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मेला लगा, दान से अर्जित पुण्य
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फोटो-4- मकर संक्राति पर मंदाकिनी में स्नान के बाद रामघाट पर दान व पूजन करते भक्तगण। संवाद
- फोटो : CHITRAKOOT
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चित्रकूट। मकर संक्रांति का पर्व नक्षत्रों के अनुसार जिले में दूसरे दिन शनिवार को भी मनाया गया। हजारों श्रद्धालुओं ने सुबह से ही मंदाकिनी नदी ने स्नान कर तिल, खिचडी का दान किया। पर्व के मद्देनजर विभिन्न स्थानों पर मेला का लोगों ने आनन्द उठाया। श्रद्धालुओं ने तीर्थ स्थलों में जाकर खिचडी दान दिया।
जिले में शुक्रवार को भी मकर संक्त्रसंति पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया था लेकिन शनिवार को भी यह क्रम जारी रहा। तीर्थ क्षेत्र में देवगंगा मंदाकिनी तट पर हजारों श्रद्धालुओं ने स्नान कर पुरोहितों को तिल और खिचड़ी का दान देने के बाद मत्यगयेन्द्र नाथ शंकर भगवान का जलाभिषेक किया। कामदगिरि के दर्शन कर परिक्त्रस्मा लगायी। इसी क्त्रस्म में मुख्यालय के विभिन्न नदी घाटों में नगरवासियों ने स्नान कर मेले का लुत्फ उठाया।
भरतकूप स्थित पवित्र कूप में जहां समस्त तीर्थों का जल है वहां चित्रकूट सहित अन्य कई जिलों के श्रद्धालुओं ने स्नान कर मकर संक्त्रसंति पर्व मनाया। यहां विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। मेले के दौरान विभिन्न संस्कृतियों का मिलन होता है। पहाड़ी के साईपुर की मजार में भी श्रद्धालुओं की सुबह से शाम तक भीड़ रही।
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हिंदूु-मुस्लिम समुदाय के लोगों ने रीतिरिवाज व आपसी भाईचारा के साथ पर्व मनाया।इसी प्रकार अनुसुइया आश्रम, गुप्त गोदावरी, जानकीकुण्ड, स्फटिक शिला, हनुमान धारा, देवांगना, कोटतीर्थ, सूर्यकुण्ड आदि स्थानों समेत जिले के बरगढ़, शिवरामपुर, खोही, पहाडी, राजापुर, मानिकपुर, मऊ आदि तीर्थ स्थानों पर भारी तादाद में लोगों का जमावड़ा रहा। क्षेत्रों में लगने वाले मेले में लोगों ने विभिन्न प्रकार के सामग्रियों की खरीदारी की।
भागवत प्रवक्ता आचार्य नवलेश दीक्षित ने बताया कि मकर संक्त्रसंति का पर्व दान और दया के भाव को एक-दूसरे में स्थापित करता है। उन्होंने बताया कि हिन्दू धर्म की मान्यता अनुसार मकर संक्त्रसंति पर्व मोक्षदायी कहा जाता है। इस पर्व पर दान, स्नान व सूर्य उपासना के रूप में मकर संक्त्रसति मनाने की मान्यता है।
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जिले में शुक्रवार को भी मकर संक्त्रसंति पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया था लेकिन शनिवार को भी यह क्रम जारी रहा। तीर्थ क्षेत्र में देवगंगा मंदाकिनी तट पर हजारों श्रद्धालुओं ने स्नान कर पुरोहितों को तिल और खिचड़ी का दान देने के बाद मत्यगयेन्द्र नाथ शंकर भगवान का जलाभिषेक किया। कामदगिरि के दर्शन कर परिक्त्रस्मा लगायी। इसी क्त्रस्म में मुख्यालय के विभिन्न नदी घाटों में नगरवासियों ने स्नान कर मेले का लुत्फ उठाया।
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भरतकूप स्थित पवित्र कूप में जहां समस्त तीर्थों का जल है वहां चित्रकूट सहित अन्य कई जिलों के श्रद्धालुओं ने स्नान कर मकर संक्त्रसंति पर्व मनाया। यहां विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। मेले के दौरान विभिन्न संस्कृतियों का मिलन होता है। पहाड़ी के साईपुर की मजार में भी श्रद्धालुओं की सुबह से शाम तक भीड़ रही।
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हिंदूु-मुस्लिम समुदाय के लोगों ने रीतिरिवाज व आपसी भाईचारा के साथ पर्व मनाया।इसी प्रकार अनुसुइया आश्रम, गुप्त गोदावरी, जानकीकुण्ड, स्फटिक शिला, हनुमान धारा, देवांगना, कोटतीर्थ, सूर्यकुण्ड आदि स्थानों समेत जिले के बरगढ़, शिवरामपुर, खोही, पहाडी, राजापुर, मानिकपुर, मऊ आदि तीर्थ स्थानों पर भारी तादाद में लोगों का जमावड़ा रहा। क्षेत्रों में लगने वाले मेले में लोगों ने विभिन्न प्रकार के सामग्रियों की खरीदारी की।
भागवत प्रवक्ता आचार्य नवलेश दीक्षित ने बताया कि मकर संक्त्रसंति का पर्व दान और दया के भाव को एक-दूसरे में स्थापित करता है। उन्होंने बताया कि हिन्दू धर्म की मान्यता अनुसार मकर संक्त्रसंति पर्व मोक्षदायी कहा जाता है। इस पर्व पर दान, स्नान व सूर्य उपासना के रूप में मकर संक्त्रसति मनाने की मान्यता है।