फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Chitrakoot News ›   culture,ramayan mela,katha

रामचरित मानस न होती तो लोप हो जाते आदर्श व सिद्धांत

Tue, 12 Apr 2022 11:00 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 12 Apr 2022 11:00 PM IST
विज्ञापन
culture,ramayan mela,katha
चित्रकूट। राष्ट्रीय रामायण मेला में मंगलवार को प्रथम सत्र के दौरान राम कथा मर्मज्ञों ने रामचरित मानस की उपयोगिता और राष्ट्रहित में योगदान को बताया। बताया कि श्रीराम वनवास काल के दौरान चित्रकूट परिक्षेत्र में न आए होते तो इस परिक्षेत्र के लोग संस्कृति, संस्कारों में और भी पिछड़ जाते।
विज्ञापन

गोष्ठी के प्रथम सत्र में रामायणी जयपाल सिंह ने कहा कि यदि भगवान राम की कथा न गई लिखी होती तो जीवन के आदर्श और मर्यादाओं, सिद्धांतों का लोप हो जाता। तुलसी दास ने संस्कृति-शिष्टाचार का मार्मिक ढंग से वर्णन किया है।
विज्ञापन

आकाशवाणी छतरपुर के वक्ता पं. जगप्रसाद तिवारी ने कहा कि यदि हमें जीवन जीना है, तो रामचरितमानस का अध्ययन करना होगा।
द्वितीय सत्र में साहित्यकार डॉ. चंद्रिका प्रसाद दीक्षित ने बताया कि गोस्वामी तुलसी दास की एक दुर्लभ शगुन सुमंगल रामायण मिली है। हस्त निर्मित है। इसमें सात सर्ग हैं। शगुन सुमंगल रामायण में यह भी बताया गया है कि तुलसी का कानन शगुन रूप में दिख जाए तो रामभक्ति का मनोरथ पूर्ण होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रामायण मेला समिति के उपमंत्री व सामाजिक समिति के चिंतक प्रद्मुन कुमार दुबे ने कहा कि भगवान राम का अवतरण सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन में एक नई क्रांति का संचार करने वाला है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed