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Chitrakoot News: नहीं मिली राहत सजा व अर्थदंड बरकरार
Wed, 02 Aug 2023 01:10 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
संवाद न्यूज एजेंसी, चित्रकूट
Updated Wed, 02 Aug 2023 01:10 AM IST
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चित्रकूट। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने आरोपी प्रबंधक को मिली सजा के निर्णय के खिलाफ की गई दांडिक अपील को खारिज कर दिया गया है।
संयुक्त निदेशक अभियोजन ज्ञानेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि कर्वी कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत एचडीएफसी बैंक के ऊपर भवन में रोज वैली ग्रुप आफ कंपनीज का कार्यालय खुला था। जिसमें प्रबंधक कालूपुर निवासी शारदा प्रसाद उर्फ शरद साहू ने 18 फरवरी 2014 को कर्वी कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। जिसमें शाखा से 25 लाख पांच हजार 885 रुपये चोरी हुए जाने का मामला बताया गया था। जिसके बाद विवेचना के दौरान यह बात सामने आई कि शाखा प्रबंधक ने स्वयं पैसे का गबन कर लिया गया है और लोगों को गुमराह करने के लिए स्वयं मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। जिसके बाद पुलिस ने इस मामले में वादी मुकदमा शारदा प्रसाद के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
बचाव और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सूर्यकांत धर दुबे ने इस मामले में 21 अप्रैल 2023 को निर्णय सुनाया था। जिसमें दोष सिद्ध होने पर तीन वर्ष के कारावास की सजा और 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इस मामले में आरोपी द्वारा दांडिक अपील की गई थी। जिसमें अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीरज श्रीवास्तव ने बचाव और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद निर्णय सुनाया। जिसमें मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित निर्णय में किसी प्रकार की कोई विधिक त्रुटि नहीं पाए जाने पर आरोपी को दी गई सजा का निर्णय बहाल रखा गया। साथ ही दांडिक अपील खारिज कर दी गई।
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संयुक्त निदेशक अभियोजन ज्ञानेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि कर्वी कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत एचडीएफसी बैंक के ऊपर भवन में रोज वैली ग्रुप आफ कंपनीज का कार्यालय खुला था। जिसमें प्रबंधक कालूपुर निवासी शारदा प्रसाद उर्फ शरद साहू ने 18 फरवरी 2014 को कर्वी कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। जिसमें शाखा से 25 लाख पांच हजार 885 रुपये चोरी हुए जाने का मामला बताया गया था। जिसके बाद विवेचना के दौरान यह बात सामने आई कि शाखा प्रबंधक ने स्वयं पैसे का गबन कर लिया गया है और लोगों को गुमराह करने के लिए स्वयं मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। जिसके बाद पुलिस ने इस मामले में वादी मुकदमा शारदा प्रसाद के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
बचाव और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सूर्यकांत धर दुबे ने इस मामले में 21 अप्रैल 2023 को निर्णय सुनाया था। जिसमें दोष सिद्ध होने पर तीन वर्ष के कारावास की सजा और 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इस मामले में आरोपी द्वारा दांडिक अपील की गई थी। जिसमें अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीरज श्रीवास्तव ने बचाव और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद निर्णय सुनाया। जिसमें मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा पारित निर्णय में किसी प्रकार की कोई विधिक त्रुटि नहीं पाए जाने पर आरोपी को दी गई सजा का निर्णय बहाल रखा गया। साथ ही दांडिक अपील खारिज कर दी गई।
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