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डीआईजी की पूछताछ में रो पड़े पांचों बंदी
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चित्रकूट। जिला जेल में 14 मई को हुए खूनी खेल मामले की छठवें दिन डीआईजी जेल और पुलिस ने विवेचना की। बुधवार को जब पांच बंदियों के बयान दर्ज किए जाने लगे तो डर के मारे रो पड़े।
डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी ने बुधवार को फिर से उन बंदियों से बातचीत की, जिन्हें शूटआउट के दौरान शार्प शूटर अंशू दीक्षित ने बंधक बनाकर पुलिस के खिलाफ ढाल बनाया था। हाई सिक्योरिटी और आइसोलेट बैरक के इन बंदियों से कोतवाली पुलिस टीम ने भी बयान लिए। लगभग एक घंटे की बातचीत में जैसे ही अधिकारी ने वीडियो रिकार्डिंग कर बयान दर्ज करने का प्रयास किया तो दो बंदी रोने लगे। एक अधिकारी ने बताया कि बंदियों ने कहा कि साहब हमने तो सोचा कि अब जिंदगी खत्म हो गई, कोई नहीं बचा सकता। बदमाश की गोली से मारे जाएं अथवा पुलिस की गोली से, मौत निश्चित है। उस मंजर को याद कर सिहर जाते हैं। बस भगवान ने ही हमें बचाया है। सूत्रों के अनुसार मुठभेड़ के दौरान पुलिस की टीम अंशू दीक्षित से करीब सौ मीटर की दूरी बनाकर दीवार की आड़ में खड़ी थी। इसी बीच अंशू के चंगुल से छूटकर एक बंदी जब बैरक से बाहर निकला तो उसे किसी तरह इशारा करके बुलाया गया। यह बंदी हाथ ऊपर कर दौड़कर आया और आते ही जमीन पर बैठ गया। वह दहशत में था, उसका शरीर कांप रहा था। काफी देर तक वह कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं था। पूछताछ में इन बंदियों ने पूरी घटना को डरते-डरते बयां किया।
सुबह बंदियों को मुर्गा बनाकर दी थी गाली
जेल परिसर में 14 मई को गैंगवार के पूर्व सुबह जब बंदी नित्य क्रिया और नाश्ते के लिए बाहर आए तो शार्प शूटर अंशू दीक्षित का नंगा नाच शुरू हो गया था, वहां मौजूद बंदीरक्षकों और सुरक्षाकर्मियों ने उसे रोकने का प्रयास नहीं किया। न ही किसी अधिकारी को इसकी जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार अंशू ने दस बंदियों को पिस्टल लहराते हुए अपने बैरक के पास रोका था और सभी को मुर्गा बनाकर गाली देते हुए पैर से मारा भी था। इसके बाद वह जब बैरक में गया तो बंदी जल्दी से नाश्ता लेकर अपनी-अपनी बैरक की ओर जाने लगे थे।
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तीन नये बंदीरक्षक नियुक्त
जेल में खूनी खेल के दौरान जेल के अधिकारियों के साथ ही बंदीरक्षकों की मुख्य भूमिका सामने आई है। एक कोरोना पॉजिटिव बंदीरक्षक की बिना डयूटी मौजूदगी कई सवाल उठा रही है। प्रथम दृष्टया दो बंदीरक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। बुधवार को जिला जेल में तीन नए बंदीरक्षकों की तैनाती कर दी गई है। जेल परिसर के सीसीटीवी कैमरों के खराब होने की जांच पूरी कर टीम लखनऊ लौट गई है। इसकी शासन को रिपोर्ट भेजी गई है।
14 मई को दो बदमाश मेराज और मुकीम को मारने के बाद अपराधी अंशू को पुलिस टीम के मार गिराने की घटना में शासन ने जेल अधीक्षक, जेलर, दो बंदीरक्षक और एक पीएसी जवान को निलंबित कर दिया है। दो अन्य बंदीरक्षक पीडी पाल और जगमोहन की भूमिका की जांच जारी है। बंदियों के कारखास का भी इसमें महत्वपूर्ण रोल होने पर जांच टीम के सामने दो बार पेश किया जा चुका है। जेल अधीक्षक अशोक कुमार सागर ने बताया कि झांसी से दो व खीरी से एक बंदीरक्षक स्थानांतरित होकर चित्रकूट आए हैं। तीनों ने कार्यभार ग्रहण कर ड्यूटी शुरू कर दी है। बताया कि सीसीटीवी कैमरे की वर्तमान हालत की जांच करने आई लखनऊ की टीम जांच पूरी कर लौट गई है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।
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डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी ने बुधवार को फिर से उन बंदियों से बातचीत की, जिन्हें शूटआउट के दौरान शार्प शूटर अंशू दीक्षित ने बंधक बनाकर पुलिस के खिलाफ ढाल बनाया था। हाई सिक्योरिटी और आइसोलेट बैरक के इन बंदियों से कोतवाली पुलिस टीम ने भी बयान लिए। लगभग एक घंटे की बातचीत में जैसे ही अधिकारी ने वीडियो रिकार्डिंग कर बयान दर्ज करने का प्रयास किया तो दो बंदी रोने लगे। एक अधिकारी ने बताया कि बंदियों ने कहा कि साहब हमने तो सोचा कि अब जिंदगी खत्म हो गई, कोई नहीं बचा सकता। बदमाश की गोली से मारे जाएं अथवा पुलिस की गोली से, मौत निश्चित है। उस मंजर को याद कर सिहर जाते हैं। बस भगवान ने ही हमें बचाया है। सूत्रों के अनुसार मुठभेड़ के दौरान पुलिस की टीम अंशू दीक्षित से करीब सौ मीटर की दूरी बनाकर दीवार की आड़ में खड़ी थी। इसी बीच अंशू के चंगुल से छूटकर एक बंदी जब बैरक से बाहर निकला तो उसे किसी तरह इशारा करके बुलाया गया। यह बंदी हाथ ऊपर कर दौड़कर आया और आते ही जमीन पर बैठ गया। वह दहशत में था, उसका शरीर कांप रहा था। काफी देर तक वह कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं था। पूछताछ में इन बंदियों ने पूरी घटना को डरते-डरते बयां किया।
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सुबह बंदियों को मुर्गा बनाकर दी थी गाली
जेल परिसर में 14 मई को गैंगवार के पूर्व सुबह जब बंदी नित्य क्रिया और नाश्ते के लिए बाहर आए तो शार्प शूटर अंशू दीक्षित का नंगा नाच शुरू हो गया था, वहां मौजूद बंदीरक्षकों और सुरक्षाकर्मियों ने उसे रोकने का प्रयास नहीं किया। न ही किसी अधिकारी को इसकी जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार अंशू ने दस बंदियों को पिस्टल लहराते हुए अपने बैरक के पास रोका था और सभी को मुर्गा बनाकर गाली देते हुए पैर से मारा भी था। इसके बाद वह जब बैरक में गया तो बंदी जल्दी से नाश्ता लेकर अपनी-अपनी बैरक की ओर जाने लगे थे।
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तीन नये बंदीरक्षक नियुक्त
जेल में खूनी खेल के दौरान जेल के अधिकारियों के साथ ही बंदीरक्षकों की मुख्य भूमिका सामने आई है। एक कोरोना पॉजिटिव बंदीरक्षक की बिना डयूटी मौजूदगी कई सवाल उठा रही है। प्रथम दृष्टया दो बंदीरक्षकों को निलंबित कर दिया गया है। बुधवार को जिला जेल में तीन नए बंदीरक्षकों की तैनाती कर दी गई है। जेल परिसर के सीसीटीवी कैमरों के खराब होने की जांच पूरी कर टीम लखनऊ लौट गई है। इसकी शासन को रिपोर्ट भेजी गई है।
14 मई को दो बदमाश मेराज और मुकीम को मारने के बाद अपराधी अंशू को पुलिस टीम के मार गिराने की घटना में शासन ने जेल अधीक्षक, जेलर, दो बंदीरक्षक और एक पीएसी जवान को निलंबित कर दिया है। दो अन्य बंदीरक्षक पीडी पाल और जगमोहन की भूमिका की जांच जारी है। बंदियों के कारखास का भी इसमें महत्वपूर्ण रोल होने पर जांच टीम के सामने दो बार पेश किया जा चुका है। जेल अधीक्षक अशोक कुमार सागर ने बताया कि झांसी से दो व खीरी से एक बंदीरक्षक स्थानांतरित होकर चित्रकूट आए हैं। तीनों ने कार्यभार ग्रहण कर ड्यूटी शुरू कर दी है। बताया कि सीसीटीवी कैमरे की वर्तमान हालत की जांच करने आई लखनऊ की टीम जांच पूरी कर लौट गई है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।