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गांवों के उत्थान से होगा देश का विकास
ब्यूरो/अमर उजाला, चित्रकूट
Updated Fri, 24 Feb 2017 10:43 PM IST
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ग्रामोदय मेले में राजस्थान नृत्य प्रस्तुत करते कलाकार
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय एवं नानाजी देशमुख क ी जन्मशताब्दी के अवसर पर चार दिवसीय मेले का आयोजन किया गया। इसमें देश के कई हिस्सों से आए कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां कर दर्शकों का मन मोह लिया।
धर्मनगरी के स्फटिक शिला के पास उद्यमिता विद्यापीठ में शुक्रवार को चार दिवसीय ग्रामोदय मेले का उद्घाटन बिहार के राज्यपाल कोविद ने किया। उन्होंने कहा कि एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल चिंतन में हमेशा ही ग्रामों का उत्थान रहा है। चित्रकूट की भूमि पर नानाजी देशमुख ने दीनदयाल के सपने को धरती पर उतारा है।
कार्यक्रम में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के केंद्रीय मंत्री थावरचन्द्र गहलोत ने कहा पंडित उपाध्याय ने एकात्म मानववाद रूपी एक चिंतन समाज को दिया। नानाजी ने वसुधैव कुटुम्बकम की अपनी वृत्ति के आधार पर साकार रूप दिया। केंद्रीय राज्य मंत्री सुदर्शन भगत ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भारत माता से यदि माता शब्द हटा
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दिया जाए तो भारत केवल एक भूखंड मात्र रह जायेगा। कार्यक्त्रस्म को सांसद प्रभात झा ने भी संबोधित किया। संरक्षक दीनदयाल शोधसंस्थान एवं संघ के वरिष्ठ प्रचारक मदनदास देवी, नारायण कबीरपंथी, गणेश सिंह सांसद सतना,,डॉ. वी.के. जैन, पूर्व सांसद रमेश चंद्र द्विवेदी, आरके पटेल, प्रो. बी के कुठियाला, रानीदुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कपिलदेव मिश्र, महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरेश चंद्र गौतम, विकलांग विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. योगेश चंद्र दुबे, अभय महाजन व संतोष मिश्रा आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव अतुल जैन ने किया।
मेले में हरियाणा, झारखंड, बिहार, कर्नाटक आदि राज्यों के कलाकारों ने प्रतिभा दिखाई और प्रदर्शनी लगाई। प्रदर्शनी में कुरुक्षेत्र हरियाणा के करमवीर सिंह अपने विश्व विख्यात भैंसा युवराज को लेकर आए। इस भैंस की कीमत नौ करोड़ है। जो पूरे मेले का आकर्षण का केंद्र रहा।
चित्रकूट में लघु भारत का दर्शन ग्रामोदय मेले में भारत के कई हिस्सों से सांस्कृतिक प्रस्तुतियां किया। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के 250 लोक कलाकारों ने सुबह कई मंडलियों ने संस्कृति की छटा पूरे नगर में बिखेर दी। रामघाट से जानकी कुंड तक निकाली शोभायात्रा निकाली गई। मालिनी अवस्थी का कार्यक्त्रस्म 25 फरवरी को ग्रामोदय मेले में किया जाएगा।
धर्मनगरी के स्फटिक शिला के पास उद्यमिता विद्यापीठ में शुक्रवार को चार दिवसीय ग्रामोदय मेले का उद्घाटन बिहार के राज्यपाल कोविद ने किया। उन्होंने कहा कि एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल चिंतन में हमेशा ही ग्रामों का उत्थान रहा है। चित्रकूट की भूमि पर नानाजी देशमुख ने दीनदयाल के सपने को धरती पर उतारा है।
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कार्यक्रम में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के केंद्रीय मंत्री थावरचन्द्र गहलोत ने कहा पंडित उपाध्याय ने एकात्म मानववाद रूपी एक चिंतन समाज को दिया। नानाजी ने वसुधैव कुटुम्बकम की अपनी वृत्ति के आधार पर साकार रूप दिया। केंद्रीय राज्य मंत्री सुदर्शन भगत ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भारत माता से यदि माता शब्द हटा
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दिया जाए तो भारत केवल एक भूखंड मात्र रह जायेगा। कार्यक्त्रस्म को सांसद प्रभात झा ने भी संबोधित किया। संरक्षक दीनदयाल शोधसंस्थान एवं संघ के वरिष्ठ प्रचारक मदनदास देवी, नारायण कबीरपंथी, गणेश सिंह सांसद सतना,,डॉ. वी.के. जैन, पूर्व सांसद रमेश चंद्र द्विवेदी, आरके पटेल, प्रो. बी के कुठियाला, रानीदुर्गावती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कपिलदेव मिश्र, महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरेश चंद्र गौतम, विकलांग विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. योगेश चंद्र दुबे, अभय महाजन व संतोष मिश्रा आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव अतुल जैन ने किया।
मेले में हरियाणा, झारखंड, बिहार, कर्नाटक आदि राज्यों के कलाकारों ने प्रतिभा दिखाई और प्रदर्शनी लगाई। प्रदर्शनी में कुरुक्षेत्र हरियाणा के करमवीर सिंह अपने विश्व विख्यात भैंसा युवराज को लेकर आए। इस भैंस की कीमत नौ करोड़ है। जो पूरे मेले का आकर्षण का केंद्र रहा।
चित्रकूट में लघु भारत का दर्शन ग्रामोदय मेले में भारत के कई हिस्सों से सांस्कृतिक प्रस्तुतियां किया। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के 250 लोक कलाकारों ने सुबह कई मंडलियों ने संस्कृति की छटा पूरे नगर में बिखेर दी। रामघाट से जानकी कुंड तक निकाली शोभायात्रा निकाली गई। मालिनी अवस्थी का कार्यक्त्रस्म 25 फरवरी को ग्रामोदय मेले में किया जाएगा।