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चित्रकूटः अन्ना मवेशियों से बचाई फसल बाढ़ ले डूबी
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राजापुर। राजापुर तहसील के यमुना तटीय गांवों में अन्ना मवेशियों से जैसे-तैसे बचाई गई फसल बाढ़ ने बर्बाद कर दी। धान व तिलहन की फसल सब पानी में बर्बाद हो गई। जिन किसानों ने फसल बीमा करा रखा है उन्हें तो क्लेम मिल जाएगा, जिन्होंने नहीं कराया उनके माथे पर चिंता की लकीरें हैं।
इस साल बारिश काफी लेट शुरू हुई। बारिश होने पर अन्ना मवेशियों के वजह से 50 प्रतिशत ही खेतों में खरीफ की फसलों की बुआई की गई। ज्यादातर ने तिलहन की बुआई की। तिलहन की फसल कसैली होने के कारण मवेशी नहीं चरते हैं। धान की फसल में पानी भरा होने से जानवर इन खेतों में प्रवेश नहीं करते हैं। ऐसे में धान की 80 फीसदी फसल जानवरों से बचा ली जाती है।
हालांकि जिन किसानों ने खेतों में बाड़ की व्यवस्था करा ली है, उनमें सभी प्रकार की फसलें देखने को मिल जाएगी। राजापुर में यमुना और मंदाकिनी में आई बाढ़ से अर्की गांव के शिव सागर यादव की 15 बीघे धान की फसल, आजाद सिंह की छह बीघे धान की फसल, प्रेम तिवारी की 10 बीघे धान की फसल, विवेक सिंह की चार बीघे, शिव शरन यादव की पांच बीघे पर खड़ी धान की फसल डूब गई।
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मुसीबत बने अन्ना मवेशी, प्रधान भी परेशान
क्षेत्र में औसतन प्रति गांव 100 अन्ना मवेशी हैं। वर्तमान प्रधान भी पूर्व के प्रधानों की तरह रोना रो रहे हैं। उनका कहना है कि 16 महीने का कार्यकाल हो चुका है, तीन-चार गांवों में चार माह की ही धनराशि का भुगतान मिल पाया है। इससे गोशालाओं को चलाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ ग्रामीणों के कोप का भाजन बनना पड़ रहा है।
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इस साल बारिश काफी लेट शुरू हुई। बारिश होने पर अन्ना मवेशियों के वजह से 50 प्रतिशत ही खेतों में खरीफ की फसलों की बुआई की गई। ज्यादातर ने तिलहन की बुआई की। तिलहन की फसल कसैली होने के कारण मवेशी नहीं चरते हैं। धान की फसल में पानी भरा होने से जानवर इन खेतों में प्रवेश नहीं करते हैं। ऐसे में धान की 80 फीसदी फसल जानवरों से बचा ली जाती है।
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हालांकि जिन किसानों ने खेतों में बाड़ की व्यवस्था करा ली है, उनमें सभी प्रकार की फसलें देखने को मिल जाएगी। राजापुर में यमुना और मंदाकिनी में आई बाढ़ से अर्की गांव के शिव सागर यादव की 15 बीघे धान की फसल, आजाद सिंह की छह बीघे धान की फसल, प्रेम तिवारी की 10 बीघे धान की फसल, विवेक सिंह की चार बीघे, शिव शरन यादव की पांच बीघे पर खड़ी धान की फसल डूब गई।
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मुसीबत बने अन्ना मवेशी, प्रधान भी परेशान
क्षेत्र में औसतन प्रति गांव 100 अन्ना मवेशी हैं। वर्तमान प्रधान भी पूर्व के प्रधानों की तरह रोना रो रहे हैं। उनका कहना है कि 16 महीने का कार्यकाल हो चुका है, तीन-चार गांवों में चार माह की ही धनराशि का भुगतान मिल पाया है। इससे गोशालाओं को चलाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ ग्रामीणों के कोप का भाजन बनना पड़ रहा है।