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Chitrakoot News: वरिष्ठ कोषाधिकारी की संपत्ति का जुटाया जा रहा ब्योरा

Mon, 01 Dec 2025 11:57 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 01 Dec 2025 11:57 PM IST
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Details of the assets of the senior treasury officer are being collected
कोषागार घोटाला
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आलीशान कोठी की जानकारी जुटाने लखनऊ गए दो पुलिसकर्मी
सुधीर अग्रवाल
चित्रकूट। कोषागार घोटाला में एसआईटी ने पेंशनर व बिचौलियों के अलावा अब विभागीय अधिकारियों की भूमिका कई जगह संदिग्ध माना। ऐसे में अब टीम ने इनकी जांच शुरू की है। खासकर इनकी संपत्ति, विभागीय पासवर्ड, पटल से भुगतान और डिजिटल हस्ताक्षर को लेकर कई बार गडबड़ी पर जांच तेज की है।
अब कुछ और कर्मचारी और अधिकारी जांच की जद में हैं। इन सभी से भी संपत्ति का ब्योरा मांगा गया है। साथ ही वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह की संपत्ति का ब्यौरा एकत्र करने के लिए दो पुलिसकर्मी लखनऊ भी गए हैं। टीम वहां पर इनके आलीशान कोठी बनने की जानकारी जुटाने गई है।
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43.13 करोड़ के कोषागार घोटाला मामले में फिलहाल अपराध अनुसंधान संगठन लखनऊ ,आर्थिक अपराध शाखा (ईओ डब्ल्यू) व साइबर विशेषज्ञों से जांच कराने की संभावना पर सोमवार को कुछ भी विभागीय व एसआईटी जांच के दौरान चर्चा नहीं रही। जानकारों का मानना है कि एसआईटी ही फिलहाल जांच करेगी और इसकी रिपोर्ट के बाद आगे ईओ डब्ल्यू तफ्तीश कर सकता है।
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जांच में पेंशनर व बिचौलियों के अब एसआईटी की जांच में वरिष्ठ कोषाधिकारी से लेकर विभाग के अन्य कर्मचारी व अधिकारी आ गए हैं। तीन अकाउंटेंट राजबहादुर, योगेंद्र व राजेश द्वारा अपने डिजिटल हस्ताक्षर, पासवर्ड व पटल से भुगतान को लेकर कई बार अपना पल्ला झाड़कर नामजद अधिकारियों पर ठीकरा फोड़ने का प्रयास किया। कई बार तो भुगतान का विवरण न मिलने पर वरिष्ठ कोषाधिकारी की भूमिका पर भी जांच टीम ने संदेह व्यक्त किया।
पहले नामजद विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों की संपत्ति का आधा अधूरा ब्योरा मिला है। किसी ने भी अभी तक पूरा रिकार्ड नहीं दिया है। इसके लिए डीएम पुलकित गर्ग ने भी उपनिबंधक कार्यालय को आदेश दिया है कि इन सभी अधिकारियों की संपत्ति की खरीद बिक्री का ब्योरा दिया जाए। इस आदेश के 15 दिन भी हो चुके हैं, लेकिन पूरा रिकार्ड नहीं मिला है।
जानकारी के अनुसार वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह की संपत्ति का ब्योरा एकत्र करने के लिए दो पुलिस कर्मी लखनऊ भी गए हैं। वहां इनका आलीशान घर बनने की जानकारी पर टीम भेजी गई है।
कोषागार घोटाला मामले में जेल में बंद पेंशनर व बिचौलियों में किसी की भी जमानत याचिका पर अदालत मेंं सुनवाई नहीं हुई है। जिला शासकीय अधिवक्ता श्यामसुंदर मिश्रा ने बताया कि कोई नई जमानत याचिका भी नहीं डाली गई है। (संवाद)
दस अकाउंट के नंबर बदलकर आठ करोड़ का खेल
कोषागार विभाग के घोटाला मामले में दस ऐसे खातों का संचालन मिला है जिनके खाता नंबर बदलकर दस करोड़ से अधिक धनराशि भेजी गई है। इसमें कुछ पेंशनर की मृत्यु होने के बाद बैंक खाता नंबर बदलकर पेंशन व एरियर की धनराशि भेजी जाती रही है। खास बात यह है कि इन खातों का संचालन पेंशनर के ही पुत्र या अन्य परिजन करते रहे। एसआईटी प्रभारी सीओ अरविंद वर्मा ने बताया कि जांच तो सभी खातों की हो रही है। इन दस खातों में दूसरे बैंक में खाता नंबर बदलकर धनराशि भेजी गई। इसके बाद अधिकारी कर्मचारी बिचौलिया सभी ने मिलकर बंदरबांट किया है। पूरी जांच जारी है। अभी कुछ कह पाना जल्दबाजी होगी। जांच सही दिशा में बढ़ रही है।



वर्जन
घोटाले में विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच जारी है। पेंशनर बिचौलियों व अन्य नामजदों की जांच लगभग पूरी होने वाली है। रिकवरी भी नहीं हो रही है। फाइलों व खातों का मिलान हो चुका है। इसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी। किसी भी नामजद पेंशनर, बिचौलिया या विभागीय अधिकारी कर्मचारी को छोड़ा नहीं जाएगा।-अरुण कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक
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