारी बनाने के बारे में बारीकी से जानकारी दी।
किसानों को अरहर (राजीव लोचन) धान-बासमती पूसा 1509 के साथ-साथ सब्जियों और मसाला फसलों के बीज जैसे करेला अमनश्री, धनिया पंत हरीतिमा एवं उपयोगी साहित्य उपलब्ध कराया गया।